{"_id":"5cffcae2bdec22075060a34b","slug":"156026748117-gorakhpur-news164","type":"story","status":"publish","title_hn":"मनमानी पर उतर आया है जिला और निगम प्रशासन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मनमानी पर उतर आया है जिला और निगम प्रशासन
Tue, 11 Jun 2019 10:10 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर।
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 11 Jun 2019 10:10 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
- छूट के बावजूद प्लास्टिक पैकेजिंग मैटेरियल की हो रही धरपकड़
- विक्रेताओं और उत्पादकों को प्रशासन की दो टूक-बंद कर दो कारोबार
- हजारों लोगों की रोजी-रोटी पर पड़ने लगा है प्रभाव गोरखपुर। उत्तरप्रदेश प्लास्टिक और अन्य जीव अनाशित कूड़ा कचरा (विनियमन) अधिनियम 2000 की आड़ में नगर निगम प्रशासन मनमानी पर उतर आया है। पिछले साल दो अक्टूबर से लागू किए गए कानून के तहत केवल डिस्पोजेबल (एक बार इस्तेमाल कर फेंकने योग्य) प्लास्टिक कैरी बैगों के उपयोग, निर्माण, विक्रय, वितरण, भंडारण, परिवहन आयात या निर्यात पर प्रतिबंध लगाया गया है, लेकिन जिला और नगर निगम प्रशासन न सिर्फ छूट के दायरे में आने वाले प्लास्टिक पैकेजिंग मैटेरियल की धड़पकड़ कर रहा है बल्कि उत्पादन और बिक्री करने को तत्काल प्रभाव से बंद करने का फरमान सुना दिया है। इस फैसले से हजारों लोगों की रोजी रोटी पर संकट उत्पन्न हो गया है।
विज्ञापन
गीडा में प्लास्टिक पैकेजिंग मैटेरियल बनाने वाली 14 फैक्ट्रियां हैं। इनसे प्रत्यक्ष तौर पर करीब 14-15 सौ लोग जुडे़ हैं। अप्रत्यक्ष तौर पर तो यह संख्या पांच हजार से ज्यादा है। पिछले साल अधिनियम लागू होने के बाद तत्कालीन कमिश्नर ने गोरखपुर प्लास्टिक प्रोडक्ट्स एसोसिएशन को नियमानुसार पैकेजिंग मैटेरियल को प्रतिबंध के दायरे से छूट की अनुमति दी थी, लेकिन जिला और नगर निगम प्रशासन इसे खारिज करते हुए सभी प्लास्टिक मैटेरियल को करने का फरमान सुना दिया है।
विज्ञापन
कमिश्नर से मिलने गए उद्यमी मायूस होकर लौटे
गोरखपुर। मंगलवार को गोरखपुर प्लास्टिक प्रोडक्ट्स एसोसिएशन के सदस्य कमिश्नर से मिलने पहुंचे। एसोसिएशन ने पैकिंग मैटेरियल पर प्रतिबंध नहीं होने संबंधी प्रावधान को कमिश्नर के सामने रखा, लेकिन कमिश्नर के अलावा डीएम ने उनकी एक भी बात नहीं मानी। प्लास्टिक कैरी बैग के अलावा प्लास्टिक पैकिंग मैटेरियल पर भी पूरी तरह से रोक बताते हुए उत्पादन को तत्काल प्रभाव से बंद करने का आदेश सुना दिया।
विज्ञापन
एसोसिएशन के अध्यक्ष पवन टिबड़ेवाल के अलावा सुधांशु टिबड़ेवाल, शंभू गुप्ता, राजेश अग्रवाल, सर्वेश माथुर आदि ने कहा कि शासनादेश में अगर प्लास्टिक पैकेजिंग मैटेरियल पर प्रतिबंध का प्रावधान कर दिया जाता है तो हम कल से ही उत्पादन बंद कर देंगे। अभी तो नियमानुसार पैकेजिंग मैटेरियल का निर्माण कर रहे हैं, लेकिन जिला और नगर निगम प्रशासन जबरदस्ती बंद करा रहा है।
मेयर और अधिकारियों के सुर अलग- अलग
पॉलिथीन बनाने वाले सभी निर्माताओं पर सख्ती की जा रही है। पैकेजिंग मैटेरियल की आड़ में यह निर्माता चोरी से पॉलिथीन भी बना रहे हैं। इस वजह से सख्ती की जा रही है। तीन बार एफआईआर भी दर्ज कराई गई है।
के. विजयेंद्र पांडियन, जिलाधिकारी
सभी तरह के प्लास्टिक उत्पादों पर प्रतिबंध है। प्लास्टिक पैकेजिंग मैटेरियल की आड़ में इन फैक्ट्रियों के द्वारा पॉलिथीन का भी उत्पादन किया जा रहा है। ऐसे किसी भी उत्पादकों को अनुमति नहीं दी जाएगी।
अंजनी कुमार सिंह, नगर आयुक्त
केवल प्लास्टिक कैरीबैग और थर्मोकोल पर ही प्रतिबंध है। प्लास्टिक पैकेजिंग मैटेरियल को इससे छूट मिली है। पैकेजिंग मैटेरियल के निर्माण या भंडारण करने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं होगी।
- सीताराम जायसवाल, मेयर