{"_id":"59fb769b4f1c1bcd538babbc","slug":"171509652123-gorakhpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"जिला अस्पताल में बच्ची की मौत पर हंगामा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जिला अस्पताल में बच्ची की मौत पर हंगामा
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 03 Nov 2017 01:42 AM IST
विज्ञापन
जिला चिकित्सालय
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
गोरखपुर। जिला अस्पताल के इंसेफेलाइटिस वार्ड में बृहस्पतिवार की शाम एक बच्ची की मौत पर घरवालों ने जमकर हंगामा किया। आरोप लगाया कि सिलेंडर का ऑक्सीजन खत्म होने की वजह से बच्ची की मौत हो गई। हंगामा देख स्वास्थ्य कर्मचारी वार्ड छोड़कर भाग गए। सूचना पाकर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और समझा-बुझाकर मामले को शांत कराया।
राजघाट थाना क्षेत्र के रायगंज उत्तरी निवासी निसार उल्ला की सात साल की बेटी शनाबानो की बृहस्पतिवार की सुबह तबीयत खराब हो गई थी। घरवालों ने उसे इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया। पैथालॅजी जांच के बाद शनाबानो को इंसेफेलाइटिस वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। डॉक्टर ने स्टॉफ को ऑक्सीजन देने की सलाह दी। इस पर ऑक्सीजन सिलेंडर लगाया गया। पिता निसार का आरोप है कि बेटी की सेहत में सुधार हुआ था लेकिन अचानक दिक्कत बढ़ गई। इसकी शिकायत भी स्टॉफ से की गई लेकिन समय से कोई नहीं पहुंच सका। कुछ देर बेटी की मौत हो गई। इसकी सूचना पाकर सगे, संबंधी और आसपास के लोग जुट गए और हंगामा करने लगे। पिता का आरोप था कि जिस ऑक्सीजन सिलेंडर से आपूर्ति की जा रही थी, वह खाली था। इसकी सूचना पाकर पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने ही सबको समझा वापस किया। परिजन अपनी बच्ची का शव लेकर चले गए। मामले की शिकायत पुलिस से नहीं की गई है।
जिस डॉक्टर ने बच्ची को देखा था, उनसे बात की गई है। अस्पताल में छोटे, बड़े पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध हैं। इसकी कमी का आरोप निराधार है। बच्ची को गंभीर हालत में भर्ती कराया गया था।
विज्ञापन
: डॉ. राजकुमार गुप्ता, एसआईसी, जिला अस्पताल
राजघाट थाना क्षेत्र के रायगंज उत्तरी निवासी निसार उल्ला की सात साल की बेटी शनाबानो की बृहस्पतिवार की सुबह तबीयत खराब हो गई थी। घरवालों ने उसे इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया। पैथालॅजी जांच के बाद शनाबानो को इंसेफेलाइटिस वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। डॉक्टर ने स्टॉफ को ऑक्सीजन देने की सलाह दी। इस पर ऑक्सीजन सिलेंडर लगाया गया। पिता निसार का आरोप है कि बेटी की सेहत में सुधार हुआ था लेकिन अचानक दिक्कत बढ़ गई। इसकी शिकायत भी स्टॉफ से की गई लेकिन समय से कोई नहीं पहुंच सका। कुछ देर बेटी की मौत हो गई। इसकी सूचना पाकर सगे, संबंधी और आसपास के लोग जुट गए और हंगामा करने लगे। पिता का आरोप था कि जिस ऑक्सीजन सिलेंडर से आपूर्ति की जा रही थी, वह खाली था। इसकी सूचना पाकर पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने ही सबको समझा वापस किया। परिजन अपनी बच्ची का शव लेकर चले गए। मामले की शिकायत पुलिस से नहीं की गई है।
विज्ञापन
जिस डॉक्टर ने बच्ची को देखा था, उनसे बात की गई है। अस्पताल में छोटे, बड़े पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध हैं। इसकी कमी का आरोप निराधार है। बच्ची को गंभीर हालत में भर्ती कराया गया था।
विज्ञापन
: डॉ. राजकुमार गुप्ता, एसआईसी, जिला अस्पताल