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युद्ध से बचना चाहेंगे भारत-चीन : प्रो. सिंह
Updated Sun, 27 Aug 2017 08:32 PM IST
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गोरखपुर। डीवीएन पीजी कॉलेज में महंत दिग्विजयनाथ स्मृति व्याख्यान माला के दूसरे दिन बीएचयू के प्रो. टीपी सिंह ने कहा कि चीन सामरिक तथा आर्थिक दोनों ही दृष्टियों से भारत से मजबूत है। हालांकि भारत 1962 की अपेक्षा कहीं बेहतर स्थिति में हैं, फिर भी भारत और चीन व्यापार और वाणिज्य सभी क्षेत्रों में इतने घनिष्ठ रूप से अंतर संबंधित और परस्पर निर्भर हैं कि युद्ध जैसे हालात से दोनों ही देश बचना चाहेंगे।
उन्होंनें भारत-चीन संबंध और डोकलाम विषय परकहा कि दोनों देशों के संबंध कभी भी सौहार्दपूर्ण नहीं रहे। वर्तमान में भी कुछ अंतरराष्ट्रीय समस्याओं को लेकर और दोनों देशों के संबंध और कटु हो गए हैं। चीन को मालूम है कि भारत ने उसके विरुद्ध हर मोर्चे पर सफलता पाई है। चीन की अनेक धमकियों के बाद भी भारत उसे कोई प्रतिक्रिया नहीं देता, क्योंकि भारत शांति प्रिय देश है।
व्याख्यान प्रभारी डॉ. वीणा गोपाल मिश्रा ने कहा कि डोकलाम समस्या पर दोनों ही देशों की राजनीतिक विचारधाराएं अलग-अलग हैं, मगर किसी प्रकार का संघर्ष राजनीतिक समस्या का समाधान नहीं है। इस दौरान डॉ. राजशरण शाही, डॉ. रवींद्र गंगवार, डॉ. प्रवीण सिंह, डॉ. सुनीता श्रीवास्तव, दुलारमती देवी, अजय शर्मा, अभिषेक पांडेय आदि मौजूद थे।
उन्होंनें भारत-चीन संबंध और डोकलाम विषय परकहा कि दोनों देशों के संबंध कभी भी सौहार्दपूर्ण नहीं रहे। वर्तमान में भी कुछ अंतरराष्ट्रीय समस्याओं को लेकर और दोनों देशों के संबंध और कटु हो गए हैं। चीन को मालूम है कि भारत ने उसके विरुद्ध हर मोर्चे पर सफलता पाई है। चीन की अनेक धमकियों के बाद भी भारत उसे कोई प्रतिक्रिया नहीं देता, क्योंकि भारत शांति प्रिय देश है।
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व्याख्यान प्रभारी डॉ. वीणा गोपाल मिश्रा ने कहा कि डोकलाम समस्या पर दोनों ही देशों की राजनीतिक विचारधाराएं अलग-अलग हैं, मगर किसी प्रकार का संघर्ष राजनीतिक समस्या का समाधान नहीं है। इस दौरान डॉ. राजशरण शाही, डॉ. रवींद्र गंगवार, डॉ. प्रवीण सिंह, डॉ. सुनीता श्रीवास्तव, दुलारमती देवी, अजय शर्मा, अभिषेक पांडेय आदि मौजूद थे।
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