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बड़ी गंडक की धारा मोड़ेगा सिंचाई विभाग
Updated Sun, 16 Jul 2017 11:43 PM IST
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कुशीनगर। बिहार सरकार गंडक की जद में आने वाले 62 गांवों को बाढ़ की त्रासदी से बचाने के लिए नदी की धारा को मोड़ने की कवायद में लग गई है। इसके लिए बिहार के सिंचाई विभाग ने एक बड़ा ड्रोजर मशीन मंगाया है। इसके सभी हिस्सों को क्रेन के जरिए बाकखास गांव के पास गंडक नदी के किनारे जोड़ा जा रहा है। उसके बाद इसे गंडक नदी में उतारा जाएगा, जो यूपी और बिहार बार्डर से गंडक नदी की धारा को मोड़ने का काम करेगी। सिंचाई विभाग इस प्रयास में सफल हो जाता है तो एपी तटबंध पर भी गंडक नदी के दबाव से राहत मिलेगी।
गंडक नदी हर साल एपी तटबंध को नुकसान पहुंचाती है और यहां के लोगों को बाढ़ की तबाही झेलनी पड़ती है। इसी तरह यह नदी बिहार में के तटवर्ती गांवों में भी काफी क्षति पहुंचाती है। बिहार सीमा के भैसहीं, सलेपुर, खेम, काला मटिहिनिया, विशुनपुर, बरईपट्टी, विशंभरपुर, भगवानपुर, रमजीता, यादोपुर सहित 62 गांवों पर गंडक नदी के कटान और बाढ़ का खतरा बना रहता है।
इस साल बिहार सरकार अपने इन गांवों को कटान से बचाने के लिए सक्रिय हो गई है। इसके लिए गंडक नदी की धारा को इन गांवों के विपरीत दिशा में मोड़ने का अभियान चलाया जा रहा है। बिहार प्रांत के सिंचाई विभाग के अभियंताओं का मानना है कि अगर नदी के लिए एक निश्चित दायरे में गहरा रास्ता बना दिया जाय तो उसका विस्तार सिमट जाएगा। इसके लिए पटना से एक बड़ा ड्रोजर मंगवाया गया है। कई भागों में विभक्त ड्रोजर मशीन को जोड़ने का काम यूपी के बाकखाश गांव के निकट गंडक नदी के किनारे बड़े - बडे़ क्रेनों की सहायता से किया जा रहा है। बताया जाता है कि यह ड्रोजर मशीन लगभग 45 टन वजन की है और इसमें एक घंटे में 35 लीटर डीजल की खपत होती है। इस ड्रोजर मशीन के चालक रमेश तिवारी व जुगुन सिंह ने बताया कि चार पांच दिन में इस मशीन को पूरी तरह जोड़कर गंडक नदी में उतार दिया जाएगा, जो बिहार क्षेत्र में नदी की धारा को मोड़ने का काम शुरू कर देगी। अगर बिहार सरकार का यह अभियान सफल हो जाता है तो पिपराघाट, बिरवट, जंगली पट्टी, बाकखास, नरवाजोत, बाघाचौर, नुनिया पट्टी, जवही दयाल, जयपुर, गोलाघाट, रानीगंज, बेनिया पिपरा, नरवाटोला सहित यूपी के भी 60 गांवों को बाढ़ की त्रासदी से सीधे तौर पर निजात मिलेगी।
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गंडक नदी हर साल एपी तटबंध को नुकसान पहुंचाती है और यहां के लोगों को बाढ़ की तबाही झेलनी पड़ती है। इसी तरह यह नदी बिहार में के तटवर्ती गांवों में भी काफी क्षति पहुंचाती है। बिहार सीमा के भैसहीं, सलेपुर, खेम, काला मटिहिनिया, विशुनपुर, बरईपट्टी, विशंभरपुर, भगवानपुर, रमजीता, यादोपुर सहित 62 गांवों पर गंडक नदी के कटान और बाढ़ का खतरा बना रहता है।
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इस साल बिहार सरकार अपने इन गांवों को कटान से बचाने के लिए सक्रिय हो गई है। इसके लिए गंडक नदी की धारा को इन गांवों के विपरीत दिशा में मोड़ने का अभियान चलाया जा रहा है। बिहार प्रांत के सिंचाई विभाग के अभियंताओं का मानना है कि अगर नदी के लिए एक निश्चित दायरे में गहरा रास्ता बना दिया जाय तो उसका विस्तार सिमट जाएगा। इसके लिए पटना से एक बड़ा ड्रोजर मंगवाया गया है। कई भागों में विभक्त ड्रोजर मशीन को जोड़ने का काम यूपी के बाकखाश गांव के निकट गंडक नदी के किनारे बड़े - बडे़ क्रेनों की सहायता से किया जा रहा है। बताया जाता है कि यह ड्रोजर मशीन लगभग 45 टन वजन की है और इसमें एक घंटे में 35 लीटर डीजल की खपत होती है। इस ड्रोजर मशीन के चालक रमेश तिवारी व जुगुन सिंह ने बताया कि चार पांच दिन में इस मशीन को पूरी तरह जोड़कर गंडक नदी में उतार दिया जाएगा, जो बिहार क्षेत्र में नदी की धारा को मोड़ने का काम शुरू कर देगी। अगर बिहार सरकार का यह अभियान सफल हो जाता है तो पिपराघाट, बिरवट, जंगली पट्टी, बाकखास, नरवाजोत, बाघाचौर, नुनिया पट्टी, जवही दयाल, जयपुर, गोलाघाट, रानीगंज, बेनिया पिपरा, नरवाटोला सहित यूपी के भी 60 गांवों को बाढ़ की त्रासदी से सीधे तौर पर निजात मिलेगी।
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