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ट्रिपल आईटी इलाहाबाद से जुड़कर लाइव रिसर्च कर सकेंगे मालवियन्स
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर।
Updated Sat, 07 Jul 2018 01:09 AM IST
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एमएमएमयूटी में द्वितीय मालवीय शोध समागम का उद्धाटन प्रो.संजय गोविंद, कुलपति प्रो.एसएन सिंह, प्रो.पी नागभूषन, प्रो.मर्सिन आदि ने उद्घाटन किया।
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गोरखपुर। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में आयोजित द्वितीय मालवीय शोध समागम के पहले दिन ही ट्रिपल आईटी इलाहाबाद और एमएमएयूटी के बीच ज्वाइंट प्रोजेक्ट और रिसर्च को लेकर समझौता हुआ। एमएमएमयूटी के कुलपति प्रो एसएन सिंह एवं व आईआईआईटी इलाहाबाद के निदेशक प्रो. पी नागभूषण ने समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस करार के बाद मालवियंस भी ट्रिपल आईटी से जुड़कर लाइव रिसर्च कर सकेंगे। सभी विद्यार्थी एक सेमेस्टर (छह महीने) की पढ़ाई वहां जाकर करेंगे। इससे विद्यार्थी नई तकनीक से रूबरू होंगे। साथ ही शोध के नए आयाम की तरफ बढ़ेंगे।
एमएमएमयूटी के आर्यभट्ट हाल में उद्घाटन सत्र का शुभारंभ करते हुए मुख्य अतिथि आईआईटी कानपुर के पूर्व निदेशक एवं पद्मश्री प्रो. संजय गोविंद धांडे ने कहा कि अब ऐसे रिसर्च की जरूरत है जो समाज के लिए उपयोगी हो। जनता की समस्याओं का समाधान हो सके। सुरक्षा, कृषि, विकास जैसे विषय पर रिसर्च हों तो इसका लाभ आम आदमी को ज्यादा होगा। उन्होंने अफसोस जताया कि ज्यादातर संस्थानों में ऐसे रिसर्च नहीं हो रहे हैं। समागम में ट्रिपल आईटी इलाहाबाद के निदेशक प्रो. पी नागभूषण, आईआईटी रुड़की के प्रो. एनपी पांडेय, जीएलए मथुरा के प्रो. श्रीश चंद्र चौधरी, प्रो. एनपी पांडेय ने भी विचार रखे।
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एमएमएमयूटी के आर्यभट्ट हाल में उद्घाटन सत्र का शुभारंभ करते हुए मुख्य अतिथि आईआईटी कानपुर के पूर्व निदेशक एवं पद्मश्री प्रो. संजय गोविंद धांडे ने कहा कि अब ऐसे रिसर्च की जरूरत है जो समाज के लिए उपयोगी हो। जनता की समस्याओं का समाधान हो सके। सुरक्षा, कृषि, विकास जैसे विषय पर रिसर्च हों तो इसका लाभ आम आदमी को ज्यादा होगा। उन्होंने अफसोस जताया कि ज्यादातर संस्थानों में ऐसे रिसर्च नहीं हो रहे हैं। समागम में ट्रिपल आईटी इलाहाबाद के निदेशक प्रो. पी नागभूषण, आईआईटी रुड़की के प्रो. एनपी पांडेय, जीएलए मथुरा के प्रो. श्रीश चंद्र चौधरी, प्रो. एनपी पांडेय ने भी विचार रखे।
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ग्लेशियर पिघले तो कई शहरों को खतरा
पोलैंड से आए प्रो. मरसिन ने स्मार्ट सिटी, स्मार्ट कार्ड और स्मार्ट हेल्थ की अवधारणा को उदाहरण सहित समझाया। कहा कि यह तकनीकी विकास ही है कि हम स्मार्ट बैंड के जरिए सेहत पर हर पल नजर रख सकते हैं। ग्लोबल वार्मिंग पर शोधों के हवाले से उन्होंने बताया कि वर्ष 2022 तक कई ग्लेशियर तीन मीटर तक पिघल जाएंगे। इससे समुद्र का जलस्तर और तटीय शहरों के लिए खतरा बढ़ेगा। तूफान और तेज हवाओं से तबाही हो सकती है। ग्लोबल वार्मिंग के बड़े कारण प्रदूषण को घटाने का प्रयास करना होगा। इसी क्रम में यूरोपीय शहरों में कार कम साइकिल का ज्यादा प्रयोग होने लगा है।
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