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तेजी से बढ़ रहे जानलेवा सीओपीडी के मरीज

Thu, 16 Nov 2017 12:59 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Updated Thu, 16 Nov 2017 12:59 AM IST
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सीओपीडी
फेफड़ा - फोटो : Amar Ujala
सीओपीडी फेफड़े की बीमारी है। इसमें सांस की नलियों में सूजन व सिकुड़न आ जाती है, जिससे सांस लेने में दिक्कत आती है और ऑक्सीजन, कार्बन डाईऑक्साइड का रक्त से आदान-प्रदान अवरुद्ध होने लगता है।
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बीआरडी मेडिकल कॉलेज के टीबी एवं चेस्ट विभाग के अध्यक्ष डॉ. अश्विनी कुमार मिश्र ने बताया कि दुनिया में 39 करोड़ लोग सीओपीडी से ग्रसित हैं। यह आंकड़ा 2011 में 21 करोड़ था। हर साल लगभग 30 लाख से ज्यादा मौतें इसके कारण होती हैं। यह विश्व में होने वाले सभी रोगों के कारण हुई मृत्यु का 5.8 प्रतिशत है। माना जाता है कि 90 प्रतिशत सीओपीडी के कारण मौतें निचले एवं मध्यम आय वाली देशों में होती हैं। 2002 में सीओपीडी मृत्यु का पांचवां सबसे बड़ा कारण था। अगर इस पर अंकुश लगाने के लिए गंभीरता से प्रयास नहीं हुए तो अगले 10 वर्षों में इससे होने वाली मौतों में 30 फीसदी इजाफे की आशंका है। भारत में ऐसे मरीजों की संख्या तीन करोड़ है, जो 10 वर्षों में 25 प्रतिशत तक बढ़ी है। डॉ. अश्विनी के अनुसार इसका इलाज कठिन एवं जटिल है लेकिन किसी विशेषज्ञ डॉक्टर के परामर्श से बीमारी नियंत्रित की जा सकती है।
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नॉन स्मोकर्स भी आ रहे गिरफ्त में
डॉ. सूरज जायसवाल बताते हैं कि धूम्रपान करने वाले व्यक्तियों में पाया जाने वाला ये रोग अब कई नॉन स्मोकर्स में भी दिखने लगा है। वायु प्रदूषण और स्मॉग इसका अहम कारण है। घर पर मच्छर से बचने के लिए हम क्वॉयल का इस्तेमाल करते हैं। इसमें 100 सिगरेट के बराबर धुआं और 50 सिगरेट के जितना फार्मेल्डिहाइड निकलता है।
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योग भी बचाव में कारगर
योग चिकित्सक डॉ. संतोष कुमार ने बताया कि कपालभाति, भुजंग आसन, नौकासन, शलभ आसन, शशांक आसन आदि से फेफड़ों की सेहत सुधारने में काफी मदद मिलती है। ये आसन सीओपीडी मरीजों के लिए काफी उपयोगी हैं।


प्रदूषण रोकें, रोजाना टहलें मरीज
एमडी चेस्ट डॉ. नदीम अरशद कहते हैं कि प्रदूषण पर काबू पाना सीओपीडी के प्रसार को रोकने के लिए बेहद जरूरी है। सीओपीडी मरीज रोजाना तीन से छह किलोमीटर टहलें तो रोग को बढ़ने से रोका जा सकता है।

लक्षण
- सूखी या बलगम के साथ होने वाली खांसी
- गले में घरघराहट
- सांस लेने में तकलीफ जो काम करने के साथ और भी बढ़ती जाती है
- छाती में जकड़न या खिंचाव महसूस होना


कारण
- धूम्रपान अथवा अपरोक्ष धूम्रपान
- प्रदूषित वातावरण में काम करना
- आनुवांशिक
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