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जलसे में बयां की इमाम हुसैन की शख्सियत
Updated Sun, 08 Oct 2017 07:51 PM IST
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गोरखपुर।
फैजान-ए-रजा नौजवान कमेटी की जानिब से रविवार को नूरी जामा मस्जिद अहमद नगर चक्शा हुसैन में जलसा ‘जिक्र-ए-शोहदा-ए-कर्बला’ का आयोजन किया गया। इसमें हजरत इमाम हुसैन व उनके 72 साथियों की कुर्बानी को याद किया गया।
मुख्य अतिथि मुंबई के मौलाना सैयद अब्दुल हबीब रज़वी ने कहा कि इमाम हुसैन की शहादत ने इस्लाम की अजमत को कयामत तक के लिए बचा लिया। पूरी दुनिया को पैगाम दिया कि अन्याय व जुल्म के सामने सिर झुकाने से बेहतर है कि सिर कटा दिया जाए। बोले, नबी-ए-पाक के बताए इस्लाम को समझना है तो पहले कर्बला को जानना बेहद जरूरी है। विशिष्ट वक्ता ने मुफ्ती मोहम्मद अजहर शम्सी ने कहा कि हजरत इमाम हसन हुसैन ने इंसानियत की हिफाजत के लिए खुद व अपने परिवार को कुर्बान कर दिया। मुफ्ती अजहर ने इस्लाम में किरदार की अहमियत को समझाया। शादाब अहमद रज़वी ने नात-ए-रसूल पेश कर जलसे को पुरनूर बनाया। इसके बाद दारैन हैदर ने हजरत इमाम हुसैन की शान में कलाम पेश कर समा बांधा। इससे पूर्व कारी हसनैन हैदर ने तिलावते कुरआन पाक से जलसे का आगाज किया। सदारत हाफिज जमालुद्दीन ने की। संचालन मौलाना सैफ अली फैजी ने किया। अंत में सलातो-सलाम पढ़ मुख्य अतिथि ने मुल्क-ओ-मिल्लत की खुशहाली और अमन के लिए दुआ की। इस मौके पर नौशाद अहमद, डॉ. इनामुल्लाह, मो. नूरुद्दीन, रमजान अली, हाफिज शम्सुद्दीन, मौलवी दानिश रज़वी, हाजी हाशिम आदि मौजूद रहे।
फैजान-ए-रजा नौजवान कमेटी की जानिब से रविवार को नूरी जामा मस्जिद अहमद नगर चक्शा हुसैन में जलसा ‘जिक्र-ए-शोहदा-ए-कर्बला’ का आयोजन किया गया। इसमें हजरत इमाम हुसैन व उनके 72 साथियों की कुर्बानी को याद किया गया।
मुख्य अतिथि मुंबई के मौलाना सैयद अब्दुल हबीब रज़वी ने कहा कि इमाम हुसैन की शहादत ने इस्लाम की अजमत को कयामत तक के लिए बचा लिया। पूरी दुनिया को पैगाम दिया कि अन्याय व जुल्म के सामने सिर झुकाने से बेहतर है कि सिर कटा दिया जाए। बोले, नबी-ए-पाक के बताए इस्लाम को समझना है तो पहले कर्बला को जानना बेहद जरूरी है। विशिष्ट वक्ता ने मुफ्ती मोहम्मद अजहर शम्सी ने कहा कि हजरत इमाम हसन हुसैन ने इंसानियत की हिफाजत के लिए खुद व अपने परिवार को कुर्बान कर दिया। मुफ्ती अजहर ने इस्लाम में किरदार की अहमियत को समझाया। शादाब अहमद रज़वी ने नात-ए-रसूल पेश कर जलसे को पुरनूर बनाया। इसके बाद दारैन हैदर ने हजरत इमाम हुसैन की शान में कलाम पेश कर समा बांधा। इससे पूर्व कारी हसनैन हैदर ने तिलावते कुरआन पाक से जलसे का आगाज किया। सदारत हाफिज जमालुद्दीन ने की। संचालन मौलाना सैफ अली फैजी ने किया। अंत में सलातो-सलाम पढ़ मुख्य अतिथि ने मुल्क-ओ-मिल्लत की खुशहाली और अमन के लिए दुआ की। इस मौके पर नौशाद अहमद, डॉ. इनामुल्लाह, मो. नूरुद्दीन, रमजान अली, हाफिज शम्सुद्दीन, मौलवी दानिश रज़वी, हाजी हाशिम आदि मौजूद रहे।
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