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Gonda News: सिरके के कारोबार से खुले समृद्धि के द्वार
Sat, 01 Mar 2025 12:01 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Sat, 01 Mar 2025 12:01 AM IST
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गोंडा। शहर ही नहीं गांवों में भी महिलाएं भी स्वावलंबन की राह पर चलकर आर्थिक तरक्की की ओर अग्रसर हो रही हैं। वजीरगंज के रायपुर निवासी स्नातक उत्तीर्ण कुसुम मौर्य के घर का बना आर्गेनिक सिरका आसपास के पांच जिलों में महक रहा है। इससे उन्हें प्रति वर्ष औसतन चार लाख रुपये का मुनाफा हो रहा है।
वजीरगंज के रायपुर निवासी शिवकुमार मौर्य की पत्नी कुसुम पहले तो अन्य ग्रामीण महिलाओं की तरह चूल्हा-चौका को ही अपना कॅरिअर मान बैठी थीं, लेकिन एक बार उनके पति ने गन्ना मूल्य भुगतान को लेकर हो रही समस्याओं के बारे में बताया। तब कुसुम के मन में विचार आया कि गन्ने का उपयोग खुद करके अपना बिजनेस शुरू किया जाए। कुसुम ने बताया कि उनकी दादी सिरका बनाती थीं, उसी से प्रेरणा लेकर गन्ने का सिरका बनाकर बेचना शुरू कर दिया। पहले गांव के आसपास ही बिक्री होती थी, लेकिन मांग बढ़ती देख उन्होंने स्वयं सहायता समूह बनाकर अन्य महिलाओं को भी जोड़ लिया। अब अच्छी पैकेजिंग के साथ आसपास के कई जिलों में कुसुम का सिरका महक रहा है।
ऐसे तैयार करती हैं सिरका
कुसुम ने बताया कि सबसे पहले खेत से गन्ना काटकर लाया जाता है। घर में लगे कोल्हू से उसका रस निकाला जाता है। इसका रस को दो से तीन माह के लिए रख दिया जाता है। इससे गन्ने का रस सिरका बन जाता है। कुसुम के अनुसार गन्ने का सिरका सेहत के लिए फायदेमंद होता है। इससे पेट की कई बीमारियां दूर होती हैं। कुसुम दो प्रकार से सिरके की बिक्री करती हैं। पहला सादा सिरका पानी की बोतल में पैक कर 100 रुपये प्रति लीटर की दर से बेचती हैं। दूसरा सिरका आम, करौंदा, कटहल, लहसुन, पपीता आदि डालकर 140 रुपये प्रति लीटर की दूर से बेचती हैं। ये सिरका लोग काफी पसंद करते हैं। कुसुम ने बताया कि उनके साथ 10 महिलाएं भी जुड़ी हैं। उनका सिरका गोंडा, बलरामपुर, अयोध्या, बस्ती, सुल्तानपुर व सिद्धार्थनगर जिले में भी बिकता है। दुकानदार उनके घर से खरीदकर ले जाते हैं। ऑनलाइन भी बिक्री होता है।
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वजीरगंज के रायपुर निवासी शिवकुमार मौर्य की पत्नी कुसुम पहले तो अन्य ग्रामीण महिलाओं की तरह चूल्हा-चौका को ही अपना कॅरिअर मान बैठी थीं, लेकिन एक बार उनके पति ने गन्ना मूल्य भुगतान को लेकर हो रही समस्याओं के बारे में बताया। तब कुसुम के मन में विचार आया कि गन्ने का उपयोग खुद करके अपना बिजनेस शुरू किया जाए। कुसुम ने बताया कि उनकी दादी सिरका बनाती थीं, उसी से प्रेरणा लेकर गन्ने का सिरका बनाकर बेचना शुरू कर दिया। पहले गांव के आसपास ही बिक्री होती थी, लेकिन मांग बढ़ती देख उन्होंने स्वयं सहायता समूह बनाकर अन्य महिलाओं को भी जोड़ लिया। अब अच्छी पैकेजिंग के साथ आसपास के कई जिलों में कुसुम का सिरका महक रहा है।
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ऐसे तैयार करती हैं सिरका
कुसुम ने बताया कि सबसे पहले खेत से गन्ना काटकर लाया जाता है। घर में लगे कोल्हू से उसका रस निकाला जाता है। इसका रस को दो से तीन माह के लिए रख दिया जाता है। इससे गन्ने का रस सिरका बन जाता है। कुसुम के अनुसार गन्ने का सिरका सेहत के लिए फायदेमंद होता है। इससे पेट की कई बीमारियां दूर होती हैं। कुसुम दो प्रकार से सिरके की बिक्री करती हैं। पहला सादा सिरका पानी की बोतल में पैक कर 100 रुपये प्रति लीटर की दर से बेचती हैं। दूसरा सिरका आम, करौंदा, कटहल, लहसुन, पपीता आदि डालकर 140 रुपये प्रति लीटर की दूर से बेचती हैं। ये सिरका लोग काफी पसंद करते हैं। कुसुम ने बताया कि उनके साथ 10 महिलाएं भी जुड़ी हैं। उनका सिरका गोंडा, बलरामपुर, अयोध्या, बस्ती, सुल्तानपुर व सिद्धार्थनगर जिले में भी बिकता है। दुकानदार उनके घर से खरीदकर ले जाते हैं। ऑनलाइन भी बिक्री होता है।
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