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पिछले साल की तुलना में घटा प्रधानमंत्री आवास का लक्ष्य
Updated Mon, 17 Jul 2017 07:58 PM IST
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गोरखपुर। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत हर गरीब को घर देने की केंद्र सरकार की योजना की रफ्तार धीमी पड़ती जा रही है। पिछले साल की तुलना में इस साल इसका लक्ष्य कम हो गया है। यदि इसी रफ्तार से जिले के गरीबों को आवास मुहैया कराया गया तो 2019 तक सभी गरीबों को आवास देने का लक्ष्य पाना मुश्किल हो जाएगा।
तीन साल पहले केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद प्रधानमंत्री ने देश के सभी लोगों को आवास दिलाने की घोषणा की थी। इसके बाद 2011 की आर्थिक जनगणना के आधार पर जिन लोगों के पास आवास नहीं थे, उनकी सूची बनाई गई। उसी आधार पर हर साल लक्ष्य तय किया जाने लगा। पिछले साल जिले को 10,736 आवास का लक्ष्य दिया गया था, मगर इस साल जिले को 6835 आवास का ही लक्ष्य मिला है। इस हिसाब से बहुत से पात्रों के योजना का लाभ पाने से वंचित रह जाने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि परियोजना निदेशक (पीडी) कार्यालय के कर्मचारियों का मानना है कि अभी यह लक्ष्य बढ़ेगा। पिछले साल भी पहले 8 हजार का ही लक्ष्य आया था, जो बाद में 10 हजार से ऊपर चला गया। इस साल जो लक्ष्य आया है वह केवल देहात क्षेत्र का है। शहरी क्षेत्र के लिए आवास अलग से है। वह नगर निगम क्षेत्र में होने के कारण उसकी व्यवस्था डूडा के अधिकारी देखेंगे।
विभाग से जुड़े लोगों का कहना है कि 2011 के बाद 2015-16 में भी आर्थिक सर्वे हुआ था। उसमें पिछली सूची का सत्यापन भी किया गया। इसमें से कई अपात्रों के नाम काट दिए गए और पात्रों के नाम सूची में जोड़ने के लिए पंचायतों से छूटे हुए लोगों के नाम मांगे गए। पंचायतों ने नाम भेजे भी, पर उस पर अभी तक विचार नहीं हुआ। लक्ष्य कम होने के पीछे एक वजह यह भी मानी जा रही है।
तीन साल पहले केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद प्रधानमंत्री ने देश के सभी लोगों को आवास दिलाने की घोषणा की थी। इसके बाद 2011 की आर्थिक जनगणना के आधार पर जिन लोगों के पास आवास नहीं थे, उनकी सूची बनाई गई। उसी आधार पर हर साल लक्ष्य तय किया जाने लगा। पिछले साल जिले को 10,736 आवास का लक्ष्य दिया गया था, मगर इस साल जिले को 6835 आवास का ही लक्ष्य मिला है। इस हिसाब से बहुत से पात्रों के योजना का लाभ पाने से वंचित रह जाने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि परियोजना निदेशक (पीडी) कार्यालय के कर्मचारियों का मानना है कि अभी यह लक्ष्य बढ़ेगा। पिछले साल भी पहले 8 हजार का ही लक्ष्य आया था, जो बाद में 10 हजार से ऊपर चला गया। इस साल जो लक्ष्य आया है वह केवल देहात क्षेत्र का है। शहरी क्षेत्र के लिए आवास अलग से है। वह नगर निगम क्षेत्र में होने के कारण उसकी व्यवस्था डूडा के अधिकारी देखेंगे।
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विभाग से जुड़े लोगों का कहना है कि 2011 के बाद 2015-16 में भी आर्थिक सर्वे हुआ था। उसमें पिछली सूची का सत्यापन भी किया गया। इसमें से कई अपात्रों के नाम काट दिए गए और पात्रों के नाम सूची में जोड़ने के लिए पंचायतों से छूटे हुए लोगों के नाम मांगे गए। पंचायतों ने नाम भेजे भी, पर उस पर अभी तक विचार नहीं हुआ। लक्ष्य कम होने के पीछे एक वजह यह भी मानी जा रही है।
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