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10 साल पुराना रिकॉर्ड दोहराना चाहेगी बसपा
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गोरखपुर-बस्ती मंडल :
10 साल पुराना रिकॉर्ड दोहराना चाहेगी बसपा
तीन सीटों पर जीत और तीन पर ही दूसरे नंबर पर थी पार्टी
राजन राय
गोरखपुर। गठबंधन से उत्साहित बहुजन समाज पार्टी 10 साल पुराना अपना रिकॉर्ड दोहराना चाहेगी। साल 2009 के लोकसभा चुनाव में गोरखपुर-बस्ती मंडल की नौ सीटों में से तीन सीटें देवरिया, संतकबीरनगर और बस्ती बसपा के खाते में आई थीं। तीन ही सीटों पर पार्टी दूसरे नंबर पर थी। लेकिन इसके बाद पार्टी का ग्राफ तेजी से गिर गया और 2014 के चुनाव में पार्टी खाता नहीं खोल सकी। हालांकि मोदी मैजिक वाले उस चुनाव में सपा और कांग्रेस का भी बुरा हाल था। माना जा रहा है कि एक दशक पहले की कामयाबी को आधार बनाकर पार्टी ने गठबंधन में दोनों मंडलों की जीतने वाली और सेकंड रनर वाली सीटें अपने खाते में ली हैं। परिणाम बाद हकीकत और फसाने की बातें तय हो जाएंगी, लेकिन पार्टी क्षत्रपों को आस है कि इस बार पुराना रिकॉर्ड भी ध्वस्त होगा।
बसपा के लिए संतकबीरनगर और बस्ती लोकसभा सीट ज्यादा मुफीद है। संतकबीरनगर से 2009 और इसके पहले उपचुनाव में भीष्म शंकर तिवारी ने जीत हासिल की थी। वर्ष 2014 में भी बसपा के भीष्म शंकर दूसरे नंबर पर थे। पार्टी बस्ती में भी दो बार जीत का स्वाद चख चुकी है। वर्ष 2009 में पार्टी से अरविंद चौधरी और 2004 में लालमणि प्रसाद चुनाव जीते थे। यहां पार्टी ने हर बार प्रत्याशी बदल दिया। लेकिन वर्ष 2014 में फार्मूला काम नहीं आया। पार्टी ने राम प्रसाद चौधरी को प्रत्याशी बनाया था। पार्टी को शिकस्त तो मिली ही, सात फीसदी मत भी कम हो गए। डुमरियागंज में भी पार्टी का जनाधार ठीक रहा है। वर्ष 2014 में मो. मुकीम ने इस सीट पर पहली बार पार्टी को जीत दिलाई थी। 2014 के चुनाव में मो. मुकीम चुनाव हार गए लेकिन दूसरे नंबर पर रहे।
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चार सीटों पर नहीं खुला है खाता
गोरखपुर। गोरखपुर-बस्ती मंडल में बसपा का खाता चार लोकसभा सीट पर नहीं खुला है। महराजगंज, बांसगांव, सदर व कुशीनगर में पार्टी प्रत्याशी जीत का स्वाद नहीं चख पाए हैं। हालांकि गठबंधन में इन चार में से सिर्फ एक सीट बांसगांव ही बसपा के खाते में आई है। बाकी तीन सीटों पर सपा चुनाव लड़ाएगी। बांसगांव में पार्टी लगातार दो बार से दूसरे स्थान पर रही है। वर्ष 2009 में श्रीनाथ एडवोकेट और वर्ष 2014 सदल प्रसाद पार्टी के प्रत्याशी थे। कुशीनगर सीट पर 2009 में स्वामी प्रसाद मौर्या दूसरे स्थान पर थे। उन्हें 27.75 फीसदी वोट मिले थे। जबकि 30.63 प्रतिशत मत पाकर कांग्रेस से आरपीएन सिंह चुनाव जीते थे।
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सदर सीट पर मुकाबले से दूर रही पार्टी
गोरखपुर। गोरखपुर सदर लोकसभा सीट बसपा को रास नहीं आई है। जब बसपा का जनाधार तेजी से बढ़ा था उस दौरान भी इस सीट पर कुछ करिश्मा पार्टी नहीं कर सकी। 2009 के चुनाव में बसपा ने विनय शंकर तिवारी (वर्तमान में चिल्लूपार के विधायक) को प्रत्याशी बनाया था। विनय शंकर पूर्व मंत्री हरिशंकर तिवारी के बेटे हैं। पार्टी को उम्मीद थी ब्राह्मण मतों का ध्रुवीकरण हो जाएगा। विनय शंकर दूसरे पर नंबर पर थे लेकिन हार का अंतर बहुत ज्यादा था।
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10 साल पुराना रिकॉर्ड दोहराना चाहेगी बसपा
तीन सीटों पर जीत और तीन पर ही दूसरे नंबर पर थी पार्टी
राजन राय
गोरखपुर। गठबंधन से उत्साहित बहुजन समाज पार्टी 10 साल पुराना अपना रिकॉर्ड दोहराना चाहेगी। साल 2009 के लोकसभा चुनाव में गोरखपुर-बस्ती मंडल की नौ सीटों में से तीन सीटें देवरिया, संतकबीरनगर और बस्ती बसपा के खाते में आई थीं। तीन ही सीटों पर पार्टी दूसरे नंबर पर थी। लेकिन इसके बाद पार्टी का ग्राफ तेजी से गिर गया और 2014 के चुनाव में पार्टी खाता नहीं खोल सकी। हालांकि मोदी मैजिक वाले उस चुनाव में सपा और कांग्रेस का भी बुरा हाल था। माना जा रहा है कि एक दशक पहले की कामयाबी को आधार बनाकर पार्टी ने गठबंधन में दोनों मंडलों की जीतने वाली और सेकंड रनर वाली सीटें अपने खाते में ली हैं। परिणाम बाद हकीकत और फसाने की बातें तय हो जाएंगी, लेकिन पार्टी क्षत्रपों को आस है कि इस बार पुराना रिकॉर्ड भी ध्वस्त होगा।
बसपा के लिए संतकबीरनगर और बस्ती लोकसभा सीट ज्यादा मुफीद है। संतकबीरनगर से 2009 और इसके पहले उपचुनाव में भीष्म शंकर तिवारी ने जीत हासिल की थी। वर्ष 2014 में भी बसपा के भीष्म शंकर दूसरे नंबर पर थे। पार्टी बस्ती में भी दो बार जीत का स्वाद चख चुकी है। वर्ष 2009 में पार्टी से अरविंद चौधरी और 2004 में लालमणि प्रसाद चुनाव जीते थे। यहां पार्टी ने हर बार प्रत्याशी बदल दिया। लेकिन वर्ष 2014 में फार्मूला काम नहीं आया। पार्टी ने राम प्रसाद चौधरी को प्रत्याशी बनाया था। पार्टी को शिकस्त तो मिली ही, सात फीसदी मत भी कम हो गए। डुमरियागंज में भी पार्टी का जनाधार ठीक रहा है। वर्ष 2014 में मो. मुकीम ने इस सीट पर पहली बार पार्टी को जीत दिलाई थी। 2014 के चुनाव में मो. मुकीम चुनाव हार गए लेकिन दूसरे नंबर पर रहे।
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चार सीटों पर नहीं खुला है खाता
गोरखपुर। गोरखपुर-बस्ती मंडल में बसपा का खाता चार लोकसभा सीट पर नहीं खुला है। महराजगंज, बांसगांव, सदर व कुशीनगर में पार्टी प्रत्याशी जीत का स्वाद नहीं चख पाए हैं। हालांकि गठबंधन में इन चार में से सिर्फ एक सीट बांसगांव ही बसपा के खाते में आई है। बाकी तीन सीटों पर सपा चुनाव लड़ाएगी। बांसगांव में पार्टी लगातार दो बार से दूसरे स्थान पर रही है। वर्ष 2009 में श्रीनाथ एडवोकेट और वर्ष 2014 सदल प्रसाद पार्टी के प्रत्याशी थे। कुशीनगर सीट पर 2009 में स्वामी प्रसाद मौर्या दूसरे स्थान पर थे। उन्हें 27.75 फीसदी वोट मिले थे। जबकि 30.63 प्रतिशत मत पाकर कांग्रेस से आरपीएन सिंह चुनाव जीते थे।
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सदर सीट पर मुकाबले से दूर रही पार्टी
गोरखपुर। गोरखपुर सदर लोकसभा सीट बसपा को रास नहीं आई है। जब बसपा का जनाधार तेजी से बढ़ा था उस दौरान भी इस सीट पर कुछ करिश्मा पार्टी नहीं कर सकी। 2009 के चुनाव में बसपा ने विनय शंकर तिवारी (वर्तमान में चिल्लूपार के विधायक) को प्रत्याशी बनाया था। विनय शंकर पूर्व मंत्री हरिशंकर तिवारी के बेटे हैं। पार्टी को उम्मीद थी ब्राह्मण मतों का ध्रुवीकरण हो जाएगा। विनय शंकर दूसरे पर नंबर पर थे लेकिन हार का अंतर बहुत ज्यादा था।