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कालाजार का खतरा फिर बढ़ा, अलर्ट
Fri, 12 Apr 2019 12:11 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
अमर उजाला/गाोरख्ापुर
अमर उजाला/गाोरख्ापुर
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 12 Apr 2019 12:11 AM IST
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संतोष सिंह
गोरखपुर। पूर्वांचल में कालाजार का खतरा फिर बढ़ गया है। जनवरी से अब तक देवरिया और कुशीनगर में कालाजार के 15 मरीज मिल चुके हैं। जबकि इस बीमारी का वास्तविक सीजन जून से अक्तूबर तक होता है। सीजन से पहले ही मरीज मिलने से स्वास्थ्य महकमा चिंतित है। देवरिया और कुशीनगर की सीमा गोरखपुर से लगी है। इस वजह से बीमारी को लेकर गोरखपुर में भी अलर्ट जारी किया गया है। सरदारनगर विकास खंड में कालाजार के दो मरीज पहले मिल चुके हैं।
कालाजार से मरीज के शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है और तमाम तरह की बीमारियां घेरने लगती हैं। तीन साल (2016) पहले गोरखपुर मंडल में कालाजार का खतरा कम हो गया था। महज पांच मरीज मिले थे लेकिन 2017 के दौरान देवरिया में कालाजार के 29 मरीज मिल गए। 2018 में मरीजों की यह संख्या बढ़कर 41 पहुंच गई। वहीं इस साल जनवरी से अब तक ही नौ मरीज मिल चुके हैं। इसी तरह वर्ष 2017 के दौरान कुशीनगर में कालाजार के 90 मरीज मिले थे।
2018 में 66 मरीजों के नाम सामने आ सके। इसकी रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। जनवरी से अब तक कुशीनगर में छह नए मरीज मिले हैं। स्वास्थ्य महकमे के मुताबिक कालाजार का सीजन अभी शुरू नहीं हुआ है, इस कारण दोनों जिलों में मरीजों की संख्या में अभी इजाफे की आशंका जताई जा रही है। यूपी के साथ ही बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में भी कालाजार का आतंक है। मरीज को समय से इलाज न मिले तो जान तक जा सकती है।
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भूख न लगने के साथ ही पेट का फूल जाना।
शरीर का वजन तेजी से कम होना।
गोबर से लिपाई करें और कोशिश करें की घर में नमी न रहे।
परिवार के सदस्य पूरी बांह के कपड़े पहनकर रखें।
बिना कपड़े पहने कच्चे मकान की फर्श पर न सोएं।
मच्छरदानी लगाकर सोएं तो बचाव बेहतर होगा।
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गोरखपुर। पूर्वांचल में कालाजार का खतरा फिर बढ़ गया है। जनवरी से अब तक देवरिया और कुशीनगर में कालाजार के 15 मरीज मिल चुके हैं। जबकि इस बीमारी का वास्तविक सीजन जून से अक्तूबर तक होता है। सीजन से पहले ही मरीज मिलने से स्वास्थ्य महकमा चिंतित है। देवरिया और कुशीनगर की सीमा गोरखपुर से लगी है। इस वजह से बीमारी को लेकर गोरखपुर में भी अलर्ट जारी किया गया है। सरदारनगर विकास खंड में कालाजार के दो मरीज पहले मिल चुके हैं।
कालाजार से मरीज के शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है और तमाम तरह की बीमारियां घेरने लगती हैं। तीन साल (2016) पहले गोरखपुर मंडल में कालाजार का खतरा कम हो गया था। महज पांच मरीज मिले थे लेकिन 2017 के दौरान देवरिया में कालाजार के 29 मरीज मिल गए। 2018 में मरीजों की यह संख्या बढ़कर 41 पहुंच गई। वहीं इस साल जनवरी से अब तक ही नौ मरीज मिल चुके हैं। इसी तरह वर्ष 2017 के दौरान कुशीनगर में कालाजार के 90 मरीज मिले थे।
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2018 में 66 मरीजों के नाम सामने आ सके। इसकी रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। जनवरी से अब तक कुशीनगर में छह नए मरीज मिले हैं। स्वास्थ्य महकमे के मुताबिक कालाजार का सीजन अभी शुरू नहीं हुआ है, इस कारण दोनों जिलों में मरीजों की संख्या में अभी इजाफे की आशंका जताई जा रही है। यूपी के साथ ही बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में भी कालाजार का आतंक है। मरीज को समय से इलाज न मिले तो जान तक जा सकती है।
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2020 तक कालाजार से निजात संभव नहीं
गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, भदोही, जौनपुर और वाराणसी से कालाजार को खत्म करने का लक्ष्य पहले 2010 तय किया गया था लेकिन टीकाकरण सही तरीके से न होने के कारण यह संभव न हो सका। अब वर्ष 2020 तक कालाजार से निजात का लक्ष्य रखा गया है लेकिन मरीजों की बढ़ती संख्या की वजह से स्वास्थ्य महकमा परेशान है। महकमे के अफसरों का कहना है कि निर्धारित समयसीमा तक बीमारी से निजात संभव नहीं लग रही है। ऐसे में समयसीमा एक बार फिर बढ़ानी पड़ेगी।कारण
सैंड फ्ली (बालू मक्खी) के काटने से कालाजार होता है। सफाई की कमी और कच्चे मकान में ज्यादा नमी की वजह से इस मक्खी का आतंक बढ़ता है। मक्खी एक व्यक्ति को काटती है। व्यक्ति कालाजार से संक्रमित हो जाता है। ऐसे में वही मक्खी दूसरे व्यक्ति को काट ले तो उसे भी कालाजार हो जाता है।लक्षण
तेज बुखार होना और दवा खाने के बाद भी आराम न मिलना।भूख न लगने के साथ ही पेट का फूल जाना।
शरीर का वजन तेजी से कम होना।
बचाव
कच्चे मकान की सफाई ठीक से करें।गोबर से लिपाई करें और कोशिश करें की घर में नमी न रहे।
परिवार के सदस्य पूरी बांह के कपड़े पहनकर रखें।
बिना कपड़े पहने कच्चे मकान की फर्श पर न सोएं।
मच्छरदानी लगाकर सोएं तो बचाव बेहतर होगा।