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सील टैंकर के पेट्रोल में मिलावट की पुष्टि
Updated Tue, 26 Sep 2017 02:07 AM IST
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गोरखपुर। दस दिन पहले दुर्गाबाड़ी स्थित इंडियन आयल कारपोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) के लिब्रो फ्यूल्स पेट्रोल पंप के दो टैंकर से लिए गए पेट्रोल के नमूने जांच में फेल हो गए हैं। सोमवार को आईओसी के लखनऊ और मुगलसराय लैब से आई रिपोर्ट के मुताबिक पेट्रोल के दोनों नमूनों में मिलावट की पुष्टि हुई है। हालांकि आईओसी के अफसर अभी इस मामले में चुप्पी साधे हुए हैं।
यह पहला मौका नहीं है जब बैतालपुर डिपो से सप्लाई किए जाने वाले पेट्रोल की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठे हैं। इससे पहले भी हुई जांच में कई बार गड़बड़ी पकड़ी जा चुकी है। मिलावट और घटतौली के मामले में कुछ अफसरों पर कार्रवाई भी हो चुकी है। 2012 में गौरी बाजार थाने में तत्कालीन डिपो प्रबंधक रामू राव के खिलाफ देवरिया के आपूर्ति विभाग की तरफ से मुकदमा दर्ज कराया गया था। अब देखना यह है कि इस मामले में आईओसी के अफसर कितनी सख्ती बरतते हैं।
लिब्रो फ्यूल्स पेट्रोल पंप प्रबंधन ने 15 सितंबर को आईओसी के अफसरों से शिकायत की थी कि डिपो से आए टैंकर के पेट्रोल का घनत्व मानक के अनुसार नहीं है। इसपर आईओसी के सेल्स मैनेजर के नेतृत्व में डिपो के अफसरों की भी प्रारंभिक जांच में गड़बड़ी पकड़ में आई थी, जिसपर दोनों टैंकर सील करते हुए नमूने जांच के लिए लखनऊ और मुगलसराय स्थित आईओसी के लैब भेजे गए थे।
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एक-दूसरे के सिर जिम्मेदारी मढ़ रहे अफसर
गोरखपुर। दोनों टैंकर के नमूने फेल होने के मामले में अब आईओसी के अफसर एक-दूसरे पर जिम्मेदारी मढ़ रहे हैं। ’अमर उजाला’ से हुई बातचीत में एरिया सेल्स मैनेजर चंद्रशेखर का कहना है कि उन्हें रिपोर्ट के बारे में कोई जानकारी नहीं है। अगर जांच में मिलावट की पुष्टि हुई है तो बैतालपुर डिपो के अफसर ही इसमें कोई कार्रवाई कर सकते हैं। वहीं डिपो के प्रबंधक अखिलेश मंडल का कहना है कि जांच रिपोर्ट तो आ गई है मगर गड़बड़ी पर कार्रवाई एरिया सेल्स मैनेजर चंद्रशेखर ही करेंगे।
पहले के नमूने भी जांच में फेल
गोरखपुर। पेट्रोल के टैंकर सील करने के पहले भी लिब्रो फ्यूल्स पेट्रोल पंप पर मिलावटी तेल के मुद्दे पर हंगामा हुआ था। करीब एक महीने पहले हुए इस हंगामे के दौरान भी तेल के नमूने लिए गए थे। उसकी भी जांच रिपोर्ट आ गई है और मिलावट की पुष्टि हुई है। सेल्स मैनेजर चंद्रशेखर ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि इस मामले में टैंकर पर पाबंदी लगाते हुए पेट्रोल पंप मालिक को भी चेतावनी जारी की गई है कि यह आखिरी मौका है अगर इसके बाद कोई गड़बड़ी हुई तो उनपर सख्त कार्रवाई होगी। उन्होंने बताया कि पेट्रोल पंप प्रबंधन की भी जिम्मेदारी होती है कि वे जांच के बाद ही अपने पंप से तेल वितरित करेगा।
यह पहला मौका नहीं है जब बैतालपुर डिपो से सप्लाई किए जाने वाले पेट्रोल की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठे हैं। इससे पहले भी हुई जांच में कई बार गड़बड़ी पकड़ी जा चुकी है। मिलावट और घटतौली के मामले में कुछ अफसरों पर कार्रवाई भी हो चुकी है। 2012 में गौरी बाजार थाने में तत्कालीन डिपो प्रबंधक रामू राव के खिलाफ देवरिया के आपूर्ति विभाग की तरफ से मुकदमा दर्ज कराया गया था। अब देखना यह है कि इस मामले में आईओसी के अफसर कितनी सख्ती बरतते हैं।
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लिब्रो फ्यूल्स पेट्रोल पंप प्रबंधन ने 15 सितंबर को आईओसी के अफसरों से शिकायत की थी कि डिपो से आए टैंकर के पेट्रोल का घनत्व मानक के अनुसार नहीं है। इसपर आईओसी के सेल्स मैनेजर के नेतृत्व में डिपो के अफसरों की भी प्रारंभिक जांच में गड़बड़ी पकड़ में आई थी, जिसपर दोनों टैंकर सील करते हुए नमूने जांच के लिए लखनऊ और मुगलसराय स्थित आईओसी के लैब भेजे गए थे।
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एक-दूसरे के सिर जिम्मेदारी मढ़ रहे अफसर
गोरखपुर। दोनों टैंकर के नमूने फेल होने के मामले में अब आईओसी के अफसर एक-दूसरे पर जिम्मेदारी मढ़ रहे हैं। ’अमर उजाला’ से हुई बातचीत में एरिया सेल्स मैनेजर चंद्रशेखर का कहना है कि उन्हें रिपोर्ट के बारे में कोई जानकारी नहीं है। अगर जांच में मिलावट की पुष्टि हुई है तो बैतालपुर डिपो के अफसर ही इसमें कोई कार्रवाई कर सकते हैं। वहीं डिपो के प्रबंधक अखिलेश मंडल का कहना है कि जांच रिपोर्ट तो आ गई है मगर गड़बड़ी पर कार्रवाई एरिया सेल्स मैनेजर चंद्रशेखर ही करेंगे।
पहले के नमूने भी जांच में फेल
गोरखपुर। पेट्रोल के टैंकर सील करने के पहले भी लिब्रो फ्यूल्स पेट्रोल पंप पर मिलावटी तेल के मुद्दे पर हंगामा हुआ था। करीब एक महीने पहले हुए इस हंगामे के दौरान भी तेल के नमूने लिए गए थे। उसकी भी जांच रिपोर्ट आ गई है और मिलावट की पुष्टि हुई है। सेल्स मैनेजर चंद्रशेखर ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि इस मामले में टैंकर पर पाबंदी लगाते हुए पेट्रोल पंप मालिक को भी चेतावनी जारी की गई है कि यह आखिरी मौका है अगर इसके बाद कोई गड़बड़ी हुई तो उनपर सख्त कार्रवाई होगी। उन्होंने बताया कि पेट्रोल पंप प्रबंधन की भी जिम्मेदारी होती है कि वे जांच के बाद ही अपने पंप से तेल वितरित करेगा।