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आयुष्मान भारत योजना: पहले डेढ़ लाख रुपये हुए खर्च फिर मिला योजना का लाभ
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प्रधानमंत्री से मिलेंगी गीता देवी की खबर मेंः आयुष्मान योजना का लाभ लेने वाली गीता देवी
आयुष्मान भारत योजना:
पहले डेढ़ लाख रुपये हुए खर्च फिर मिला योजना का लाभ
- जगदीशपुर की गीता देवी को गोल्डन कार्ड की जानकारी न होने के कारण खर्च करना पड़ा धन
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। आयुष्मान भारत योजना की लाभार्थी होने के बावजूद हृदयरोग से पीड़ित जगदीशपुर की गीता देवी को इसका लाभ तब मिला जब निजी अस्पताल में वह डेढ़ लाख रुपये खर्च कर चुकी थीं। तीन दिन भर्ती रहने के दौरान अस्पताल में उनकी सभी महंगी जांचें वगैरह नकद भुगतान पर की गईं। उन्होंने इसके बाद गोल्डन कार्ड लगाया। इसके बाद उन्हें एंजियोप्लास्टी की मुफ्त सुविधा मिली। गीता देवी को भर्ती के दौरान खर्च किया धन वापस नहीं मिला है।
गीता देवी के पति बनारसी ने बताया कि दिसंबर 2018 में उनके यहां आयुष्मान का गोल्डन कार्ड आ गया था। पांच जनवरी को गीता देवी की तबीयत खराब हुई तो आर्यन हॉस्पिटल लेकर पहुंचे। वहां भर्ती करते ही पचास हजार रुपये नकद जमा करवा लिए गए। तीन दिन में विभिन्न जांच आदि के एक लाख रुपये और जमा कराए गए। अस्पताल मेें आयुष्मान योजना का बोर्ड लगा था। बोर्ड देख कर उन्होंने अस्पताल में अपना गोल्डन कार्ड लगाया।
इसके बाद आठ जनवरी से उनसे कोई पैसा नहीं लिया गया। आठ जनवरी को ही उनके दिल का ऑपरेशन किया गया और 11 जनवरी को छुट्टी दे दी गई। आयुष्मान भारत योजना के नियमानुसार सर्जरी के मरीज को छुट्टी होने पर पंद्रह दिन की दवा मुफ्त देकर भेजा जाता है। बनारसी का आरोप है कि छुट्टी करने के बाद दवा नहीं दी गई। करीब एक हजार रुपये प्रति सप्ताह की दवा बाहर से लिखी गई। वर्तमान में करीब छह सौ रुपये प्रति सप्ताह दवा पर खर्च हो रहे हैं। ये दवा भी सिर्फ संबंधित अस्पताल पर ही मिलती है कहीं और नहीं।
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कोट
यदि मरीज के भर्ती होने के बाद लेकिन सर्जरी से पहले गोल्डन कार्ड लगा दिया गया तो भर्ती और सर्जरी के बीच लिया गया शुल्क वापस करने का प्रावधान है। यदि सर्जरी हो गई है उसके बाद गोल्डन कार्ड लगाया गया तो मरीज को योजना का लाभ नहीं मिलेगा। अस्पताल को पैकेज के आधार पर सर्जरी का भुगतान किया जाता है। पैकेज में भर्ती से लेकर सर्जरी, छुट्टी और पंद्रह दिन की दवा का भुगतान शामिल है।
- डॉ. नीरज कुमार पांडेय, एसीएमओ व नोडल अधिकारी, आयुष्मान भारत योजना
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गीता देवी से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं वसूला गया। अस्पताल में मरीज के भर्ती होते ही उससे किसी योजना के तहत लाभार्थी होने की सूचना फार्म में भरवाई जाती है। यदि गोल्डन कार्ड या बीमा होता है तो लाभार्थी का इलाज उसी आधार पर किया जाता है। जो मरीज किसी योजना या बीमा का लाभार्थी नहीं होता तो उसका नकद में इलाज किया जाता है।
शंभुनाथ सिंह, मुख्य प्रबंधक, आर्यन अस्पताल
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पहले डेढ़ लाख रुपये हुए खर्च फिर मिला योजना का लाभ
- जगदीशपुर की गीता देवी को गोल्डन कार्ड की जानकारी न होने के कारण खर्च करना पड़ा धन
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। आयुष्मान भारत योजना की लाभार्थी होने के बावजूद हृदयरोग से पीड़ित जगदीशपुर की गीता देवी को इसका लाभ तब मिला जब निजी अस्पताल में वह डेढ़ लाख रुपये खर्च कर चुकी थीं। तीन दिन भर्ती रहने के दौरान अस्पताल में उनकी सभी महंगी जांचें वगैरह नकद भुगतान पर की गईं। उन्होंने इसके बाद गोल्डन कार्ड लगाया। इसके बाद उन्हें एंजियोप्लास्टी की मुफ्त सुविधा मिली। गीता देवी को भर्ती के दौरान खर्च किया धन वापस नहीं मिला है।
गीता देवी के पति बनारसी ने बताया कि दिसंबर 2018 में उनके यहां आयुष्मान का गोल्डन कार्ड आ गया था। पांच जनवरी को गीता देवी की तबीयत खराब हुई तो आर्यन हॉस्पिटल लेकर पहुंचे। वहां भर्ती करते ही पचास हजार रुपये नकद जमा करवा लिए गए। तीन दिन में विभिन्न जांच आदि के एक लाख रुपये और जमा कराए गए। अस्पताल मेें आयुष्मान योजना का बोर्ड लगा था। बोर्ड देख कर उन्होंने अस्पताल में अपना गोल्डन कार्ड लगाया।
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इसके बाद आठ जनवरी से उनसे कोई पैसा नहीं लिया गया। आठ जनवरी को ही उनके दिल का ऑपरेशन किया गया और 11 जनवरी को छुट्टी दे दी गई। आयुष्मान भारत योजना के नियमानुसार सर्जरी के मरीज को छुट्टी होने पर पंद्रह दिन की दवा मुफ्त देकर भेजा जाता है। बनारसी का आरोप है कि छुट्टी करने के बाद दवा नहीं दी गई। करीब एक हजार रुपये प्रति सप्ताह की दवा बाहर से लिखी गई। वर्तमान में करीब छह सौ रुपये प्रति सप्ताह दवा पर खर्च हो रहे हैं। ये दवा भी सिर्फ संबंधित अस्पताल पर ही मिलती है कहीं और नहीं।
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यदि मरीज के भर्ती होने के बाद लेकिन सर्जरी से पहले गोल्डन कार्ड लगा दिया गया तो भर्ती और सर्जरी के बीच लिया गया शुल्क वापस करने का प्रावधान है। यदि सर्जरी हो गई है उसके बाद गोल्डन कार्ड लगाया गया तो मरीज को योजना का लाभ नहीं मिलेगा। अस्पताल को पैकेज के आधार पर सर्जरी का भुगतान किया जाता है। पैकेज में भर्ती से लेकर सर्जरी, छुट्टी और पंद्रह दिन की दवा का भुगतान शामिल है।
- डॉ. नीरज कुमार पांडेय, एसीएमओ व नोडल अधिकारी, आयुष्मान भारत योजना
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गीता देवी से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं वसूला गया। अस्पताल में मरीज के भर्ती होते ही उससे किसी योजना के तहत लाभार्थी होने की सूचना फार्म में भरवाई जाती है। यदि गोल्डन कार्ड या बीमा होता है तो लाभार्थी का इलाज उसी आधार पर किया जाता है। जो मरीज किसी योजना या बीमा का लाभार्थी नहीं होता तो उसका नकद में इलाज किया जाता है।
शंभुनाथ सिंह, मुख्य प्रबंधक, आर्यन अस्पताल