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पहले एंबुलेंस के लिए फिर इलाज को तड़पी प्रसूता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर।
Updated Tue, 05 Jun 2018 02:12 AM IST
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- फोटो : BBC
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गोरखपुर। सस्ती स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर मरीजों के साथ धोखा हो रहा है। सोमवार को ऐसा ही एक मामला सामने आया। पहले तो प्रसूता को दो घंटे एंबुलेंस के इंतजार में तड़पना पड़ा। फिर वह चिकित्सकों की बेरुखी से बेजार हुई। बीआरडी मेडिकल कॉलेज पहुंची प्रसूता को टांके लगाने के बाद डॉक्टरों ने बेहतर इलाज के नाम पर निजी अस्पताल भेज दिया।
उरुवा बाजार के बरपारमाफी निवासी अमित की पत्नी मीनू को सोमवार सुबह उरुवा स्वास्थ्य केंद्र पर सामान्य प्रसव हुआ। रक्तस्राव ज्यादा होने के चलते परिवार वाले आशा बहू के साथ उसे 102 एंबुलेंस से लेकर महिला अस्पताल पहुंचे। यहां चिकित्सकों ने हालत गंभीर देख मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया।
इस पर आशा बहू ने 102 और 108 पर कॉल कर एंबुलेंस की मांग की, लेकिन एंबुलेंस नहीं मिली। परिवार वाले निजी साधन की व्यवस्था में जुट गए। इसी बीच कुछ मीडिया कर्मी मौके पर पहुंचे और 102 एंबुलेंस के हेल्प डेस्क प्रभारी आकाश पांडेय को फोन किया तो उन्होंने एंबुलेंस खाली न होने की बात कही।
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मीडिया कर्मियों के हस्तक्षेप से एएलएस (एडवांस लाइफ सपोर्ट) एंबुलेंस पहुंची और प्रसूता को लेकर जब मेडिकल कॉलेज पहुंची तो यहां सस्ती स्वास्थ्य सेवाओं की बदरंग तस्वीर उभर कर आई। डॉक्टरों ने महिला को टांके लगाए और खून की कमी का हवाला देकर रक्त की व्यवस्था करने को कहा। परिवार के कुछ लोग इसकी व्यवस्था में जुटे थे कि इसी बीच डॉक्टरों ने खून की कमी न होने की बात कहते हुए सांस की दिक्कत बताई। इसके साथ ही बेहतर इलाज के लिए निजी हॉस्पिटल में भर्ती कराने का सुझाव दिया। परिवार वाले प्रसूता को लेकर शहर के एक निजी अस्पताल चले गए।
मामले की जानकारी नहीं है, लेकिन ऐसा होना बेहद गंभीर बात है। इसकी जांच कराई जाएगी। जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
- डॉ. आरएस शुक्ल, एसआईसी, बीआरडी मेडिकल कॉलेज
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उरुवा बाजार के बरपारमाफी निवासी अमित की पत्नी मीनू को सोमवार सुबह उरुवा स्वास्थ्य केंद्र पर सामान्य प्रसव हुआ। रक्तस्राव ज्यादा होने के चलते परिवार वाले आशा बहू के साथ उसे 102 एंबुलेंस से लेकर महिला अस्पताल पहुंचे। यहां चिकित्सकों ने हालत गंभीर देख मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया।
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इस पर आशा बहू ने 102 और 108 पर कॉल कर एंबुलेंस की मांग की, लेकिन एंबुलेंस नहीं मिली। परिवार वाले निजी साधन की व्यवस्था में जुट गए। इसी बीच कुछ मीडिया कर्मी मौके पर पहुंचे और 102 एंबुलेंस के हेल्प डेस्क प्रभारी आकाश पांडेय को फोन किया तो उन्होंने एंबुलेंस खाली न होने की बात कही।
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मीडिया कर्मियों के हस्तक्षेप से एएलएस (एडवांस लाइफ सपोर्ट) एंबुलेंस पहुंची और प्रसूता को लेकर जब मेडिकल कॉलेज पहुंची तो यहां सस्ती स्वास्थ्य सेवाओं की बदरंग तस्वीर उभर कर आई। डॉक्टरों ने महिला को टांके लगाए और खून की कमी का हवाला देकर रक्त की व्यवस्था करने को कहा। परिवार के कुछ लोग इसकी व्यवस्था में जुटे थे कि इसी बीच डॉक्टरों ने खून की कमी न होने की बात कहते हुए सांस की दिक्कत बताई। इसके साथ ही बेहतर इलाज के लिए निजी हॉस्पिटल में भर्ती कराने का सुझाव दिया। परिवार वाले प्रसूता को लेकर शहर के एक निजी अस्पताल चले गए।
मामले की जानकारी नहीं है, लेकिन ऐसा होना बेहद गंभीर बात है। इसकी जांच कराई जाएगी। जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
- डॉ. आरएस शुक्ल, एसआईसी, बीआरडी मेडिकल कॉलेज