{"_id":"597b7dda4f1c1ba1438b46aa","slug":"131501265370-gorakhpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मनबढ़ों ने एडीओ कृषि को बंधक बनाया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मनबढ़ों ने एडीओ कृषि को बंधक बनाया
Updated Fri, 28 Jul 2017 11:39 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हैंसर (संतकबीरनगर)। डीएम के आदेश पर शुक्रवार को सिरसी में कोटेदार के चयन की जांच करने पहुंची एडीओ कृषि को मनबढ़ों ने बंधक बना लिया। वहीं एडीओ के अपहरण की सूचना पर प्रशासन सकते में आ गया। प्रशासन के चौकस होते ही अपहर्ता एडीओ कृषि को महुली क्षेत्र के कोदवट गांव के पास छोड़ गए। इस मामले में कोटे के उम्मीदवार बृजेश राय समेत सात लोगों पर बलवा, बंधक बनाने, मारने-पीटने, सरकारी कार्य में बांधा पहुंचाने आदि का केस दर्ज किया गया है। वहीं अपहर्ताओं की गाड़ी लावारिस हालात में पुलिस को महुली के रेवटा गांव के पास खड़ी मिली।
22 जुलाई को सिरसी गांव में कोटेदार के चयन के लिए खुली बैठक हुई थी। कपिश राय और बृजेश राय कोटेदारी के लिए दावेदार थे। इसमें कपिश के कोटेदार चुने जाने की जानकारी एडीओ पंचायत ने दी थी। इस पर आपत्ति जताते हुए बृजेश राय डीएम के पास पहुंचे और चयन में धांधली का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की। डीएम के आदेश पर बीडीओ सौरभ कुमार पांडेय ने एडीओ कृषि श्रवण कुमार पांडेय और एडीओ एमआई शेषनाथ राय को जांच अधिकारी नियुक्त करके सिरसी गांव में जाकर जांच करने का आदेश दिया था। उसी क्रम में गुरुवार को दोनो अधिकारी सिससी पहुंचे और बृजेश राय के पक्ष की जांच पूरी करके बाद में दूसरे पक्ष की जांच अगले दिन किए जाने की बात कह कर लौट गए।
एडीओ एमआई शेषनाथ राय ने बताया कि शुक्रवार को कपिश राय के पक्ष के कार्ड धारकों की जांच घर घर जाकर की जा रही थी। 36 कार्ड धारकों का बयान लिया गया था। तभी बृजेश राय और उनके समर्थक पहुंचे और जांच से मना करने लगे और मारपीट पर आमादा हो गए। इस दौरान वे तो जान बचाकर भाग निकले, लेकिन एडीओ कृषि श्रवण कुमार पांडेय को लोगों ने लग्जरी गाड़ी में जबरन बैठा लिया।
विज्ञापन
वहीं श्रवण कुमार पांडेय का आरोप है कि बृजेश राय और उनके समर्थक अपने पक्ष में रिपोर्ट लिखने के लिए दबाव बनाने लगे, इंकार करने पर मारपीट की गई। आरोप है कि वे लोग उन्हें डीएम के यहां ले गए, न मिलने पर तो एडीएम के पास ले गए। एडीएम सख्त हुए तो आरोपी भाग निकले। आरोपी एडीओ कृषि को अपने साथ सुबह दस बजे से दोपहर एक बजे तक लेकर इधर- उधर घूमते रहे। बीडीओ द्वारा अपहरण की सूचना पर पुलिस सक्रिय हुई तो आरोपी एडीओ एजी छोड़कर भाग निकले। एसओ प्रदीप सिंह ने बताया कि इस मामले में आरोपी बृजेश राय समेत सात लोगों पर केस दर्ज कर लिया गया है।
प्रशासनिक चूक का नतीजा है बंधक बनाना
हैंसर। सिरसी गांव शुरू से ही अति संवेदनशील है। पूर्व में कोई चुनाव हो या जांच यहां भारी संख्या में फोर्स मौजूद रहती थी। जिससे दो गुटों में विभाजित गांव के लोग शांत रहने के लिए विवश रहते थे। 22 जुलाई को जब कोटे के चयन के लिए बैठक हुई तब भी एसओ समेत भारी संख्या पुलिस के जवान मुस्तैद रहे। जिससे नोकझोंक होने के सिवाय कोई बड़ा विवाद नहीं हो सका, लेकिन जब जांच के लिए दुबारा जाना हुआ तो विकास विभाग के अफसरों ने साथ में पुलिस को लेना मुनासिब नहीं समझा। जिसका नतीजा निकला कि जांच अधिकारी की जान ही खतरे में पड गई। बीडीओ सौरभ पांडेय ने बताया कि ऐसा बवाल होने की कोई संभावना नही दिख रही थी इस कारण पुलिस की मांग नही की गई। जबकि दूसरी तरफ एसओ प्रदीप सिंह ने बताया कि अगर पुलिस की मांग बीडीओ की ओर से की गई होती तो वहां पुलिस जरूर रही होती और इस तरह की घटना नही होने पाती।
विज्ञापन
22 जुलाई को सिरसी गांव में कोटेदार के चयन के लिए खुली बैठक हुई थी। कपिश राय और बृजेश राय कोटेदारी के लिए दावेदार थे। इसमें कपिश के कोटेदार चुने जाने की जानकारी एडीओ पंचायत ने दी थी। इस पर आपत्ति जताते हुए बृजेश राय डीएम के पास पहुंचे और चयन में धांधली का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की। डीएम के आदेश पर बीडीओ सौरभ कुमार पांडेय ने एडीओ कृषि श्रवण कुमार पांडेय और एडीओ एमआई शेषनाथ राय को जांच अधिकारी नियुक्त करके सिरसी गांव में जाकर जांच करने का आदेश दिया था। उसी क्रम में गुरुवार को दोनो अधिकारी सिससी पहुंचे और बृजेश राय के पक्ष की जांच पूरी करके बाद में दूसरे पक्ष की जांच अगले दिन किए जाने की बात कह कर लौट गए।
विज्ञापन
एडीओ एमआई शेषनाथ राय ने बताया कि शुक्रवार को कपिश राय के पक्ष के कार्ड धारकों की जांच घर घर जाकर की जा रही थी। 36 कार्ड धारकों का बयान लिया गया था। तभी बृजेश राय और उनके समर्थक पहुंचे और जांच से मना करने लगे और मारपीट पर आमादा हो गए। इस दौरान वे तो जान बचाकर भाग निकले, लेकिन एडीओ कृषि श्रवण कुमार पांडेय को लोगों ने लग्जरी गाड़ी में जबरन बैठा लिया।
विज्ञापन
वहीं श्रवण कुमार पांडेय का आरोप है कि बृजेश राय और उनके समर्थक अपने पक्ष में रिपोर्ट लिखने के लिए दबाव बनाने लगे, इंकार करने पर मारपीट की गई। आरोप है कि वे लोग उन्हें डीएम के यहां ले गए, न मिलने पर तो एडीएम के पास ले गए। एडीएम सख्त हुए तो आरोपी भाग निकले। आरोपी एडीओ कृषि को अपने साथ सुबह दस बजे से दोपहर एक बजे तक लेकर इधर- उधर घूमते रहे। बीडीओ द्वारा अपहरण की सूचना पर पुलिस सक्रिय हुई तो आरोपी एडीओ एजी छोड़कर भाग निकले। एसओ प्रदीप सिंह ने बताया कि इस मामले में आरोपी बृजेश राय समेत सात लोगों पर केस दर्ज कर लिया गया है।
प्रशासनिक चूक का नतीजा है बंधक बनाना
हैंसर। सिरसी गांव शुरू से ही अति संवेदनशील है। पूर्व में कोई चुनाव हो या जांच यहां भारी संख्या में फोर्स मौजूद रहती थी। जिससे दो गुटों में विभाजित गांव के लोग शांत रहने के लिए विवश रहते थे। 22 जुलाई को जब कोटे के चयन के लिए बैठक हुई तब भी एसओ समेत भारी संख्या पुलिस के जवान मुस्तैद रहे। जिससे नोकझोंक होने के सिवाय कोई बड़ा विवाद नहीं हो सका, लेकिन जब जांच के लिए दुबारा जाना हुआ तो विकास विभाग के अफसरों ने साथ में पुलिस को लेना मुनासिब नहीं समझा। जिसका नतीजा निकला कि जांच अधिकारी की जान ही खतरे में पड गई। बीडीओ सौरभ पांडेय ने बताया कि ऐसा बवाल होने की कोई संभावना नही दिख रही थी इस कारण पुलिस की मांग नही की गई। जबकि दूसरी तरफ एसओ प्रदीप सिंह ने बताया कि अगर पुलिस की मांग बीडीओ की ओर से की गई होती तो वहां पुलिस जरूर रही होती और इस तरह की घटना नही होने पाती।