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गंडक में चलाई जाएगी जहाज, बनेगा जलमार्ग
Updated Sun, 09 Jul 2017 12:11 AM IST
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कुशीनगर। अब तक केवल बाढ़ की त्रासदी के लिए चर्चा में रहने वाली गंडक नदी को भारत सरकार के पोत परिवहन मंत्रालय ने जलमार्ग संख्या 37 में तब्दील करने का निर्णय लिया है। इस नदी में मालवाहक नौकाएं व जहाज चलाने की योजना है। नेपाल व बिहार बॉर्डर स्थित भैंसालोटन से लेकर गंगा नदी के संगम स्थल सोनपुर तक जहाज चलाए जाएंगे।
केंद्रीय सड़क परिवहन राजमार्ग एवं पोत परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने बिहार के वाल्मीकि नगर के सांसद सतीश चंद्र दूबे को पत्र भेजकर इस नदी को जल परिवहन के रूप में विकसित किए जाने की जानकारी दी है। इस पत्र के अनुसार नदी को जलमार्ग संख्या 37 के रूप में विकसित करने की योजना है, जिसके लिए डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार हो गई है। केंद्र सरकार ने 150.73 करोड़ रुपये भी स्वीकृत कर दिए हैं। गंडक को जलमार्ग के रूप में विकसित करने से यूपी के महराजगंज व कुशीनगर जिले के अलावा बिहार प्रांत के पश्चिमी चंपारण व गोपालगंज के बाढ़ प्रभावित इलाकों में पर्यटन व रोजगार की नई संभावनाओं की उम्मीद है।
हिमालय के भीतरी हिस्सों से निकली गंडक नदी वाल्मीकि नगर बैराज से आगे मैदानी इलाके में प्रवेश करती है। पड़ोसी जिला महराजगंज के निचलौल तहसील से होते हुए कुशीनगर और पड़ोसी प्रांत बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले के बीच से होकर नदी आगे बढ़ती है। कुशीनगर जिले का करीब 80 किलोमीटर हिस्सा गंडक नदी के किनारे है। नदी का सर्वाधिक हिस्सा बिहार में है। पिछले दो वर्षों से इस नदी को जलमार्ग के रूप में विकसित करने की योजना पर काम चल रहा था। कई बार इसका सर्वे भी हो चुका था। नदी का तल उथला हो रहा है, इसके बावजूद इसमें पूरे वर्ष पानी का वेग बना रहता है।
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केंद्रीय सड़क परिवहन राजमार्ग एवं पोत परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने बिहार के वाल्मीकि नगर के सांसद सतीश चंद्र दूबे को पत्र भेजकर इस नदी को जल परिवहन के रूप में विकसित किए जाने की जानकारी दी है। इस पत्र के अनुसार नदी को जलमार्ग संख्या 37 के रूप में विकसित करने की योजना है, जिसके लिए डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार हो गई है। केंद्र सरकार ने 150.73 करोड़ रुपये भी स्वीकृत कर दिए हैं। गंडक को जलमार्ग के रूप में विकसित करने से यूपी के महराजगंज व कुशीनगर जिले के अलावा बिहार प्रांत के पश्चिमी चंपारण व गोपालगंज के बाढ़ प्रभावित इलाकों में पर्यटन व रोजगार की नई संभावनाओं की उम्मीद है।
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हिमालय के भीतरी हिस्सों से निकली गंडक नदी वाल्मीकि नगर बैराज से आगे मैदानी इलाके में प्रवेश करती है। पड़ोसी जिला महराजगंज के निचलौल तहसील से होते हुए कुशीनगर और पड़ोसी प्रांत बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले के बीच से होकर नदी आगे बढ़ती है। कुशीनगर जिले का करीब 80 किलोमीटर हिस्सा गंडक नदी के किनारे है। नदी का सर्वाधिक हिस्सा बिहार में है। पिछले दो वर्षों से इस नदी को जलमार्ग के रूप में विकसित करने की योजना पर काम चल रहा था। कई बार इसका सर्वे भी हो चुका था। नदी का तल उथला हो रहा है, इसके बावजूद इसमें पूरे वर्ष पानी का वेग बना रहता है।
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