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9 महीने में 1161 मासूमों ने तोड़ा दम
शिवम सिंह, अमर उजाला, गोरखपुर।
Updated Sat, 08 Oct 2016 07:51 PM IST
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एनआईसीयू
- फोटो : file photo
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यूं तो अस्पताल में जिंदगी और मौत दोनों ही सामान्य सी बात है। लेकिन मेडिकल कॉलेज के एनआईसीयू (न्यूनेटल इनसेंटिव केयर यूनिट) में होने वाली मौतें अब व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर रही हैं। यहां नौ महीने (जनवरी से सितंबर) में 1161 मासूमों की मौत हुई है। मरने वाले बच्चे सिर्फ इंसेफेलाइटिस के ही नहीं है, बल्कि पीलिया, निमोनिया जैसे रोगों के भी हैं। हालांकि डॉक्टर इस बारे में खुलकर तो कुछ नहीं बोल रहे, मगर दबी जुबान सभी यह मानते हैं कि इसकी मुख्य वजह संक्रमण हो सकती है। चूंकि एक ट्रेडल पर एक से अधिक मरीज रखे जाते हैं, जो सीधे तौर पर संक्रमण को बढ़ावा देते है।
मेडिकल कॉलेज में 40 जार का एनआईसीयू है। अस्पताल में आने वाले मरीजों के हिसाब से यह संख्या बेहद कम पड़ जाती है और एक जार में ही दो से तीन और कभी कभी चार बच्चों को रखा जाता है। डॉक्टर एक ओर बच्चे को ठीक करने के लिए दवाएं देते है तो दूसरी ओर संक्रमण के खतरे से चाहकर भी नहीं बचा पाते हैं। नौ महीने में 1161 मौतों की यही वजह बताई जा रही है। वहीं 194 बच्चों के घर वाले इन इंतजामों से या तो नाखुश होकर चले गए या फिर रेफर कर दिया गया। शासन की ओर से स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने के लिए तमाम कोशिशें भी की जा रही हैं मगर आईसीयू में बेडों की कमी से इन कोशिशों पर पानी फिर जा रहा है। दवाएं, डॉक्टर सब कुछ होने के बावजूद ये अव्यवस्थाएं मासूमों की जिंदगी पर भारी पड़ रही हैं।
एक वरिष्ठ चिकित्सक बताते हैं कि बहुत से ऐसे बच्चे होते हैं, जिनकी प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। वह कुपोषित होते हैं और हम जानते भी हैं कि ऐसे बच्चों में संक्रमण का खतरा है, मगर कर कुछ नहीं सकते हैं। कई बार एक जगह से दूसरे जगह हटाकर उनकी जान बचा भी ली जाती है, मगर अक्सर हम लोग हार जाते हैं। नियम तो यही है कि एक जार पर एक ही बच्चे को रखा जाए ताकि संक्रमण को रोका जा सके।
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सदर सांसद ने भी उठाया था मुद्दा
इस गंभीर मसले को सांसद आदित्यनाथ ने भी उठाया। उन्होंने कुछ दिन पहले सुपर स्पेशियलिटी का शिलान्यास करने आए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के सामने बड़ी मजबूती से इस समस्या को रखा था। एक ट्रेडल पर कई मरीजों को रखने और संक्रमण के खतरे को उठाते हुए उन्होंने इसके दायरे को बढ़ाने की मांग भी की है। इस पर केंद्रीय मंत्री ने भी अपनी हामी भरी है।
भेजा जा चुका है प्रपोजल
मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने एनआईसीयू का दायरा बढ़ाने के लिए प्रपोजल तैयार कर शासन को कई बार भेज चुका है। अभी छह महीने पहले ही प्राचार्य ने प्रपोजल भेजा, मगर मंजूरी नहीं मिल सकी। प्राचार्य ने दौरे पर आए प्रमुख सचिव स्वास्थ्य से यह समस्या साझा की थी।
इन महीनों में हुई इतनी मौतें
महीना मौत
जनवरी 40
फरवरी 80
मार्च 126
अप्रैल 102
मइ 110
जून 135
जुलाई 171
अगस्त 216
सितंबर 181
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मेडिकल कॉलेज में 40 जार का एनआईसीयू है। अस्पताल में आने वाले मरीजों के हिसाब से यह संख्या बेहद कम पड़ जाती है और एक जार में ही दो से तीन और कभी कभी चार बच्चों को रखा जाता है। डॉक्टर एक ओर बच्चे को ठीक करने के लिए दवाएं देते है तो दूसरी ओर संक्रमण के खतरे से चाहकर भी नहीं बचा पाते हैं। नौ महीने में 1161 मौतों की यही वजह बताई जा रही है। वहीं 194 बच्चों के घर वाले इन इंतजामों से या तो नाखुश होकर चले गए या फिर रेफर कर दिया गया। शासन की ओर से स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने के लिए तमाम कोशिशें भी की जा रही हैं मगर आईसीयू में बेडों की कमी से इन कोशिशों पर पानी फिर जा रहा है। दवाएं, डॉक्टर सब कुछ होने के बावजूद ये अव्यवस्थाएं मासूमों की जिंदगी पर भारी पड़ रही हैं।
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एक वरिष्ठ चिकित्सक बताते हैं कि बहुत से ऐसे बच्चे होते हैं, जिनकी प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। वह कुपोषित होते हैं और हम जानते भी हैं कि ऐसे बच्चों में संक्रमण का खतरा है, मगर कर कुछ नहीं सकते हैं। कई बार एक जगह से दूसरे जगह हटाकर उनकी जान बचा भी ली जाती है, मगर अक्सर हम लोग हार जाते हैं। नियम तो यही है कि एक जार पर एक ही बच्चे को रखा जाए ताकि संक्रमण को रोका जा सके।
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सदर सांसद ने भी उठाया था मुद्दा
इस गंभीर मसले को सांसद आदित्यनाथ ने भी उठाया। उन्होंने कुछ दिन पहले सुपर स्पेशियलिटी का शिलान्यास करने आए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के सामने बड़ी मजबूती से इस समस्या को रखा था। एक ट्रेडल पर कई मरीजों को रखने और संक्रमण के खतरे को उठाते हुए उन्होंने इसके दायरे को बढ़ाने की मांग भी की है। इस पर केंद्रीय मंत्री ने भी अपनी हामी भरी है।
भेजा जा चुका है प्रपोजल
मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने एनआईसीयू का दायरा बढ़ाने के लिए प्रपोजल तैयार कर शासन को कई बार भेज चुका है। अभी छह महीने पहले ही प्राचार्य ने प्रपोजल भेजा, मगर मंजूरी नहीं मिल सकी। प्राचार्य ने दौरे पर आए प्रमुख सचिव स्वास्थ्य से यह समस्या साझा की थी।
इन महीनों में हुई इतनी मौतें
महीना मौत
जनवरी 40
फरवरी 80
मार्च 126
अप्रैल 102
मइ 110
जून 135
जुलाई 171
अगस्त 216
सितंबर 181