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एक साल से छोटे बच्चों के लिए डायरिया जानलेवा
Updated Sat, 29 Jul 2017 10:47 PM IST
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गोरखपुर।
एक साल से छोटे बच्चों की मौत का सबसे बड़ा कारण डायरिया है। इस उम्र के करीब 17 से 20 फीसदी बच्चे डायरिया के शिकार होते हैं। बालरोग विशेषज्ञ डॉ. डीके सिंह ने शनिवार को विश्व ओआरएस दिवस पर बैंक रोड स्थित एक होटल में कार्यशाला के दौरान ये बातें कहीं। इस आयोजन में महानगर के कई बालरोग विशेषज्ञ शामिल हुए।
उद्घाटन पूर्व एमएलसी डॉ. वाईडी सिंह ने किया। डॉ. सिंह ने कहा कि डायरिया में बच्चों को उल्टी-दस्त होती है। इसके कारण बच्चों में कमजोरी आ जाती है। कई बार यह जानलेवा साबित होती है। ऐसे में डायरिया पीड़ित बच्चों के लिए ओआरएस रामबाण साबित होता है। इस दौरान इंडियन पीडियाट्रिक एसोसिएशन के जिला सचिव डॉ. डीके भागवानी ने बताया कि ओआरएस का घोल बनाना बेहद आसान है। नमक और चीनी की मदद से इसे घर पर भी तैयार कर सकते हैं। ओआरएस के घोल के अलावा बीमार बच्चों को दलिया, चावल का माड़, उबला आलू, केला, खीर व शिकंजी भी खिलाई जा सकती है। इसके बावजूद बच्चे की तबीयत ठीक न हो तो डॉक्टर से इलाज कराएं। कार्यशाला में डॉ. एके राठी, डॉ. आरएन सिंह, डॉ. बीबी गुप्ता, डॉ. ओएन श्रीवास्तव, डॉ. सुनील कमानी, डॉ. डीके सिंह, डॉ. अनुपम विश्वास, डॉ. एके देव कुलियार, डॉ. आरके पांडेय, डॉ. शैलेश सिंह, डॉ. एपी शाही मौजूद रहे।
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एक साल से छोटे बच्चों की मौत का सबसे बड़ा कारण डायरिया है। इस उम्र के करीब 17 से 20 फीसदी बच्चे डायरिया के शिकार होते हैं। बालरोग विशेषज्ञ डॉ. डीके सिंह ने शनिवार को विश्व ओआरएस दिवस पर बैंक रोड स्थित एक होटल में कार्यशाला के दौरान ये बातें कहीं। इस आयोजन में महानगर के कई बालरोग विशेषज्ञ शामिल हुए।
उद्घाटन पूर्व एमएलसी डॉ. वाईडी सिंह ने किया। डॉ. सिंह ने कहा कि डायरिया में बच्चों को उल्टी-दस्त होती है। इसके कारण बच्चों में कमजोरी आ जाती है। कई बार यह जानलेवा साबित होती है। ऐसे में डायरिया पीड़ित बच्चों के लिए ओआरएस रामबाण साबित होता है। इस दौरान इंडियन पीडियाट्रिक एसोसिएशन के जिला सचिव डॉ. डीके भागवानी ने बताया कि ओआरएस का घोल बनाना बेहद आसान है। नमक और चीनी की मदद से इसे घर पर भी तैयार कर सकते हैं। ओआरएस के घोल के अलावा बीमार बच्चों को दलिया, चावल का माड़, उबला आलू, केला, खीर व शिकंजी भी खिलाई जा सकती है। इसके बावजूद बच्चे की तबीयत ठीक न हो तो डॉक्टर से इलाज कराएं। कार्यशाला में डॉ. एके राठी, डॉ. आरएन सिंह, डॉ. बीबी गुप्ता, डॉ. ओएन श्रीवास्तव, डॉ. सुनील कमानी, डॉ. डीके सिंह, डॉ. अनुपम विश्वास, डॉ. एके देव कुलियार, डॉ. आरके पांडेय, डॉ. शैलेश सिंह, डॉ. एपी शाही मौजूद रहे।
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