फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   जीरो बजट की खेती से होगा किसानों का जीवन खुशहाल : आचार्य देवव्रत

जीरो बजट की खेती से होगा किसानों का जीवन खुशहाल : आचार्य देवव्रत

Wed, 26 Sep 2018 11:46 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर। Updated Wed, 26 Sep 2018 11:46 PM IST
विज्ञापन
जीरो बजट की खेती से होगा किसानों का जीवन खुशहाल : आचार्य देवव्रत
आचार्य देवव्रत - फोटो : amar ujala
गोरखपुर। गोरक्षनाथ मंदिर में चल रहे श्रद्धांजलि समारोह में पहुंचे हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने भारतीय संस्कृति में गोवंश की उपयोगिता पर विस्तार से प्रकाश डाला। कृषि वैज्ञानिकों के शोध के हवाले से कहा कि एक गाय के गोबर और मूत्र से 32 एकड़ खेती बहुत ही बेहतर ढंग से की जा सकती है। इसे जीरो बजट खेती कहा जाता है। उन्होंने भारतीय नस्ल की गायों के दूध को अमृत के समान बताते हुए कहा कि किसानों की खुशहाली के लिए गो पालन आवश्यक है।
विज्ञापन

राज्यपाल ने जीरो बजट की खेती पर विस्तार से प्रकाश डाला। कहा, वह खुद जैविक खेती कर चुके हैं। इसमें एक एकड़ खेती के लिए कम से कम 14 से 15 गायों के गोबर और मूत्र की आवश्यकता होती है। वहीं, जीरो बजट खेती में एक गाय से 32 एकड़ खेती की जा सकती है। पूना के एक वैज्ञानिक सुभाष पालेकर ने इसकी खोज की है। देशी गाय के एक ग्राम गोबर में 300 करोड़ जीवाणु होते हैं। जबकि दूध न देने वाली गाय से 500 करोड़ जीवाणु पैदा होते हैं। जो जमीन की उर्वरा शक्ति को बढ़ाते हैं। इस लिए उनका गोबर बहुत उपयोगी है। कार्यक्रम में गीता प्रेस के पूर्व प्रबंधक प्रहलाद ब्रहमचारी, वरूण वैरागी, प्रो. यूपी सिंह, महंत सुरेश दास, डॉ. कमलदास वेदांती आदि लोगों ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
विज्ञापन

कैसे तैयार करें खाद

राज्यपाल ने बताया कि एक गाय से कैसे 32 एकड़ खेत के लिए खाद तैयार हो सकती है। इसके लिए सबसे पहले किसान को दो सौ लीटर का एक प्लास्टिक का ड्रम खरीदना होगा। उसमें 180 लीटर पानी भर ले। गाय का एक दिन का मूत्र और एक दिन गोबर ड्रम में डाल दे। इसके अलावा दो किलो गुड़, दो किलो बेसन उसमें डाल कर लकड़ी से हिला दे। ढक्कन को जूट की बोरी से ढक दे। चार दिन बाद खेत में उसका छिड़काव कर दे। इसके बाद खेत में किसी रसायनिक खाद को डालने की जरूरत नहीं होगी और उत्पादन रासायनिक खाद के इस्तेमाल के मुकाबले बेहतर होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

बाजार में मिलती है उपज की अच्छी कीमत

राज्यपाल ने कहा कि वह जो बता रहे हैं उसका प्रयोग करते हैं। उनके खेतों में पैदा होने वाला गेहूं चार हजार रुपये क्विंटल बिकता है। उसके लिए पहले लोग एडवांस में उनके खाते में रुपये भेज देते हैं। उसमें किसी प्रकार का रसायनिक तत्व नहीं होता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed