{"_id":"5b43b5174f1c1ba1288b5919","slug":"11531163927-gorakhpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"साहब! दो लाख वसूलते हैं, सफाई तो करा दीजिए","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
साहब! दो लाख वसूलते हैं, सफाई तो करा दीजिए
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर।
Updated Tue, 10 Jul 2018 01:41 AM IST
विज्ञापन
फल और सब्जी मंडी में जलभराव से व्यापारियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
गोरखपुर। सरकार को हर साल 17 से 18 करोड़ का राजस्व देने वाली महेवा मंडी बदहाल है। व्यापारी मंडी की साफ-सफाई के लिए शुल्क स्वरूप हर महीने करीब दो लाख रुपये नगर निगम को देते हैं। लेकिन इसके बाद भी वे गंदगी और दुर्गंध के बीच रहने को मजबूर हैं। बारिश में उनपर दोहरी चोट पड़ी है। लाखों का माल मंडी से जलनिकासी की उचित व्यवस्था न होने के कारण बर्बाद हो गया। वहीं अब जलभराव के कारण ग्राहक भी सोच-समझ कर ही आ रहे हैं।
करीब सप्ताह भर पहले हुई बारिश में मंडी परिसर तालाब सरीखा हो गया था। पानी के बीच पांव रखने की भी जगह नहीं बची थी। कई यत्न किए, लेकिन फिर भी कई व्यापारी अपना माल नहीं बचा पाए। लाखों का नुकसान हुआ। ऐसा नहीं है कि यह सिर्फ इस बरसात की बात है। ऐसा हर बार की बारिश में होता है। इसके बावजूद नगर निगम मंडी परिसर में जलभराव से निजात के मुकम्मल इंतजाम नहीं कर सका है। वहीं रोज सफाई न होने से पूरे मंडी परिसर में गंदगी फैली रहती है। खराब फलों और सब्जियों के सड़ने से पूरे परिसर में दुर्गंध फैली रहती है। इसे खाने के लिए आवारा पशु भी मंडी में घूमते रहते हैं जो ताजी सब्जियों फलों पर भी मुंह मार देते हैं। मंडी में कई लोग इनके हमलों का भी शिकार हो चुके हैं।
- संजय शुक्ला, अध्यक्ष, पूर्वांचल सब्जी फल थोक विक्रेता कल्याण समिति
- गुलाब सोनकर, थोक फल व्यापारी, फल मंडी
-संजू कुमार सोनकर, थोक फल व्यापारी
-अविनाश कुमार, थोक व्यापारी
- नगर निगम के सहयोग से मंडी परिसर की सफाई होती है। इसके लिए उन्हें हरेक माह 1.85 लाख रुपये का भुगतान किया जाता है। अभी थोड़ी दिक्कत नालों के चोक होने से है। इसे जल्द दुरुस्त करा लिया जाएगा।
विज्ञापन
- सेवा राम वर्मा, मंडी सचिव
- मंडी परिषद से काफी कूड़ा निकलता है। सफाई में तीन लोडर, 15 सफाई कर्मचारी लगाए जाते हैं। ऐसे में सप्ताह में केवल दो दिन सफाई हो पाती है। मंडी परिषद फिलहाल जो भुगतान कर रहा है, वह काफी कम है। बढ़ाने के लिए पत्र लिखा गया है।
- डॉ. मुकेश रस्तोगी, मुख्य नगर स्वास्थ्य अधिकारी, नगर निगम
करीब सप्ताह भर पहले हुई बारिश में मंडी परिसर तालाब सरीखा हो गया था। पानी के बीच पांव रखने की भी जगह नहीं बची थी। कई यत्न किए, लेकिन फिर भी कई व्यापारी अपना माल नहीं बचा पाए। लाखों का नुकसान हुआ। ऐसा नहीं है कि यह सिर्फ इस बरसात की बात है। ऐसा हर बार की बारिश में होता है। इसके बावजूद नगर निगम मंडी परिसर में जलभराव से निजात के मुकम्मल इंतजाम नहीं कर सका है। वहीं रोज सफाई न होने से पूरे मंडी परिसर में गंदगी फैली रहती है। खराब फलों और सब्जियों के सड़ने से पूरे परिसर में दुर्गंध फैली रहती है। इसे खाने के लिए आवारा पशु भी मंडी में घूमते रहते हैं जो ताजी सब्जियों फलों पर भी मुंह मार देते हैं। मंडी में कई लोग इनके हमलों का भी शिकार हो चुके हैं।
विज्ञापन
व्यापारी बोले
मंडी परिषद- प्रशासन जिम्मेदार
जलभराव और गंदगी मंडी की सबसे बड़ी समस्या है। इस संबंध में कई बार मंडी परिषद के सचिव से मिलकर शिकायत की गई। मंडी परिषद और प्रशासन जिम्मेदार है।- संजय शुक्ला, अध्यक्ष, पूर्वांचल सब्जी फल थोक विक्रेता कल्याण समिति
कारोबार करना हो जाता है मुश्किल
सुबह से शाम तक चारों तरफ कूड़ा बिखरा रहता है। न तो सही ढंग से कूड़ा उठाया जाता है और न ही चोक नालों की सफाई हो रही है। रहना मुश्किल हो जाता है।- गुलाब सोनकर, थोक फल व्यापारी, फल मंडी
दुकान के आगे सीवर का पानी
अक्सर दुकान के आगे सीवर का पानी इकट्ठा हो जाता है। इसकी वजह से व्यवसाय काफी प्रभावित होता है। समस्या से अवगत कराने के बावजूद दूर नहीं हो रही है।-संजू कुमार सोनकर, थोक फल व्यापारी
नरक सा बन जाता है मंडी परिसर
बारिश के दिन में तो मंडी परिसर बिल्कुल नरक सा बन जाता है। पांव रखने की जगह नहीं रहती है। दुर्गंध से एक-एक पल काफी भारी बीतता है।-अविनाश कुमार, थोक व्यापारी
- नगर निगम के सहयोग से मंडी परिसर की सफाई होती है। इसके लिए उन्हें हरेक माह 1.85 लाख रुपये का भुगतान किया जाता है। अभी थोड़ी दिक्कत नालों के चोक होने से है। इसे जल्द दुरुस्त करा लिया जाएगा।
विज्ञापन
- सेवा राम वर्मा, मंडी सचिव
- मंडी परिषद से काफी कूड़ा निकलता है। सफाई में तीन लोडर, 15 सफाई कर्मचारी लगाए जाते हैं। ऐसे में सप्ताह में केवल दो दिन सफाई हो पाती है। मंडी परिषद फिलहाल जो भुगतान कर रहा है, वह काफी कम है। बढ़ाने के लिए पत्र लिखा गया है।
- डॉ. मुकेश रस्तोगी, मुख्य नगर स्वास्थ्य अधिकारी, नगर निगम