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जीएसटी पोर्टल नहीं चलने से व्यापारी परेशान
Updated Wed, 27 Sep 2017 01:15 AM IST
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गोरखपुर।
जीएसटी पोर्टल नहीं चलने और टैक्स संबंधी दिक्कतों की वजह से व्यापारी परेशान हैं। चैंबर ऑफ कॉमर्स की ओर से इस संबंध में प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री को पत्र भेजकर परेशानियों को जल्द से जल्द दूर करने की मांग की गई। चैंबर आफ कॉमर्स के अध्यक्ष संजय सिंघानिया ने प्रधानमंत्री एवं वित्त मंत्री को पत्र भेज कर कहा है कि मौजूदा परिस्थितियों में व्यापार काफी प्रभावित है। नोटबंदी और जीएसटी लागू होने के बाद की जो स्थितियां अब तक बनी हुई हैं, उससे ऐसा लगता है कि इन बदलावों का सही आंकलन अधिकारियों ने नहीं किया।
व्यापारियों ने गिनाई समस्याएं
- जीएसटी पोर्टल सही तरीके से काम नहीं कर रहा, व्यापारी उस पोर्टल से अपना व्यापार नहीं कर पा रहा
- एक ही प्रकार के व्यापार पर तीन और चार तरह की टेक्स दर बताई जा रहीं हैं। स्पष्ट रूप से बताने की कोई व्यवस्था नहीं है, जिससे व्यापार प्रभावित है।
- महीने में 3 बार तीन तरह के रिटर्न दाखिल करने के दबाव से व्यापार सही ढंग से नहीं हो पा रहा है।
- परचून फुटकर के व्यापारी को कई आइटम का काम करना पड़ता है, जिसमें बहुत सी वस्तुओं का रेट टैक्स अलग अलग है और उसका जींस कोड भी अलग अलग हैं उनके रिटर्न दाखिल करना एवं लेखा जोखा रखना सजा जैसा है
जीएसटी पोर्टल नहीं चलने और टैक्स संबंधी दिक्कतों की वजह से व्यापारी परेशान हैं। चैंबर ऑफ कॉमर्स की ओर से इस संबंध में प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री को पत्र भेजकर परेशानियों को जल्द से जल्द दूर करने की मांग की गई। चैंबर आफ कॉमर्स के अध्यक्ष संजय सिंघानिया ने प्रधानमंत्री एवं वित्त मंत्री को पत्र भेज कर कहा है कि मौजूदा परिस्थितियों में व्यापार काफी प्रभावित है। नोटबंदी और जीएसटी लागू होने के बाद की जो स्थितियां अब तक बनी हुई हैं, उससे ऐसा लगता है कि इन बदलावों का सही आंकलन अधिकारियों ने नहीं किया।
व्यापारियों ने गिनाई समस्याएं
- जीएसटी पोर्टल सही तरीके से काम नहीं कर रहा, व्यापारी उस पोर्टल से अपना व्यापार नहीं कर पा रहा
- एक ही प्रकार के व्यापार पर तीन और चार तरह की टेक्स दर बताई जा रहीं हैं। स्पष्ट रूप से बताने की कोई व्यवस्था नहीं है, जिससे व्यापार प्रभावित है।
- महीने में 3 बार तीन तरह के रिटर्न दाखिल करने के दबाव से व्यापार सही ढंग से नहीं हो पा रहा है।
- परचून फुटकर के व्यापारी को कई आइटम का काम करना पड़ता है, जिसमें बहुत सी वस्तुओं का रेट टैक्स अलग अलग है और उसका जींस कोड भी अलग अलग हैं उनके रिटर्न दाखिल करना एवं लेखा जोखा रखना सजा जैसा है
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