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गंडक का कटान दूसरे दिन भी कम रहा
Updated Fri, 24 Aug 2018 11:49 PM IST
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गंडक की थमी कटान, अब भी सहमे हैं लोग
बेघर हुए लोग बांध और राहत केंद्रों पर शरण लेने को विवश
एपी बांध और नदी के बीच घटती दूूूरी देख दहशत में हैं लोग
अमर उजाला ब्यूरो
तमकुहीरोड। क्षेत्र के अहिरौलीदान के कचहरी टोले में दो दिनों से गंडक की कटान कुछ कम जरूर हुई है, लेकिन तबाही के शिकार पीड़ितों की दुश्वारियां कम नहीं हो रही हैं। इधर बाढ़ खंड कटान रोकने की कोशिश में जुटा हुआ है। बावजूद इसके गंडक की कटान से गांव की बर्बादी देख चुके लोग अब भी सहमे हुए हैं। लोगों की आशंका है कि बचाव कार्य जारी रहने के बाद भी एपी बांध और नदी के बीच दूरी घटती ही जा रही है। नदी का रुख यही बता रहा है कि कभी भी वह कुछ और मकानों को अपनी आगोश में ले सकती है। ऐसे मेें लोग अपने घरों से जरूरी सामान समेट रहे हैं।
गंडक नदी की कटान रोकने के लिए बाढ़ खंड की ओर से जगह-जगह बोल्डर, जीरो बैग तो कहीं मिट्टी भरी बोरियां डाली जा रही हैं। वैसे नदी की कटान की जद में अहिरौलीदान का कचहरी टोला, नोनिया पट्टी, मदुरही और खैरखूटा गांव है। जहां बीस दिन के भीतर 150 से अधिक मकान और सैकड़ों हेक्टेयर उपजाऊ जमीन कटान की चपेट में आ चुकी है। कटान से विस्थापित लोग विभिन्न राहत केंद्रों के साथ ही बांध पर शरण लेकर खानाबदोश की तरह जिंदगी गुजारने को विवश हैं। लोगों का कहना है कि नदी का कोई भरोसा नहीं है। यदि नेपाल की पहाड़ियों पर भारी बारिश हुई अथवा बाल्मीकि नगर बैराज से पानी का डिस्चार्ज बढ़ा तो कभी भी स्थिति पहले जैसी हो सकती है। यही कारण है कि इस गांव के लोग अब भी सहमे हुए हैं। जिन लोगों के घरों के पास नदी पहुंच गई है, वह लोग अपने सामानों को हटाने में लगे हैं। शुक्रवार को गांव के सुकईराम, मजिस्टर पासवान, रामध्यान, ईश्वर, जयप्रकाश, धर्मदेव, शिवदत्त, नंदकिशोर, विंदेश्वरी आदि ने बताया कि बचाव कार्य के बाद भी गंडक नदी और एपी बाध की दूूरी निरंतर घटती जा रही है। जिसकी वजह से गांव वालों की चिंता बढ़ी हुई है। यदि कटान पर पूरी तरह नियंत्रण नहीं पाया गया तो कचहरी टोला का वजूद बचा पाना प्रशासन के लिए मुश्किल हो जाएगा। उधर बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता भरतराम ने बताया कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और बचाव कार्य जारी है।
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बेघर हुए लोग बांध और राहत केंद्रों पर शरण लेने को विवश
एपी बांध और नदी के बीच घटती दूूूरी देख दहशत में हैं लोग
अमर उजाला ब्यूरो
तमकुहीरोड। क्षेत्र के अहिरौलीदान के कचहरी टोले में दो दिनों से गंडक की कटान कुछ कम जरूर हुई है, लेकिन तबाही के शिकार पीड़ितों की दुश्वारियां कम नहीं हो रही हैं। इधर बाढ़ खंड कटान रोकने की कोशिश में जुटा हुआ है। बावजूद इसके गंडक की कटान से गांव की बर्बादी देख चुके लोग अब भी सहमे हुए हैं। लोगों की आशंका है कि बचाव कार्य जारी रहने के बाद भी एपी बांध और नदी के बीच दूरी घटती ही जा रही है। नदी का रुख यही बता रहा है कि कभी भी वह कुछ और मकानों को अपनी आगोश में ले सकती है। ऐसे मेें लोग अपने घरों से जरूरी सामान समेट रहे हैं।
गंडक नदी की कटान रोकने के लिए बाढ़ खंड की ओर से जगह-जगह बोल्डर, जीरो बैग तो कहीं मिट्टी भरी बोरियां डाली जा रही हैं। वैसे नदी की कटान की जद में अहिरौलीदान का कचहरी टोला, नोनिया पट्टी, मदुरही और खैरखूटा गांव है। जहां बीस दिन के भीतर 150 से अधिक मकान और सैकड़ों हेक्टेयर उपजाऊ जमीन कटान की चपेट में आ चुकी है। कटान से विस्थापित लोग विभिन्न राहत केंद्रों के साथ ही बांध पर शरण लेकर खानाबदोश की तरह जिंदगी गुजारने को विवश हैं। लोगों का कहना है कि नदी का कोई भरोसा नहीं है। यदि नेपाल की पहाड़ियों पर भारी बारिश हुई अथवा बाल्मीकि नगर बैराज से पानी का डिस्चार्ज बढ़ा तो कभी भी स्थिति पहले जैसी हो सकती है। यही कारण है कि इस गांव के लोग अब भी सहमे हुए हैं। जिन लोगों के घरों के पास नदी पहुंच गई है, वह लोग अपने सामानों को हटाने में लगे हैं। शुक्रवार को गांव के सुकईराम, मजिस्टर पासवान, रामध्यान, ईश्वर, जयप्रकाश, धर्मदेव, शिवदत्त, नंदकिशोर, विंदेश्वरी आदि ने बताया कि बचाव कार्य के बाद भी गंडक नदी और एपी बाध की दूूरी निरंतर घटती जा रही है। जिसकी वजह से गांव वालों की चिंता बढ़ी हुई है। यदि कटान पर पूरी तरह नियंत्रण नहीं पाया गया तो कचहरी टोला का वजूद बचा पाना प्रशासन के लिए मुश्किल हो जाएगा। उधर बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता भरतराम ने बताया कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और बचाव कार्य जारी है।
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