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अगले साल खत्म हो जाएगी रसोई गैस की किल्लत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर।
Updated Thu, 10 May 2018 01:07 AM IST
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अगले साल की पहली तिमाही तक गोरखपुर के साथ ही साथ बस्ती मंडल में भी रसोई गैस की किल्लत पूरी तरह से खत्म हो जाएगी। गीडा के सेक्टर 15 में निर्माणाधीन इंडियन ऑयल कारपोरेशन का बॉटलिंग प्लांट मार्च 2019 तक बनकर तैयार हो जाएगा। 38.5 एकड़ में फैले आईओसी के इस प्लांट से रोजाना 61200 सिलेंडर की आपूर्ति हो सकेगी।
जरूरत पड़ने पर क्षमता को दोगुना भी किया जा सकता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश के बाद प्लांट के निर्माण कार्य में तेजी आई है। पहले प्लांट को शुरू करने का लक्ष्य सितंबर 2019 तय था।
गोरखपुर मंडल में रोजाना करीब रोजाना 25 से 30 हजार सिलेंडर की खपत है। अभी वाराणसी, लखनऊ और इलाहाबाद के प्लांटों से गोरखपुर को आपूर्ति होती है। ठंड के मौसम में कोहरा आदि की वजह से प्राय: गाड़ियां समय से नहीं पहुंच पातीं जिससे सिलेंडर की किल्लत शुरू हो जाती है। मगर मार्च के बाद यह परेशानी भी दूर हो जाएगी।
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शिलान्यास के डेढ़ साल बाद शुरू हुआ काम
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिसंबर 2015 में गीडा सेक्टर 15 में आईओसी के बॉटलिंग प्लांट की आधारशिला रखी थी। मगर प्लांट के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनापत्ति प्रमाण पत्र 22 मार्च 2017 को मिल सका, जिसके बाद निर्माण कार्य शुरू हो गया।
सैकड़ों लोगों को मिलेगा रोजगार
यूं तो आईओसी का बॉटलिंग प्लांट पूरी तरह से ऑटोमेटिक है मगर रोजाना 200 गाड़ियों में 60 हजार से अधिक सिलेंडर चढ़ाने, उतारने समेत तमाम कामों में परोक्ष और अपरोक्ष रुप से सैकड़ों लोगों को रोजगार मिलेगा।
मार्च 2017 में पर्यावरण से संबंधित एनओसी मिलने के बाद ही बॉटलिंग प्लांट का काम शुरू हो सका। वर्तमान समय में 45.24 फीसदी काम पूरा हो गया है। पहले इसे सितंबर 2019 में पूरा करने का लक्ष्य था मगर मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद निर्माण कार्य में और तेजी ला दी गई है। अब मार्च 2019 में ही प्लांट शुरू हो जाएगा। इस प्लांट की क्षमता रोजाना 61 हजार सिलेंडर की है जरूरत के मुताबिक बाद में इसे बढ़ाया भी जा सकता है।
- संजीव कुमार, सीनियर मैनेजर, प्रोजेक्ट इंचार्ज, आईओसी बॉटलिंग प्लांट गोरखपुर
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जरूरत पड़ने पर क्षमता को दोगुना भी किया जा सकता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश के बाद प्लांट के निर्माण कार्य में तेजी आई है। पहले प्लांट को शुरू करने का लक्ष्य सितंबर 2019 तय था।
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गोरखपुर मंडल में रोजाना करीब रोजाना 25 से 30 हजार सिलेंडर की खपत है। अभी वाराणसी, लखनऊ और इलाहाबाद के प्लांटों से गोरखपुर को आपूर्ति होती है। ठंड के मौसम में कोहरा आदि की वजह से प्राय: गाड़ियां समय से नहीं पहुंच पातीं जिससे सिलेंडर की किल्लत शुरू हो जाती है। मगर मार्च के बाद यह परेशानी भी दूर हो जाएगी।
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शिलान्यास के डेढ़ साल बाद शुरू हुआ काम
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिसंबर 2015 में गीडा सेक्टर 15 में आईओसी के बॉटलिंग प्लांट की आधारशिला रखी थी। मगर प्लांट के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनापत्ति प्रमाण पत्र 22 मार्च 2017 को मिल सका, जिसके बाद निर्माण कार्य शुरू हो गया।
सैकड़ों लोगों को मिलेगा रोजगार
यूं तो आईओसी का बॉटलिंग प्लांट पूरी तरह से ऑटोमेटिक है मगर रोजाना 200 गाड़ियों में 60 हजार से अधिक सिलेंडर चढ़ाने, उतारने समेत तमाम कामों में परोक्ष और अपरोक्ष रुप से सैकड़ों लोगों को रोजगार मिलेगा।
मार्च 2017 में पर्यावरण से संबंधित एनओसी मिलने के बाद ही बॉटलिंग प्लांट का काम शुरू हो सका। वर्तमान समय में 45.24 फीसदी काम पूरा हो गया है। पहले इसे सितंबर 2019 में पूरा करने का लक्ष्य था मगर मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद निर्माण कार्य में और तेजी ला दी गई है। अब मार्च 2019 में ही प्लांट शुरू हो जाएगा। इस प्लांट की क्षमता रोजाना 61 हजार सिलेंडर की है जरूरत के मुताबिक बाद में इसे बढ़ाया भी जा सकता है।
- संजीव कुमार, सीनियर मैनेजर, प्रोजेक्ट इंचार्ज, आईओसी बॉटलिंग प्लांट गोरखपुर