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Gonda News: बाढ़ के कहर में फंसी परिवार की फिक्र
Sun, 10 Aug 2025 11:34 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Sun, 10 Aug 2025 11:34 PM IST
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नवाबगंज के ब्योंदा माझा गांव में बाढ़ के पानी से निकलते ग्रामीण। - संवाद
गोंडा। विकट बाढ़ की करुण कहानी, नदियों का संत्रास लिखा है... चंद लाइनों से बाढ़ की भयावह तस्वीर जनकवि रामनाथ सिंह अदम गोंडवी ने कई साल पहले अपनी कविता में बयां की थी। वक्त बदला, परिवेश बदला, लेकिन जिले के करनैलगंज व तरबगंज तहसील के लोगों की मुश्किलें नहीं कम हो सकीं। नेपाल से पानी आते ही सरयू का कहर शुरू हो जाता है। वैसे अब जलस्तर कम होने लगा है। इसके बाद भी बाढ़ प्रभावित इलाकों की दुश्वारियां कम नहीं हो रही हैं। किसी को बाढ़ में फंसे परिजनों की सुरक्षा की चिंता है तो किसी को बच्चों की पढ़ाई व सेहत की। इन सबके बीच एक-दो नहीं, कई गांवों के रास्ते कट गए हैं, जिनसे जान जोखिम में डालकर लोग आवागमन करने को विवश हैं। पेश है नंदलाल तिवारी व समरपाल यादव की रिपोर्ट...
दृश्य एक- बच्चों को बना दिया नाव का खेवइया
वक्त करीब 8.30 बजे। ब्योंदा माझा गांव पूरी तरह से बाढ़ की चपेट में है। यहां के 15 मजरे बाढ़ की विभीषिका से जूझ रहे हैं। प्रशासन ने एक स्टीमर व 14 नाव लगा रखी हैं। स्टीमर से खुद प्रधान केशवराम यादव बाढ़ पीड़ितों की मदद करने में जुटे हैं। वहीं, अन्य पुरवों में लगी नाव को गांव के बच्चे चला रहे हैं। 14 वर्षीय अखिलेश यादव से जब पूछा गया कि नाव चलाना कहां से सीखा तो वह मुस्कुराते हुए बोला, यहीं बाढ़ में सीखा। कई अन्य बच्चे अलग-अलग नाव से लोगों को लाते-ले जाते दिखे। नाव पर कितने लोगों को बैठाया जा सकता है, यह उन्हें नहीं पता है।
दृश्य दो- रास्ता कट गया, किसी को फिक्र नहीं
सुबह 10.10 बजे। दत्तनगर के शिवकुमार यादव ने बताया कि गांव जाने वाली सड़क कट गई है। इससे होकर लोग आने-जाने को विवश हैं। ऐसे में लोग कई बार गिरकर चोटिल हो चुके हैं। न तो कोई सहायता मिली और न ही अन्य प्रबंध किए गए। पवन कुमार यादव का कहना है कि चारों तरफ पानी ही पानी है, आने-जाने के लिए रास्ता तक बंद है। कोई देखने तक नहीं आया।
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आधा परिवार पानी में फंसा
सुबह 10.40 बजे। साकीपुर गांव के शेष कुमार ने बताया कि करीब एक किलाेमीटर दूर उनका घर है। आधा परिवार बाढ़ में फंसा है, आधा परिवार यहां सुरक्षित स्थान पर है। शेष कुमार का कहना है कि मदद के नाम पर सिर्फ एक नाव मिली है। रामकुमार का कहना है कि एक नाव आने-जाने के लिए मिली है। बाढ़ के कारण बच्चों की पढ़ाई लिखाई बंद है। सुशीला देवी का कहना है कि कटान चल रहा है। अब तक दो घर कट चुके हैं।
प्रभावित इलाकों पर प्रशासन की नजर
नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 56 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया था। इससे 18 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। वर्तमान में नदी स्थिर है। जलस्तर काफी कम हुआ है। अब नदी खतरे के निशान से 30 सेमी ऊपर है। प्रभावित इलाकों में पीड़ितों को राहत सामग्री पहुंचाने के लिए प्रशासन पूरी तरह से प्रयासरत है। टीमें लगी हुई हैं। हर स्तर पर निगरानी की जा रही है।
- प्रियंका निरंजन, डीएम
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दृश्य एक- बच्चों को बना दिया नाव का खेवइया
वक्त करीब 8.30 बजे। ब्योंदा माझा गांव पूरी तरह से बाढ़ की चपेट में है। यहां के 15 मजरे बाढ़ की विभीषिका से जूझ रहे हैं। प्रशासन ने एक स्टीमर व 14 नाव लगा रखी हैं। स्टीमर से खुद प्रधान केशवराम यादव बाढ़ पीड़ितों की मदद करने में जुटे हैं। वहीं, अन्य पुरवों में लगी नाव को गांव के बच्चे चला रहे हैं। 14 वर्षीय अखिलेश यादव से जब पूछा गया कि नाव चलाना कहां से सीखा तो वह मुस्कुराते हुए बोला, यहीं बाढ़ में सीखा। कई अन्य बच्चे अलग-अलग नाव से लोगों को लाते-ले जाते दिखे। नाव पर कितने लोगों को बैठाया जा सकता है, यह उन्हें नहीं पता है।
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दृश्य दो- रास्ता कट गया, किसी को फिक्र नहीं
सुबह 10.10 बजे। दत्तनगर के शिवकुमार यादव ने बताया कि गांव जाने वाली सड़क कट गई है। इससे होकर लोग आने-जाने को विवश हैं। ऐसे में लोग कई बार गिरकर चोटिल हो चुके हैं। न तो कोई सहायता मिली और न ही अन्य प्रबंध किए गए। पवन कुमार यादव का कहना है कि चारों तरफ पानी ही पानी है, आने-जाने के लिए रास्ता तक बंद है। कोई देखने तक नहीं आया।
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आधा परिवार पानी में फंसा
सुबह 10.40 बजे। साकीपुर गांव के शेष कुमार ने बताया कि करीब एक किलाेमीटर दूर उनका घर है। आधा परिवार बाढ़ में फंसा है, आधा परिवार यहां सुरक्षित स्थान पर है। शेष कुमार का कहना है कि मदद के नाम पर सिर्फ एक नाव मिली है। रामकुमार का कहना है कि एक नाव आने-जाने के लिए मिली है। बाढ़ के कारण बच्चों की पढ़ाई लिखाई बंद है। सुशीला देवी का कहना है कि कटान चल रहा है। अब तक दो घर कट चुके हैं।
प्रभावित इलाकों पर प्रशासन की नजर
नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 56 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया था। इससे 18 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। वर्तमान में नदी स्थिर है। जलस्तर काफी कम हुआ है। अब नदी खतरे के निशान से 30 सेमी ऊपर है। प्रभावित इलाकों में पीड़ितों को राहत सामग्री पहुंचाने के लिए प्रशासन पूरी तरह से प्रयासरत है। टीमें लगी हुई हैं। हर स्तर पर निगरानी की जा रही है।
- प्रियंका निरंजन, डीएम