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सर जाने दीजिए न, साल बर्बाद हो जाएगा
Thu, 06 Jun 2019 02:02 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर।
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Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 06 Jun 2019 02:02 AM IST
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गोरखपुर। ... सर मेरे एडमिट कार्ड में केंद्र का नाम राजकीय पॉलिटेक्निक छपा है। पेपर शुरू हो गया है, प्लीज पेपर देने दीजिए नहीं तो साल बर्बाद हो जाएगा। मेरी क्या गलती है, हमें क्यों सजा मिल रही है? ये गुहार मंगलवार को राजकीय पॉलिटेक्निक में छात्र अंकित सोनकर ने प्रधानाचार्य दिनेश से लगाई। वे इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग ब्रांच से हैं और बैक पेपर देने पहुुंचे थे।
कहा कि दाखिला लेने वाला संस्थान यहां से करीब 30 किलोमीटर दूर है। समय से अब वहां पहुंचना मुश्किल है। पेपर छूट जाएगा।
खजनी के बनकटी स्थित महामानव गौतमबुद्ध पॉलिटेक्निक के छात्र अंकित सोनकर ने बताया कि वो इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में दूसरे वर्ष के छात्र है। बैकपेपर के लिए आवेदन किया तो प्राविधिक परिषद ने ऑनलाइन भेजे प्रवेश पत्र में राजकीय पॉलिटेक्निक गोरखपुर को केंद्र बताया है। दोपहर 1:45 पर जब केंद्र पहुंचा तो अंदर जाने ही नहीं दिया। इससे पेपर छूट गया। राजकीय पॉलिटेक्निक के प्राचार्य दिनेश ने बताया कि प्राविधिक शिक्षा परिषद की ओर से जारी एडमिट कार्ड में कुछ विद्यार्थियों के केंद्र का नाम गलत छपा है। सभी संस्थानों को इसकी जानकारी दी गई थी कि केंद्र में बदलाव नहीं किया गया है। दाखिले लेने वाले संस्थान ने रुचि नहीं ली, इसी से समस्या हुई है।
नोट:आपको हमारी यह स्टोरी कैसी लगी इस पर अपना फीडबैक नीचे बने कमेंट बॉक्स में जरूर दें।
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कहा कि दाखिला लेने वाला संस्थान यहां से करीब 30 किलोमीटर दूर है। समय से अब वहां पहुंचना मुश्किल है। पेपर छूट जाएगा।
खजनी के बनकटी स्थित महामानव गौतमबुद्ध पॉलिटेक्निक के छात्र अंकित सोनकर ने बताया कि वो इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में दूसरे वर्ष के छात्र है। बैकपेपर के लिए आवेदन किया तो प्राविधिक परिषद ने ऑनलाइन भेजे प्रवेश पत्र में राजकीय पॉलिटेक्निक गोरखपुर को केंद्र बताया है। दोपहर 1:45 पर जब केंद्र पहुंचा तो अंदर जाने ही नहीं दिया। इससे पेपर छूट गया। राजकीय पॉलिटेक्निक के प्राचार्य दिनेश ने बताया कि प्राविधिक शिक्षा परिषद की ओर से जारी एडमिट कार्ड में कुछ विद्यार्थियों के केंद्र का नाम गलत छपा है। सभी संस्थानों को इसकी जानकारी दी गई थी कि केंद्र में बदलाव नहीं किया गया है। दाखिले लेने वाले संस्थान ने रुचि नहीं ली, इसी से समस्या हुई है।
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