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केक काटना भारतीय संस्कृत का हिस्सा नहीं

Fri, 08 Sep 2017 08:47 PM IST
Updated Fri, 08 Sep 2017 08:47 PM IST
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केक काटना भारतीय संस्कृत का हिस्सा नहीं

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गोरखपुर।
बच्चों के जन्मदिन पर केक काटना भारतीय संस्कृति का हिस्सा नहीं हो सकता। बर्थडे मोमबत्तियां बुझाकर मनाया जाता है। भारतीय संस्कृति में ऐसा प्रावधान नहीं है। इसमें दीपक जलाकर जन्मदिन की बधाई दी जाती है। आज पश्चिमी देश भारत की संस्कृति, सभ्यता का अनुसरण कर रहे हैं लेकिन हम पश्चिमी संस्कृति में रंगते जा रहे हैं। अंकल-आंटी के कल्चर से देश बर्बाद हो रहा है।
यह कहना है कि यूपी के उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा का। वह गोरखनाथ मंदिर में महंत दिग्विजयनाथ और अवेद्यनाथ पुण्यतिथि पर शुक्रवार को आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि जिस तरह से बर्थडे पर केक को टुकड़ों में काटा और उसे बांटा जाता है, वैसा पश्चिमी देशों में होता है। भारतीय संस्कृति में बूंदी के लड्डू बनाए जाते थे। सबका मुंह मीठा कराके आशीर्वाद लिया जाता था। यही अंतर हमारी और पाश्चात्य संस्कृति में है। पाश्चात्य संस्कृति जहां बांटने का काम करती है वहीं भारतीय संस्कृति सबको एकजुट होकर रहने का संदेश देती है। यही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा का मूल मंत्र है। उन्होंने भारतीय शिक्षा का जिक्र करते हुए कहा कि नालंदा और तक्षशिला जैसे विश्वविद्यालय भारत में थे। वहां दुनिया के लोग शिक्षा ग्रहण करने आते थे। यहां गुरुकुल की परंपरा रही है। सब लोग साथ शिक्षा ग्रहण करते थे। यहां संस्कारयुक्त शिक्षा मिलती थी। किसी के साथ भेदभाव नहीं था पर अब वह बात नहीं रही।
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बच्चों की अच्छी पढ़ाई सुनिश्चित करनी होगी
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि जो बच्चा जिस विद्यालय में पढ़ना चाहे, वहां पढ़े ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित करानी है। शिक्षा का स्तर बढ़ने से देश को फायदा मिलेगा। आज शिक्षा और स्वास्थ्य की सबसे अधिक जरूरत है। गोरक्ष पीठाधीश्वरों ने इस दिशा में बेहतर कार्य किया है। पूर्वांचल के प्रमुख स्थानों पर मंदिर द्वारा संचालित शिक्षण संस्थाएं इसका उदाहरण हैं। इन विद्यालयों की सबसे खास बात है कि यहां संस्कारयुक्त शिक्षा दी जाती है।
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गोरखनाथ मंदिर में की पूजा
उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने गोरखनाथ मंदिर में गुरु गोरखनाथ का दर्शन किया। साथ ही ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की समाधि पर पुष्प अर्पित किया। पूजा-पाठ के बाद वह दिग्विजयनाथ स्मृति सभागार भी गए। इस मौके पर विधायक शीतल पांडेय, जिलाध्यक्ष जनार्दन तिवारी, क्षेत्रीय अध्यक्ष उपेंद्र दत्त शुक्ला, डॉ. धर्मेंद्र सिंह, मंदिर के प्रभारी द्वारिका तिवारी, राहुल श्रीवास्तव, पीके मल्ल, विनय गौतम, गणेश तिवारी आदि भी मौजूद थे।
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