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तिनकोनिया नंबर दो में फैला सेहत का संदेश
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Thu, 21 Dec 2017 12:58 AM IST
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स्वास्थ्य शिविर में मौजूद लोग।
- फोटो : Amar Ujala
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अमर उजाला फाउंडेशन का अभियान ‘स्वस्थ शरीर, सुरक्षित जीवन’ बुधवार को चरगांवा के तिनकोनिया नंबर दो में यही संदेश दे गया। फाउंडेशन की पहल पर गांव के प्राथमिक-उच्च प्राथमिक विद्यालय पर जब स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची तो वहां लोगों की भीड़ जुटी मिली। यह सेहत के प्रति लोगों में आई संजीदगी ही थी कि सुबह 10 से दोपहर दो बजे तक निर्धारित निशुल्क स्वास्थ्य शिविर का समय एक घंटे बढ़ाना पड़ा। महाराणा प्रताप जंगल धूसड़ के शिक्षकों के साथ एनएसएस स्वयंसेवी और स्कूल स्टाफ ने आयोजन में अहम योगदान दिया। इस बीच आठ डॉक्टरों की टीम ने 530 मरीजों का इलाज किया। अमर उजाला फाउंडेशन की वैन से रक्त जांच के बाद लोगों को बेहतर परामर्श मिला तो वहीं दवाएं भी दी गईं।
उम्र बढ़ाई मगर हेल्दी ऐज घटी
स्वास्थ्य शिविर में मरीजों की जांच के बाद चरगांवा सीएचसी के प्रभारी डॉ. धनंजय कुशवाहा ने बताया कि चिकित्सा विज्ञान के जरिए हमने औसत उम्र तो बढ़ा ली, लेकिन बिगड़ी जीवनशैली और प्रदूषण से हेल्दी एज घट गई है। बीपी, शुगर जैसी बीमारियां जो पहले बुजुर्गों में सामने आती थीं, अब युवा भी इनसे ग्रस्त होने लगे हैं। उन्होंने ‘स्वस्थ शरीर, सुरक्षित जीवन’ के लिए स्वस्थ जीवनशैली पर जोर दिया।
सफाई से कई बीमारियां होंगी दूर
सेवा भाव से खुद शिविर में सहयोग देने आए फीजिशयन डॉ. मनोज जायसवाल ने बताया कि अधिकतर मरीज फंगल इंफेक्शन से परेशान मिले। हम अगर सफाई को अपनाएं तो ऐसी कई बीमारियां खुद-ब-खुद दूर हो जाएंगी। जिला अस्पताल के बालरोग विशेषज्ञ डॉ. अरुण गर्ग, चरगांवा सीएचसी के डॉ. विनय कुमार सिंह और जंगल धूसड़ स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात डॉ. वीके चौधरी ने भी सफाई पर जोर देते हुए इसे इंसेफेलाइटिस पर अंकुश के लिए बेहद कारगर बताया।
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महिलाओं को मिला सेहत का मंत्र
बड़ी संख्या में महिलाओं ने शिविर में आकर इसका लाभ उठाया। घर-परिवार की व्यस्तता के बीच सेहत से समझौता करने वाली कई महिलाओं को जिला महिला अस्पताल की डॉ. सुषमा सिन्हा और चरगांवा सीएचसी की डॉ. चित्रा त्रिपाठी ने अच्छी सेहत का मंत्र बताया। न सिर्फ मर्ज का इलाज बताया बल्कि रोगों की रोकथाम के लिए संतुलित खान-पान की जानकारी भी दी। स्टाफ नर्स पूजा भी महिला मरीजों को उपयोगी जानकारियां देने में जुटी रहीं।
78 लोगों की आंखें जांचीं
जिला अस्पताल के वरिष्ठ नेत्र सर्जन डॉ. बीएन तिवारी और चरगांवा सीएचसी के ऑप्टोमेटिस्ट ऋषिकेष पासवान ने शिविर में 78 लोगों की आंखों की जांच की। चरगांवा सीएचसी की लैब टेकभनीशियन नेहा पांडेय अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से कराए जा रहे मरीजों के ब्लड टेस्ट में सहयोग दिया। चरगांवा सीएचसी के फार्मासिस्ट मनीष अग्रहरि वार्ड ब्वॉय शिवाकांत मणि के साथ अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से आई दवाएं बांटने में जुटे रहे।
पहले जगाई थी जागरूकता की अलख
अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से 17 दिसंबर को इसी विद्यालय में गोष्ठी के जरिए लोगों को सेहत के प्रति जागरूक करने कोशिश की गई थी। गांव में इंसेफेलाइटिस से हुई मौतों के मद्देनजर अमर उजाला फाउंडेशन ने अपने अभियान के लिए इस गांव को चुना था। गोष्ठी ने रविवार को जो अलख जगाई थी, उसका असर बुधवार को स्वास्थ्य शिविर में साफ दिखा।
बदले मौसम ने दिया ‘आमंत्रण’
मौसम का बदला मिजाज भी मानो लोगों को शिविर में आने का आमंत्रण दे रहा था। पिछले कई दिन से सुबह कोहरे में सहमा सूरज भी बुधवार ‘सेहतमंद’ हो उठा। दस बजे ही पूरी धूप खिल गई। पिछले दिनों की तरह न सर्द हवाएं बहीं और न ही बादलों ने सुहानी धूप रोकी। लगा जैसे शिविर पर अपनी कृपा बरसाकर सूरज भी इस पुनीत काम में भागीदार बनने में लगा है।
सेहत के सबक से गांव गदगद
सेहत के सबक से तिनकोनिया नंबर दो गांव गदगद नजर आया। गांव की ओर से ग्राम प्रधान बसपा नेता राजकुमार ने अमर उजाला फाउंडेशन का आभार जताया। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन न सिर्फ तात्कालिक लाभ देते हैं बल्कि इसके जरिए आने वाली जागरूकता दीर्घकालिक सुखद परिणाम भी देती है। उन्होंने शानदार शिविर के लिए चिकित्सकों का धन्यवाद भी दिया।
जागरूकता का उजाला कर गया ‘कुलदीपक’
तीन दिन पहले ही गांव तिनकोनिया नंबर दो से अमर उजाला फांउंडेशन ने जनजागरूकता अभियान की शुरुआत की थी। यहां के प्राथमिक विद्यालय में हुई गोष्ठी में इंसेफेलाइटिस से बचाव के उपाय बताए गए थे। बुधवार को फाउंडेशन के स्वास्थ्य शिविर के मौके पर विद्यालय की शिक्षिकाओं और छात्राओं ने इसी जानकारी का भावपूर्ण नाट्य रुपांतरण पेश करके साबित किया कि बीमारी के खिलाफ छिड़ी जंग में वह हिरावल दस्ते की सिपाही बन गई हैं। छात्राओं ने शिक्षिका शगुफ्ता नूर और तृप्ति मिश्रा द्वारा लिखित-निर्देशित नाटक ‘कुलदीपक’ के जरिए जागरूकता का उजाला फैलाया। ‘कुलदीपक’ का कथानक इस प्रकार है- घर में पोता जन्मा। दादी बधाइयां गाती हैं। बेटा, बहू और बेटी पूरे गांव का मुंह मीठा कराते हैं। तभी नवजात की तबीयत बिगड़ती है। बहू-दादी उसे बंगाली डॉक्टर (झोलाछाप) के पास ले जाती हैं। वह दवाएं देकर दो दिन बाद बुलाता है पर मासूम की ठीक नहीं होता। अब झोलाछाप बच्चे की हालत गंभीर देखकर बीआरडी मेडिकल कॉलेज ले जाने को कहता है। वहां नवजात की मौत हो जाती है। चिकित्सक बताते हैं कि लाने में देर हुई। यहीं दादी को सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी मिलती है। शोकग्रस्त दादी गांववालों को बताती हैं कि बच्चों को तेज बुखार होने पर वह 108 नंबर पर फोन करने या आशा से संपर्क करने का संदेश देती हैं। जानकार होती, सही समय पर अस्पताल ले जाती तो आज पोता मेरी गोद में खेल रहा होता-भावुक करते इस संदेश के साथ नाटक खत्म हुआ तो पूरा परिसर तालियों से गूंज उठा। अंकिता (दादी), नंदिनी (बेटा), लक्ष्मी (बहू), साईमा (बेटी), शिवांगी (डॉक्टर) और महक (झोलाछाप) ने शानदार अभिनय किया। मुस्कान, शिखा, नाजिया आदि ने गांववालों की भूमिका निभाई।
इनका रहा सहयोग
प्राथमिक-उच्च प्राथमिक विद्यालय जंगल तिनकोनिया नंबर दो में लगे स्वास्थ्य शिविर के संचालन में वहां के स्टाफ का खास योगदान रहा। शिक्षिका कमला देवी, विनय तिवारी, प्रवीन चंद्र मिश्र, सरिता राव, सुनीता सिंह, पूनम श्रीवास्तव, विनोद प्रजापति, सूरज, रामरेखा, अभिषेक और मनोरमा देवी ने व्यवस्था में विशेष योगदान दिया।
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उम्र बढ़ाई मगर हेल्दी ऐज घटी
स्वास्थ्य शिविर में मरीजों की जांच के बाद चरगांवा सीएचसी के प्रभारी डॉ. धनंजय कुशवाहा ने बताया कि चिकित्सा विज्ञान के जरिए हमने औसत उम्र तो बढ़ा ली, लेकिन बिगड़ी जीवनशैली और प्रदूषण से हेल्दी एज घट गई है। बीपी, शुगर जैसी बीमारियां जो पहले बुजुर्गों में सामने आती थीं, अब युवा भी इनसे ग्रस्त होने लगे हैं। उन्होंने ‘स्वस्थ शरीर, सुरक्षित जीवन’ के लिए स्वस्थ जीवनशैली पर जोर दिया।
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सफाई से कई बीमारियां होंगी दूर
सेवा भाव से खुद शिविर में सहयोग देने आए फीजिशयन डॉ. मनोज जायसवाल ने बताया कि अधिकतर मरीज फंगल इंफेक्शन से परेशान मिले। हम अगर सफाई को अपनाएं तो ऐसी कई बीमारियां खुद-ब-खुद दूर हो जाएंगी। जिला अस्पताल के बालरोग विशेषज्ञ डॉ. अरुण गर्ग, चरगांवा सीएचसी के डॉ. विनय कुमार सिंह और जंगल धूसड़ स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात डॉ. वीके चौधरी ने भी सफाई पर जोर देते हुए इसे इंसेफेलाइटिस पर अंकुश के लिए बेहद कारगर बताया।
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महिलाओं को मिला सेहत का मंत्र
बड़ी संख्या में महिलाओं ने शिविर में आकर इसका लाभ उठाया। घर-परिवार की व्यस्तता के बीच सेहत से समझौता करने वाली कई महिलाओं को जिला महिला अस्पताल की डॉ. सुषमा सिन्हा और चरगांवा सीएचसी की डॉ. चित्रा त्रिपाठी ने अच्छी सेहत का मंत्र बताया। न सिर्फ मर्ज का इलाज बताया बल्कि रोगों की रोकथाम के लिए संतुलित खान-पान की जानकारी भी दी। स्टाफ नर्स पूजा भी महिला मरीजों को उपयोगी जानकारियां देने में जुटी रहीं।
78 लोगों की आंखें जांचीं
जिला अस्पताल के वरिष्ठ नेत्र सर्जन डॉ. बीएन तिवारी और चरगांवा सीएचसी के ऑप्टोमेटिस्ट ऋषिकेष पासवान ने शिविर में 78 लोगों की आंखों की जांच की। चरगांवा सीएचसी की लैब टेकभनीशियन नेहा पांडेय अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से कराए जा रहे मरीजों के ब्लड टेस्ट में सहयोग दिया। चरगांवा सीएचसी के फार्मासिस्ट मनीष अग्रहरि वार्ड ब्वॉय शिवाकांत मणि के साथ अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से आई दवाएं बांटने में जुटे रहे।
पहले जगाई थी जागरूकता की अलख
अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से 17 दिसंबर को इसी विद्यालय में गोष्ठी के जरिए लोगों को सेहत के प्रति जागरूक करने कोशिश की गई थी। गांव में इंसेफेलाइटिस से हुई मौतों के मद्देनजर अमर उजाला फाउंडेशन ने अपने अभियान के लिए इस गांव को चुना था। गोष्ठी ने रविवार को जो अलख जगाई थी, उसका असर बुधवार को स्वास्थ्य शिविर में साफ दिखा।
बदले मौसम ने दिया ‘आमंत्रण’
मौसम का बदला मिजाज भी मानो लोगों को शिविर में आने का आमंत्रण दे रहा था। पिछले कई दिन से सुबह कोहरे में सहमा सूरज भी बुधवार ‘सेहतमंद’ हो उठा। दस बजे ही पूरी धूप खिल गई। पिछले दिनों की तरह न सर्द हवाएं बहीं और न ही बादलों ने सुहानी धूप रोकी। लगा जैसे शिविर पर अपनी कृपा बरसाकर सूरज भी इस पुनीत काम में भागीदार बनने में लगा है।
सेहत के सबक से गांव गदगद
सेहत के सबक से तिनकोनिया नंबर दो गांव गदगद नजर आया। गांव की ओर से ग्राम प्रधान बसपा नेता राजकुमार ने अमर उजाला फाउंडेशन का आभार जताया। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन न सिर्फ तात्कालिक लाभ देते हैं बल्कि इसके जरिए आने वाली जागरूकता दीर्घकालिक सुखद परिणाम भी देती है। उन्होंने शानदार शिविर के लिए चिकित्सकों का धन्यवाद भी दिया।
जागरूकता का उजाला कर गया ‘कुलदीपक’
तीन दिन पहले ही गांव तिनकोनिया नंबर दो से अमर उजाला फांउंडेशन ने जनजागरूकता अभियान की शुरुआत की थी। यहां के प्राथमिक विद्यालय में हुई गोष्ठी में इंसेफेलाइटिस से बचाव के उपाय बताए गए थे। बुधवार को फाउंडेशन के स्वास्थ्य शिविर के मौके पर विद्यालय की शिक्षिकाओं और छात्राओं ने इसी जानकारी का भावपूर्ण नाट्य रुपांतरण पेश करके साबित किया कि बीमारी के खिलाफ छिड़ी जंग में वह हिरावल दस्ते की सिपाही बन गई हैं। छात्राओं ने शिक्षिका शगुफ्ता नूर और तृप्ति मिश्रा द्वारा लिखित-निर्देशित नाटक ‘कुलदीपक’ के जरिए जागरूकता का उजाला फैलाया। ‘कुलदीपक’ का कथानक इस प्रकार है- घर में पोता जन्मा। दादी बधाइयां गाती हैं। बेटा, बहू और बेटी पूरे गांव का मुंह मीठा कराते हैं। तभी नवजात की तबीयत बिगड़ती है। बहू-दादी उसे बंगाली डॉक्टर (झोलाछाप) के पास ले जाती हैं। वह दवाएं देकर दो दिन बाद बुलाता है पर मासूम की ठीक नहीं होता। अब झोलाछाप बच्चे की हालत गंभीर देखकर बीआरडी मेडिकल कॉलेज ले जाने को कहता है। वहां नवजात की मौत हो जाती है। चिकित्सक बताते हैं कि लाने में देर हुई। यहीं दादी को सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी मिलती है। शोकग्रस्त दादी गांववालों को बताती हैं कि बच्चों को तेज बुखार होने पर वह 108 नंबर पर फोन करने या आशा से संपर्क करने का संदेश देती हैं। जानकार होती, सही समय पर अस्पताल ले जाती तो आज पोता मेरी गोद में खेल रहा होता-भावुक करते इस संदेश के साथ नाटक खत्म हुआ तो पूरा परिसर तालियों से गूंज उठा। अंकिता (दादी), नंदिनी (बेटा), लक्ष्मी (बहू), साईमा (बेटी), शिवांगी (डॉक्टर) और महक (झोलाछाप) ने शानदार अभिनय किया। मुस्कान, शिखा, नाजिया आदि ने गांववालों की भूमिका निभाई।
इनका रहा सहयोग
प्राथमिक-उच्च प्राथमिक विद्यालय जंगल तिनकोनिया नंबर दो में लगे स्वास्थ्य शिविर के संचालन में वहां के स्टाफ का खास योगदान रहा। शिक्षिका कमला देवी, विनय तिवारी, प्रवीन चंद्र मिश्र, सरिता राव, सुनीता सिंह, पूनम श्रीवास्तव, विनोद प्रजापति, सूरज, रामरेखा, अभिषेक और मनोरमा देवी ने व्यवस्था में विशेष योगदान दिया।