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अंधविश्वास के चक्कर में सड़ा डाली लाश
Updated Thu, 15 Jun 2017 09:27 PM IST
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चौरीचौरा।
बिलारी गांव में झाड़-फूंक के चक्कर में एक महिला का शव सड़ गया। सर्पदंश से मौत के बाद तांत्रिक के चक्कर में फंसे घरवालों ने मौत के दो दिन बाद तक झाड़ फूंक कराई। जब महिला के शव से बदबू आने लगी तब जाकर उन्होंने दाह संस्कार किया। क्षेत्र में इस अंधविश्वास की चर्चा है। कई ग्रामीणों ने परिवार को इस बाबत समझाने की भी कोशिश की मगर वे तांत्रिक के सिवाय कुछ भी सुनने को तैयार नहीं थे।
बिलारी गांव के राजकुमार की 25 वर्षीय पत्नी सुनीता की मंगलवार को सर्पदंश से मौत हो गई थी। हालत बिगड़ने पर अस्पताल ले जाने की जगह घरवाले उसे एक तांत्रिक के पास लेकर चले गए। वहां झाड़-फूंक तो शुरू हो गई, लेकिन इलाज के अभाव में थोड़ी देर बाद महिला की मौत हो गई। इसके बाद भी तांत्रिक ने हार नहीं मानी। वह न सिर्फ झाड़-फूंक करता रहा बल्कि घरवालों को भी भरोसा देता रहा कि सुनीता की जान बच जाएगी। इसी उम्मीद में घरवाले उसकी फरमाइश पूरी करते रहे, मगर दो दिन बाद जब शव से बदबू आने लगी तो थक हारकर घरवालों ने दाह संस्कार कर दिया। सूचना मिलने पर पुलिस भी पहुंची थी मगर तब तक दाह संस्कार हो चुका था।
अस्पताल जाते तो बच सकती थी जान
ग्रामीणों की मानें तो सुनीता को सांप काटने के बाद घरवालों को अस्पताल ले जाना चाहिए था। अगर ऐसा किया गया होता तो शायद उसकी जान बच जाती, मगर शरीर में जान रहते हुए भी घर वाले सर्पदंश के बाद तांत्रिक के पास चले गए। इसी चक्कर में सुनीता की मौत हो गई। ग्रामीणों के अनुसार महिला की मौत के बाद भी तांत्रिक झाड़-फूंक के नाम पर परिवार का आर्थिक शोषण करता रहा।
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बिलारी गांव में झाड़-फूंक के चक्कर में एक महिला का शव सड़ गया। सर्पदंश से मौत के बाद तांत्रिक के चक्कर में फंसे घरवालों ने मौत के दो दिन बाद तक झाड़ फूंक कराई। जब महिला के शव से बदबू आने लगी तब जाकर उन्होंने दाह संस्कार किया। क्षेत्र में इस अंधविश्वास की चर्चा है। कई ग्रामीणों ने परिवार को इस बाबत समझाने की भी कोशिश की मगर वे तांत्रिक के सिवाय कुछ भी सुनने को तैयार नहीं थे।
बिलारी गांव के राजकुमार की 25 वर्षीय पत्नी सुनीता की मंगलवार को सर्पदंश से मौत हो गई थी। हालत बिगड़ने पर अस्पताल ले जाने की जगह घरवाले उसे एक तांत्रिक के पास लेकर चले गए। वहां झाड़-फूंक तो शुरू हो गई, लेकिन इलाज के अभाव में थोड़ी देर बाद महिला की मौत हो गई। इसके बाद भी तांत्रिक ने हार नहीं मानी। वह न सिर्फ झाड़-फूंक करता रहा बल्कि घरवालों को भी भरोसा देता रहा कि सुनीता की जान बच जाएगी। इसी उम्मीद में घरवाले उसकी फरमाइश पूरी करते रहे, मगर दो दिन बाद जब शव से बदबू आने लगी तो थक हारकर घरवालों ने दाह संस्कार कर दिया। सूचना मिलने पर पुलिस भी पहुंची थी मगर तब तक दाह संस्कार हो चुका था।
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अस्पताल जाते तो बच सकती थी जान
ग्रामीणों की मानें तो सुनीता को सांप काटने के बाद घरवालों को अस्पताल ले जाना चाहिए था। अगर ऐसा किया गया होता तो शायद उसकी जान बच जाती, मगर शरीर में जान रहते हुए भी घर वाले सर्पदंश के बाद तांत्रिक के पास चले गए। इसी चक्कर में सुनीता की मौत हो गई। ग्रामीणों के अनुसार महिला की मौत के बाद भी तांत्रिक झाड़-फूंक के नाम पर परिवार का आर्थिक शोषण करता रहा।
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