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नहीं भरे रैट होल, रेन कट से बांधों को खतरा
Updated Thu, 15 Jun 2017 10:27 PM IST
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बांसी (ब्यूरो)। मानसून कभी भी आ सकता है। बावजूद बांधों की मरम्मत व सुरक्षा को लेकर जिम्मेदार गंभीर नहीं है। नदियों और बांधों के जर्जर तटबंध नेपाल के पहाड़ों से आने वाले पानी के दबाव को रोकने में सक्षम नहीं हैं। तटबंधों में जगह-जगह रेन कट व रैट होल हैं। जर्जर बांधों के कारण गत वर्ष की तरह इस बार भी बाढ़ की भयावहता की कल्पना कर लोग सहमे हुए हैं।
बंधों की देख-रेख के प्रति उदासीनता का ही असर था कि बीते वर्ष बरसात शुरू होते ही जुलाई माह में बूढ़ी राप्ती में पानी का दबाव बढ़ने पर खैरहवा गांव के पास असोगवा-नगवा बांध टूट गया था। देखते ही देखते तीन दर्जन से अधिक गांव की हजारों एकड़ फसल जलमग्न हो गई और आधा दर्जन गांव मैरुंड हो गए। बांसी तहसील क्षेत्र में राप्ती, बूढ़ी राप्ती नदी और फजिहतवा नाला बहते हैं। राप्ती नदी पर बांसी-पंघटिया, नरकटहा-सोनखर, सोनखर-हाटा, बांसी-डुमरियागंज, डुमरियागंज बांसी, नरकटहा प्रोटेक्शन बांध, बांसी जमीदारी बांध, असोगवा-नगवा ,ककरही गोनहा, तनेजवा आदि बांध है। इन पर रख-रखाव के नाम पर कई वर्षों से कार्य न के बराबर हुआ है। ऐसे में बांध के किनारे बसे ग्रामीण सहमे हुए हैं। ग्रामीण दिलीप तिवारी, मोहनलाल, राजकुमार, मुरारी, रमजान, संतोष, राजाराम आदि का कहना है कि अगर औसत वर्षा भी हुई या नेपाल का पानी अचानक तेजी से आया तो यह तटबंध पानी का दबाव झेल नहीं पाएंगे। इसका खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ेगा। इस संबंध में सिंचाई निर्माण खंड के एक्सईएन आरके सिंह का कहना था कि बांधों के रेन कट को भरने व झाड़-झंखाड़ हटाने का कार्य शुरू कर दिया गया है। बांसी क्षेत्र के बांधों की बदहाली की तस्वीर होने का जिक्र किया गया तो बताया कि दोपहर में काम नहीं होता। मरम्मत का काम चल रहा है।
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बंधों की देख-रेख के प्रति उदासीनता का ही असर था कि बीते वर्ष बरसात शुरू होते ही जुलाई माह में बूढ़ी राप्ती में पानी का दबाव बढ़ने पर खैरहवा गांव के पास असोगवा-नगवा बांध टूट गया था। देखते ही देखते तीन दर्जन से अधिक गांव की हजारों एकड़ फसल जलमग्न हो गई और आधा दर्जन गांव मैरुंड हो गए। बांसी तहसील क्षेत्र में राप्ती, बूढ़ी राप्ती नदी और फजिहतवा नाला बहते हैं। राप्ती नदी पर बांसी-पंघटिया, नरकटहा-सोनखर, सोनखर-हाटा, बांसी-डुमरियागंज, डुमरियागंज बांसी, नरकटहा प्रोटेक्शन बांध, बांसी जमीदारी बांध, असोगवा-नगवा ,ककरही गोनहा, तनेजवा आदि बांध है। इन पर रख-रखाव के नाम पर कई वर्षों से कार्य न के बराबर हुआ है। ऐसे में बांध के किनारे बसे ग्रामीण सहमे हुए हैं। ग्रामीण दिलीप तिवारी, मोहनलाल, राजकुमार, मुरारी, रमजान, संतोष, राजाराम आदि का कहना है कि अगर औसत वर्षा भी हुई या नेपाल का पानी अचानक तेजी से आया तो यह तटबंध पानी का दबाव झेल नहीं पाएंगे। इसका खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ेगा। इस संबंध में सिंचाई निर्माण खंड के एक्सईएन आरके सिंह का कहना था कि बांधों के रेन कट को भरने व झाड़-झंखाड़ हटाने का कार्य शुरू कर दिया गया है। बांसी क्षेत्र के बांधों की बदहाली की तस्वीर होने का जिक्र किया गया तो बताया कि दोपहर में काम नहीं होता। मरम्मत का काम चल रहा है।
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