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जब रेलवे स्टेशन से पैदल ही चल पड़े थे जॉर्ज
Tue, 29 Jan 2019 11:53 PM IST
ajay Kumar
Gorakhpur, Uttar Pradesh, India
Gorakhpur, Uttar Pradesh, India
Published by: ajay Kumar
Updated Tue, 29 Jan 2019 11:53 PM IST
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जॉर्ज फर्नांडीस
- फोटो : pt
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गोरखपुर। समाजवादी नेता और पूर्व रक्षामंत्री जॉर्ज फर्नांडीस का गोरखपुर के लोगों से बहुत ज्यादा आत्मीयता थी। यहां वे करीब दस बार आए थे। तीन बार तो उन्होंने काफी समय दिया। सभाएं कीं और परिचितों से मुलाकात भी। एक लंबी टीम थी गोरखपुर और आसपास में। यही वजह है कि 1965 में भारी समर्थकों के साथ रेलवे स्टेशन पहुंचे डीबी कॉलेज के छात्रसंघ अध्यक्ष फतेह बहादुर सिंह को देखकर वह भाव विभोर हो गए। फतेह बहादुर बताते हैं कि वे स्टेशन से पैदल ही जुलूस के साथ कॉलेज तक गए। कॉलेज में छात्रसंघ उद्घाटन समारोह था। इसी तरह 1988 में गोरखपुर विश्वविद्यालय के मजीठिया भवन में बुद्धजीवियों की सभा में जार्ज स्टेशन से अकेले ही पहुंच गए। ये दो वाकये उनकी सादगी की बानगी हैं। जार्ज के संघर्ष के साथियों ने उन्हें चलता-फिरता आंदोलन बताया।
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केएल गुप्त, महामंत्री, एनई रेलवे मजदूर यूनियन
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ढाबे में खाट पर ही सो जाते
जेपी मूवमेंट में उनके साथ लंबी पैदल यात्रा की। वे रात नौ बजे के बाद भोजन नहीं करते थे। अक्सर ढाबे पर खाट पर सो जाते। गुजरात में कारगिल कंपनी जब स्थापित हो रही थी तो उन्होंने पूरे देश के समाजवादियों को एकत्र कर आंदोलन किया। कारगिल को वापस जाना पड़ा। इसे फोर्ब्स ने बड़ी घटना करार दिया। ऐसी शख्सियत थे जार्ज। उनमें अजीब क्षमता थी। वे किसी से टकराने में संकोच नहीं करते थे।
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संसद की कार्रवाई बताने आया हूं
1988 में उन्हें विश्वविद्यालय के मजीठिया भवन में बुलाया था। बुद्धजीवियों की सभा में वह आए थे। बोले, राजनीति में सत्ता का भ्रष्टाचार खतरनाक है। मुखालफत करने वाले देशद्रोही माने जाते हैं। इस दौर को बुद्धजीवी ही समझ सकते हैं। बोफोर्स मुद्दे पर भी बेबाकी से अपनी बात कही। कहा था, संसद की कार्रवाई लाइव नहीं देख सकते हैं। बहुत काटकर दिखाते हैं। सच बताने आया हूं। लीडर बनकर नहीं साथी के रूप में आया हूं।
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मधुकर दिघे की पुस्तक का विमोचन
रेलवे की यूनियन में रहते हुए जार्ज साहब के साथ काम करने का अवसर मिला था। वे 1973 से 1976 तक आल इंडिया रेलवे मेन्स फेडरेशन के अध्यक्ष रहे। 1974 के रेल हड़ताल में उनकी अहम भूमिका थी। वे व्यक्ति नहीं संस्था थे। सबको साथ लेकर चलने की असीम क्षमता वाले थे। गोरखपुर विश्वविद्यालय में पूर्व राज्यपाल मधुकर दिघे की पुस्तक का विमोचन करने आए थे तो मैं मिलने गया था। देखते ही बोल पड़े, कैसे हो गुप्ता जी। यह हमारी अंतिम मुलाकात थी। उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।केएल गुप्त, महामंत्री, एनई रेलवे मजदूर यूनियन