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बुढ़वा मंगल पर श्रद्धालुओं ने चढ़ाई खिचड़ी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर।
Updated Tue, 23 Jan 2018 08:15 PM IST
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खिचड़ी चढ़ाने मंदिर पहुंचे श्रद्धालु।
- फोटो : Amar Ujala
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बुढ़वा मंगल पर मंगलवार को गोरखनाथ मंदिर में हजारों श्रद्धालुओं ने बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी अर्पित की। भोर से शुरू हुआ दर्शन, पूजन देर शाम तक जारी रहा। खास बात यह रही कि मंदिर पहुंचने वालों में युवाओं की संख्या ज्यादा रही। मौसम ने भी साथ दिया। सुबह ही निकली धूप की गर्माहट जैसे-जैसे बढ़ती गई, मंदिर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में भी इजाफा होता गया। देर शाम तक कतार में खड़ी और जयकारे लगाती युवाओं टोलियां आकषर्ण का केंद्र बनी रहीं। दर्शन के बाद लोगों में मेला परिसर की ओर रुख किया। इस दौरान मंदिर और उसके आसपास भीड़ को सहेजने और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस और प्रशासन की तरफ से खास इंतजाम किए गए थे।
भोर में लगभग चार बजे से ही दूर- दराज से आए श्रद्धालुओं की मंदिर परिसर में लाइन लगनी शुरू हो गई। शिकोहाबाद से अपने परिवार के साथ बाबा को खिचड़ी चढ़ाने आए शिवेंद्र ने बताया कि एक साल मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी चढ़ाने आया था, लेकिन भारी भीड़ की वजह से मुख्य मंदिर तक पहुंचने में सफल नहीं हो सका। तब से हर साल उनका परिवार बुढ़वा मंगल को ही खिचड़ी चढ़ाता है। बिहार के छपरा से आए दीपक ने बताया कि सालों से वह परिवार के साथ संक्रांति और बुढ़वा मंगल दोनो दिन बाबा को खिचड़ी चढ़ाने आते हैं।
युवा बने बुजुर्गों का सहारा
बुढ़वा मंगल पर बाबा को खिचड़ी चढ़ाने पहुंचे लोगों में दूरदराज से आए बुजुर्ग भी शामिल थे। मथुरा के केशव बाजपेयी (70 साल) लगातार तीसरे साथ अपनी पत्नी के साथ मंदिर पहुंचे थे। लाइन में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। इसी बीच थकान की वजह से उनकी तबीयत खराब हो गई। पास खड़े विशाल ने उन्हें कंधे का सहारा देकर पास में बैठाया। कुछ देर बाद वह स्वस्थ हुए तो लाइन में खड़े अन्य युवाओं ने उन्हें आगे करके पहले दर्शन करने का मौका दिया। इसके अलावा जगह-जगह तैनात स्वयंसेवकों ने भी बुजुर्गों का खास ख्याल रखा।
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बोटिंग के बाद मौत का कुआं, झूले का भी लुत्फ
सुबह से ही मेला परिसर भी गुलजार हो गया। बुढ़वा मंगल पर जुटने वाली भीड़ को देखते हुए दुकानदारों ने भी सुबह से ही तैयारी शुरू कर दी। सुबह 10 बजे तक मेले में भीड़ काफी बढ़ गई। कुछ ने भीम सरोवर में बोटिंग का तो ज्यादातर लोगों ने बच्चों के साथ ट्वाय ट्रेन, हवाई झूला, ड्रेगन ट्रेन, मिनी ट्रेन, पोंसी, मौत का कुआं, जादू, शूटिंग, मायावी इंद्रजाल का लुत्फ उठाया।
जमकर हुई खरीददारी
मेले में आई महिलाओं ने शृंगार और घरेलू जरूरत के सामानों की जमकर खरीदारी की। बैग, पर्स, ज्वेलरी, क्रॉकरी, हैंडी क्राफ्ट, फाइबर के सामान, खिलौना, चप्पल- जूता, रेडिमेड स्वेटर व जैकेट की दुकानों पर विशेष भीड़ दिखी। वहीं दूर दराज से मेले में पहुंचे लोगों ने सेल्फी लेकर मेले की यादों को मोबाइल कैमरे में कैद किया कई मौत के कुएं और ब्रेक डांस फ्लोर पर खड़े होकर सेल्फी खींचते नजर आए।
खूब भा रहा है राजस्थानी अचार का स्वाद
मेले में बनारस के पवन ने राजस्थानी अचार की दुकान लगाई है। लगभग दस साल से यहां दुकान लगा रहे पवन के अनुसार मेले से ऐसी पहचान मिली कि अब शहर में होने वाले अन्य आयोजनों में भी उन्हें दुकान लगाने के लिए बुलावा आता है। उनकी दुकान पर मिलने वाला बांस का अचार लोगों को सबसे ज्यादा लुभा रहा है। इसके अलावा गन्ने के मुरब्बे की डिमांड भी ज्यादा है।
अचार के साथ ही मुरब्बे की भी मांग
आम मिक्स, कटहल, सुरन, लहसुन, हरी मिर्च, कलौंजी, लाल मिर्च, अमड़ा, करौंदा, नींबू मशाला, लिसोड़ा, केरिया, अगस्ती, बांस का अचार के अलावा आंवला मुरब्बा, बेल मुरब्बा, आम मीठा मुरब्बा, आम मीठा लच्छा, चेरी, नींबू मीठा के मुरब्बे की भी लोग खूब खरीदारी कर रहे हैं।
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भोर में लगभग चार बजे से ही दूर- दराज से आए श्रद्धालुओं की मंदिर परिसर में लाइन लगनी शुरू हो गई। शिकोहाबाद से अपने परिवार के साथ बाबा को खिचड़ी चढ़ाने आए शिवेंद्र ने बताया कि एक साल मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी चढ़ाने आया था, लेकिन भारी भीड़ की वजह से मुख्य मंदिर तक पहुंचने में सफल नहीं हो सका। तब से हर साल उनका परिवार बुढ़वा मंगल को ही खिचड़ी चढ़ाता है। बिहार के छपरा से आए दीपक ने बताया कि सालों से वह परिवार के साथ संक्रांति और बुढ़वा मंगल दोनो दिन बाबा को खिचड़ी चढ़ाने आते हैं।
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युवा बने बुजुर्गों का सहारा
बुढ़वा मंगल पर बाबा को खिचड़ी चढ़ाने पहुंचे लोगों में दूरदराज से आए बुजुर्ग भी शामिल थे। मथुरा के केशव बाजपेयी (70 साल) लगातार तीसरे साथ अपनी पत्नी के साथ मंदिर पहुंचे थे। लाइन में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। इसी बीच थकान की वजह से उनकी तबीयत खराब हो गई। पास खड़े विशाल ने उन्हें कंधे का सहारा देकर पास में बैठाया। कुछ देर बाद वह स्वस्थ हुए तो लाइन में खड़े अन्य युवाओं ने उन्हें आगे करके पहले दर्शन करने का मौका दिया। इसके अलावा जगह-जगह तैनात स्वयंसेवकों ने भी बुजुर्गों का खास ख्याल रखा।
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बोटिंग के बाद मौत का कुआं, झूले का भी लुत्फ
सुबह से ही मेला परिसर भी गुलजार हो गया। बुढ़वा मंगल पर जुटने वाली भीड़ को देखते हुए दुकानदारों ने भी सुबह से ही तैयारी शुरू कर दी। सुबह 10 बजे तक मेले में भीड़ काफी बढ़ गई। कुछ ने भीम सरोवर में बोटिंग का तो ज्यादातर लोगों ने बच्चों के साथ ट्वाय ट्रेन, हवाई झूला, ड्रेगन ट्रेन, मिनी ट्रेन, पोंसी, मौत का कुआं, जादू, शूटिंग, मायावी इंद्रजाल का लुत्फ उठाया।
जमकर हुई खरीददारी
मेले में आई महिलाओं ने शृंगार और घरेलू जरूरत के सामानों की जमकर खरीदारी की। बैग, पर्स, ज्वेलरी, क्रॉकरी, हैंडी क्राफ्ट, फाइबर के सामान, खिलौना, चप्पल- जूता, रेडिमेड स्वेटर व जैकेट की दुकानों पर विशेष भीड़ दिखी। वहीं दूर दराज से मेले में पहुंचे लोगों ने सेल्फी लेकर मेले की यादों को मोबाइल कैमरे में कैद किया कई मौत के कुएं और ब्रेक डांस फ्लोर पर खड़े होकर सेल्फी खींचते नजर आए।
खूब भा रहा है राजस्थानी अचार का स्वाद
मेले में बनारस के पवन ने राजस्थानी अचार की दुकान लगाई है। लगभग दस साल से यहां दुकान लगा रहे पवन के अनुसार मेले से ऐसी पहचान मिली कि अब शहर में होने वाले अन्य आयोजनों में भी उन्हें दुकान लगाने के लिए बुलावा आता है। उनकी दुकान पर मिलने वाला बांस का अचार लोगों को सबसे ज्यादा लुभा रहा है। इसके अलावा गन्ने के मुरब्बे की डिमांड भी ज्यादा है।
अचार के साथ ही मुरब्बे की भी मांग
आम मिक्स, कटहल, सुरन, लहसुन, हरी मिर्च, कलौंजी, लाल मिर्च, अमड़ा, करौंदा, नींबू मशाला, लिसोड़ा, केरिया, अगस्ती, बांस का अचार के अलावा आंवला मुरब्बा, बेल मुरब्बा, आम मीठा मुरब्बा, आम मीठा लच्छा, चेरी, नींबू मीठा के मुरब्बे की भी लोग खूब खरीदारी कर रहे हैं।