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शहर में आते ही हो रहे लोग सांस के मरीज
Thu, 06 Jun 2019 02:10 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर।
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Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 06 Jun 2019 02:10 AM IST
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गोरखपुर। गांव में थे, सुबह ताजी हवा और देशी खानपान था तो शरीर भी निरोग था। लेकिन शहर में आते ही प्रदूषण ने आबोहवा कुछ ऐसी बिगाड़ी कि मरीज हो गए। शहर में रहने वालों की आयु कोई भी हो रोग प्रतिरोधक क्षमता घटती जा रही है। इसकी गवाही मेडिकल कॉलेज के चेस्ट वार्ड के बाहर लग रही मरीजों की लंबी लाइन भी दे रही है। मेडिकल कॉलेज के छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. अश्वनी कुमार मिश्रा के अनुसार शहर में प्रदूषण का आलम यह है कि गांव से आने वाला स्वस्थ व्यक्ति पांच से छह माह में सांस का रोगी बन जा रहा है।
डॉ. अश्वनी के अनुसार पिछले पांच सालों में सांस के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। मेडिकल कॉलेज में रोजाना लगभग 25 से 30 सांस की समस्या से ग्रस्त लोग इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। बढ़ती दिक्कत का एक कारण शहर में लगातार निर्माण कार्य होने की वजह से धूल और गंदगी का हवा में फैलना है।
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स्थान आरएसपीएम (मानक) एसओ-2(मानक) एनओ-2 (मानक)
(10)
आवासीय 125.14 (60) 9.79 (40) 22.74 (60)
व्यवसायिक 218.16 (60) 35.78 (40) 53.57 (60)
औद्योगिक 236.7 (60) 39.98 (40) 58.51 (60)
वायु गुणवत्ता सूचकांक 117 179 191
51- 100 संतोषनजनक
101-200 अस्वास्थ्यकर
200-300 खराब
300-40 बहुत खराब
नोट:आपको हमारी यह स्टोरी कैसी लगी इस पर अपना फीडबैक नीचे बने कमेंट बॉक्स में जरूर दें।
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डॉ. अश्वनी के अनुसार पिछले पांच सालों में सांस के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। मेडिकल कॉलेज में रोजाना लगभग 25 से 30 सांस की समस्या से ग्रस्त लोग इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। बढ़ती दिक्कत का एक कारण शहर में लगातार निर्माण कार्य होने की वजह से धूल और गंदगी का हवा में फैलना है।
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प्रदूषण स्तर के साथ बीमारी की जटिलता भी बढ़ी
डॉ. अश्वनी के अनुसार प्रदूषण का स्तर बढ़ने के साथ ही सांस के मरीजों की जटिलता भी बढ़ती जा रही है। एक इन्हेलर से जिन मरीजों का महीने का काम चल जाता था उन्हें अब तीन इन्हेलर भी कम पड़ जा रहे हैं। इसके अलावा जिन मरीजों को पहले दवा से ही आराम मिल जाता था उन्हें अब महीने ने एक बार भर्ती तक करना पड़ रहा है।
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बचाव के उपाय
- मास्क पहन कर निकलें
- नाभि में सरसों का तेल लगाएं
- खाने में हरी सब्जियों, हल्दी का प्रयोग अधिक करें
- घर में व आस पास पौधे लगाएं
- अस्थमा है तो दवाइयां हमेशा साथ रखे।
- गर्भवती महिलाएं घर में भी मास्क पहनें
यही हाल रहा तो ‘दिल्ली दूर नहीं’
गोरखपुर। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के शिक्षक एवं पर्यावरणविद डॉ. गोविंद पांडेय का कहना है कि गोरखपुर का वायु गुणवत्ता सूचकांक अस्वास्थ्यकर हो चुका है। अगर सुधारकी कोशिश नहीं हुई तो आने वाले समय में प्रदूषण के मामले में ‘दिल्ली से दूर’ नहीं है।स्थान आरएसपीएम (मानक) एसओ-2(मानक) एनओ-2 (मानक)
(10)
आवासीय 125.14 (60) 9.79 (40) 22.74 (60)
व्यवसायिक 218.16 (60) 35.78 (40) 53.57 (60)
औद्योगिक 236.7 (60) 39.98 (40) 58.51 (60)
वायु गुणवत्ता सूचकांक 117 179 191
वायु गुणवत्ता सूचकांक मानक
0 - 50 बेहतर51- 100 संतोषनजनक
101-200 अस्वास्थ्यकर
200-300 खराब
300-40 बहुत खराब
नोट:आपको हमारी यह स्टोरी कैसी लगी इस पर अपना फीडबैक नीचे बने कमेंट बॉक्स में जरूर दें।