फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   पांच चिरागों की जिंदगी का अंधेरा दूर

पांच चिरागों की जिंदगी का अंधेरा दूर

Tue, 20 Nov 2018 01:55 AM IST
अमर उजाला/गाोरख्ापुर
अमर उजाला/गाोरख्ापुर Updated Tue, 20 Nov 2018 01:55 AM IST
विज्ञापन
पांच चिरागों की जिंदगी का अंधेरा दूर
ज्वाइंट मजिस्ट्रेट आकांक्षा राणा की पहल पर सोमवार को बच्चाों का निजी स्कूल में दाखिला हुआ। - फोटो : amar ujala

विज्ञापन
गोरखपुर। थोड़ी अटपटी भले लगे पर बात सही है। सवाल हैसियत का नहीं, सभी बच्चे अपने घरों का चिराग होते हैं। यूं तो चिराग का काम रोशनी बिखेरना होता है लेकिन हम जिन पांच बच्चों के बारे में बताने जा रहे हैं उनकी जिंदगी में अशिक्षा का घोर अंधेरा छाया हुआ था। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट आकांक्षा राणा की पहल पर सोमवार को उनका निजी स्कूल में दाखिला हुआ। अब उनके जीवन में भी शिक्षा का उजाला आ चुका है।

ज्वाइंट मजिस्ट्रेट आकांक्षा राणा पीडब्लूडी गेस्ट हाउस और सिविल लाइंस इलाके से आते-जाते वहां स्कूल जाने की उम्र के पांच बच्चों को देखा करती थीं। अंतत: उन्होंने उन्हें स्कूल पहुंचाने का फैसला किया। उन्होंने इसके लिए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) से संपर्क किया। बीएसए को तुरंत ऐसी ही भावना से यही काम कर रहे अपने विभाग के शिक्षकों के समूह संकल्प की याद आई। उन्होंने संकल्प समूह की सदस्य और शिक्षिका सुषमा त्रिपाठी और दीप्ति मिश्रा को विवरण पता करने और सहयोग के लिए आकांक्षा राणा के पास भेजा। सोमवार को ये शिक्षिकाएं पता लगाते मजिस्ट्रेट आकांक्षा के साथ उन बच्चों के घरों तक जा पहुंचीं।
विज्ञापन

तब पता चला इनके नाम समीर, खुश्बू, आफताब, रुखसार और शहाना हैं।

सुषमा त्रिपाठी ने बताया कि इन गरीब परिवारों की दयनीय दशा देखकर वे सभी द्रवित हो गईं। बेहद गरीब ये परिवार जीवन के लिए जरूरी सुविधाओं तक से वंचित मिले। इन बच्चों के घर से पुलिस लाइंस अथवा दाउदपुर के प्राथमिक विद्यालय दूर पड़ रहे थे तो आकांक्षा राणा से मश्विरे के बाद इनका दाखिला इंदिरा बाल विहार के सामने महिला समिति द्वारा संचालित गैर सरकारी ज्ञान ज्योति विद्यालय में इनका दाखिला कराया गया। इनके फीस-यूनिफार्म, पुस्तकों आदि की व्यवस्था कराई।
विज्ञापन
विज्ञापन

स्कूल के दूसरे वंचितों का भी हुआ भला

आकांक्षा राणा को जब पता चला कि इस स्कूल में कई अन्य गरीब परिवारों के बच्चे भी पढ़ने आते हैं। उन्होंने संबंधित विभागों को सूचित किया कि वे इनके अभिभावकों से संपर्क करें। यदि न बना हो तो उनके बीपीएल, राशन कार्ड आदि बनवाएं ताकि सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का वे लाभ उठा सकें।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed