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नगर विधायक के सवालोें पर जीडीए अफसरों की चुप्पी
Fri, 01 Feb 2019 11:59 PM IST
ajay Kumar
Gorakhpur, Uttar Pradesh, India
Gorakhpur, Uttar Pradesh, India
Published by: ajay Kumar
Updated Fri, 01 Feb 2019 11:59 PM IST
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गोरखपुर। आवंटियों के अनुरोध पर नगर विधायक डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल ने शुक्रवार की सुबह 11 बजे लोहिया एंक्लेव फेज एक के आवासों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने आवंटियों की सभी शिकायतों को जायज माना। उन्होंने जब जीडीए के अफसरों से सवाल करने शुरू किए तो सभी ने चुप्पी साध ली। विधायक ने प्राधिकरण के अफसरों को कमियां दुरुस्त कराकर 15 मार्च तक आवंटियों को कब्जा देने का अल्टीमेटम दिया। उन्होंने पूरे मुद्दे को विधानसभा में उठाने की भी बात कही।
नगर विधायक ने चेतावनी दी कि इस तरह की धांधली नहीं चलने दी जाएगी। जीडीए या तो कमियों को दूर कराए या इनके मूल्य के बराबर नागरिकों को मकान के दाम में छूट दे। निरीक्षण के दौरान विधायक ने जब घटिया निर्माण को लेकर सवाल खड़े करने शुरू किए तो कुछ ठेकेदारों से उनकी नोंकझोंक भी हुई। ठेकेदार अपने काम को गुणवत्तायुक्त बता रहे थे। इस दौरान जीडीए सचिव राम सिंह गौतम, एक्सईएन अवनिंद्र सिंह समेत कई अफसर और आवंटी मौजूद रहे।
इंटरलाकिंग ब्रिक की पटरी गायब मिली।
अधिकांश जगहों पर बालकनी का क्षेत्रफल मानक से कम मिला।
बालकनी कवर्ड भी नहीं थी।
पार्किंग के स्थान पर जीडीए ने कमरे बना दिए।
एक पार्क में पानी की टंकिया बना दी गई।
किचन और वायरिंग में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया।
तय समय के दो साल बाद भी आवंटियों को कब्जा नहीं मिला।
मनमाने तरीके से मकानों के दाम चार लाख रुपये बढ़ा दिए गए।
शासनादेश के बाद भी आवंटियों द्वारा जमा रकम पर ब्याज नहीं दिया गया।
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नगर विधायक ने चेतावनी दी कि इस तरह की धांधली नहीं चलने दी जाएगी। जीडीए या तो कमियों को दूर कराए या इनके मूल्य के बराबर नागरिकों को मकान के दाम में छूट दे। निरीक्षण के दौरान विधायक ने जब घटिया निर्माण को लेकर सवाल खड़े करने शुरू किए तो कुछ ठेकेदारों से उनकी नोंकझोंक भी हुई। ठेकेदार अपने काम को गुणवत्तायुक्त बता रहे थे। इस दौरान जीडीए सचिव राम सिंह गौतम, एक्सईएन अवनिंद्र सिंह समेत कई अफसर और आवंटी मौजूद रहे।
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ये मिलीं कमियां
नियमानुसार चहारदीवारी नहीं बनी थी।इंटरलाकिंग ब्रिक की पटरी गायब मिली।
अधिकांश जगहों पर बालकनी का क्षेत्रफल मानक से कम मिला।
बालकनी कवर्ड भी नहीं थी।
पार्किंग के स्थान पर जीडीए ने कमरे बना दिए।
एक पार्क में पानी की टंकिया बना दी गई।
किचन और वायरिंग में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया।
तय समय के दो साल बाद भी आवंटियों को कब्जा नहीं मिला।
मनमाने तरीके से मकानों के दाम चार लाख रुपये बढ़ा दिए गए।
शासनादेश के बाद भी आवंटियों द्वारा जमा रकम पर ब्याज नहीं दिया गया।