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गुरु श्रीगोरक्षनाथ शोधपीठ की वेबसाइट बनेगी
अमर उजाला/गाोरख्ापुर
Updated Sun, 11 Nov 2018 11:45 PM IST
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Gorakhnath
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गोरखपुर। महायोगी गुरु श्रीगोरक्षनाथ शोधपीठ की वेबसाइट जल्द तैयार की जाएगी। सदस्यता के लिए रजिस्ट्रेशन फार्म का प्रारूप भी बनाया जाएगा ताकि इच्छुक व्यक्ति शोधपीठ का सदस्य बन सके। हालांकि उसे सदस्यता शुल्क के रूप में सौ रुपये जमा करना होगा। शोधपीठ के लिए साधारण समिति का भी गठन होगा, जिसमें नाथपंथ पर अध्ययनरत विद्वान, देश भर में नाथपीठ के महंत, अनुशीलक, अधिशासी समिति के सदस्य, शोधपीठ से संबंधित विभागों के अध्यक्ष सदस्य नामित होंगे। वर्ष में कम से कम दो बार बैठकें होंगी, जिसमें शोधपीठ के उद्देश्य एवं कार्यों की समीक्षा कर भावी दिशा तय की जाएगी।
ये निर्णय गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. वीके सिंह की अध्यक्षता में उनके आवास पर रविवार को हुई एक्जीक्यूटिव कमेटी की बैठक में लिए गए। इसमें शोधपीठ के विशेष कार्याधिकारी प्रो. रविशंकर सिंह ने कमेटी के सदस्यों को प्रदेश सरकार द्वारा कुल 28 पदों के सृजन, लोगो की जानकारी, अध्यादेश, नियम व परिनियम की जानकारी दी। सदस्यों ने यह भी तय किया कि मार्च 2019 के मध्य में राष्ट्रीय संगोष्ठी कराई जाएगी। इसका विषय ‘नाथपंथ : उद्भव एवं विकास’ तय किया गया। संगोष्ठी का सूचना पत्रक तीन भाषाओं अंग्रेजी, हिंदी एवं संस्कृत में प्रकाशित किया जाएगा। बैठक में कुलपति व विशेष कार्याधिकारी ने कमेटी के सदस्यों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित भी किया।
बैठक में उ.प्र. हिंदी संस्थान कार्यकारी अध्यक्ष प्रो. सदानंद प्रसाद गुप्त, जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली संस्कृत विभाग के प्रो. संतोष शुक्ला, काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी के प्राचीन इतिहास, पुरातत्व एवं संस्कृत विभाग के प्रो. सुमन जैन, एमपीपीजी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. प्रदीप राव, गोरखपुर विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता, कला संकाय प्रो. सी.पी. श्रीवास्तव, एवं अधिष्ठाता, विज्ञान संकाय प्रो. हरिशरण आदि उपस्थित रहे।
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बैठक में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय
- साधारण समिति की बैठक दो बार कराई जाएगी
- देश भर से नाथपंथ के विद्वानों की सूची तैयार की जाएगी
- नाथपंथ की ग्रंथानुक्रमणिका तैयार की जाएगी
प्रकाशित होगी छमाही शोध पत्रिका
गोरखपुर। महायोगी गुरु श्रीगोरक्षनाथ शोधपीठ की ओर से छमाही शोध पत्रिका प्रकाशित की जाएगी। प्रो. संतोष शुक्ल ने शोध पत्रिका का नाम ‘नाथ-प्रज्ञा’ प्रस्तावित किया। प्रथम शोध पत्रिका का लोकार्पण चैत्र प्रतिपदा पर तथा द्वितीय का विजयदशमी पर किया जाएगा। पत्रिका के संरक्षक कुलपति प्रो. विजय कृष्ण सिंह, संपादक एमजीपीजी कॉलेज जंगल धूसड़ के प्राचार्य डा. प्रदीप राव तथा प्रबंध संपादक शोधपीठ के विशेष कार्याधिकारी प्रो. रविशंकर सिंह को बनाया गया है। संपादक मंडल का कार्य अधिशासी समिति करेगी।
11 पुस्तकें भी प्रकाशित की जाएंगी
गोरखपुर। शोधपीठ की तरफ से हिंदी में 11 पुस्तकें प्रकाशित होंगी। इनका अंग्रेजी और संस्कृत में अनुवाद प्रकाशित करने का भी निर्णय लिया गया। पुस्तकों में महायोगी गुरु श्रीगोरक्षनाथ के योग व आध्यात्म के बारे में जानकारी के साथ ही शोधपीठ के कार्य का भी उल्लेख होगा। पुस्तकों के लेखक भी तय कर दिए गए हैं। उन्हें तीन महीने में कार्य पूरा करना है। एक्जीक्यूटिव बॉडी ने निर्णय लिया है कि शोधपीठ द्वारा प्रकाशित कृतियों के मुखपृष्ठ की डिजाइन एक होगी, जिस पर लोगो भी होगा।
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ये निर्णय गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. वीके सिंह की अध्यक्षता में उनके आवास पर रविवार को हुई एक्जीक्यूटिव कमेटी की बैठक में लिए गए। इसमें शोधपीठ के विशेष कार्याधिकारी प्रो. रविशंकर सिंह ने कमेटी के सदस्यों को प्रदेश सरकार द्वारा कुल 28 पदों के सृजन, लोगो की जानकारी, अध्यादेश, नियम व परिनियम की जानकारी दी। सदस्यों ने यह भी तय किया कि मार्च 2019 के मध्य में राष्ट्रीय संगोष्ठी कराई जाएगी। इसका विषय ‘नाथपंथ : उद्भव एवं विकास’ तय किया गया। संगोष्ठी का सूचना पत्रक तीन भाषाओं अंग्रेजी, हिंदी एवं संस्कृत में प्रकाशित किया जाएगा। बैठक में कुलपति व विशेष कार्याधिकारी ने कमेटी के सदस्यों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित भी किया।
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बैठक में उ.प्र. हिंदी संस्थान कार्यकारी अध्यक्ष प्रो. सदानंद प्रसाद गुप्त, जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली संस्कृत विभाग के प्रो. संतोष शुक्ला, काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी के प्राचीन इतिहास, पुरातत्व एवं संस्कृत विभाग के प्रो. सुमन जैन, एमपीपीजी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. प्रदीप राव, गोरखपुर विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता, कला संकाय प्रो. सी.पी. श्रीवास्तव, एवं अधिष्ठाता, विज्ञान संकाय प्रो. हरिशरण आदि उपस्थित रहे।
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बैठक में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय
- साधारण समिति की बैठक दो बार कराई जाएगी
- देश भर से नाथपंथ के विद्वानों की सूची तैयार की जाएगी
- नाथपंथ की ग्रंथानुक्रमणिका तैयार की जाएगी
प्रकाशित होगी छमाही शोध पत्रिका
गोरखपुर। महायोगी गुरु श्रीगोरक्षनाथ शोधपीठ की ओर से छमाही शोध पत्रिका प्रकाशित की जाएगी। प्रो. संतोष शुक्ल ने शोध पत्रिका का नाम ‘नाथ-प्रज्ञा’ प्रस्तावित किया। प्रथम शोध पत्रिका का लोकार्पण चैत्र प्रतिपदा पर तथा द्वितीय का विजयदशमी पर किया जाएगा। पत्रिका के संरक्षक कुलपति प्रो. विजय कृष्ण सिंह, संपादक एमजीपीजी कॉलेज जंगल धूसड़ के प्राचार्य डा. प्रदीप राव तथा प्रबंध संपादक शोधपीठ के विशेष कार्याधिकारी प्रो. रविशंकर सिंह को बनाया गया है। संपादक मंडल का कार्य अधिशासी समिति करेगी।
11 पुस्तकें भी प्रकाशित की जाएंगी
गोरखपुर। शोधपीठ की तरफ से हिंदी में 11 पुस्तकें प्रकाशित होंगी। इनका अंग्रेजी और संस्कृत में अनुवाद प्रकाशित करने का भी निर्णय लिया गया। पुस्तकों में महायोगी गुरु श्रीगोरक्षनाथ के योग व आध्यात्म के बारे में जानकारी के साथ ही शोधपीठ के कार्य का भी उल्लेख होगा। पुस्तकों के लेखक भी तय कर दिए गए हैं। उन्हें तीन महीने में कार्य पूरा करना है। एक्जीक्यूटिव बॉडी ने निर्णय लिया है कि शोधपीठ द्वारा प्रकाशित कृतियों के मुखपृष्ठ की डिजाइन एक होगी, जिस पर लोगो भी होगा।