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ग्रामीणों ने चंदा लगाकर शुरू कर दिया पुल निर्माण
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गोंडा के जरही नदी पर ग्रामीण चंदे के पैसे से बनवा रहे पुल।
- फोटो : GONDA
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नवाबगंज (गोंडा)। अपनी व अपने लोगों की सुख सुविधा का ध्यान यदि हर कोई करना शुरू कर दे तो समस्याएं अपने आप हट जाएंगी। जिले के जरही नदी के दोनों तरफ रहने वाली करीब 50 हजार की आबादी ने अपने लिए रास्ता मुकम्मल करना शुरू कर दिया। नवाबगंज के जरही नदी पर पुल न होने के कारण लोगों को नदी पार कर या फिर नाव से आर-पार होना पड़ता था। सरकारों से मांग होती रही पर पुल निर्माण की मंशा न पूरी होने पर ग्रामीणों ने चंदा लगाकर नदी पर पुल निर्माण का कार्य शुरू कर दिया। इससे माझा क्षेत्र में आने जाने वालों के लिए रास्ता सुगम हो सकेगा।
क्षेत्र के जैतपुर माझा, तुलसीपुर मझा व माझाराठ की सीमा पर बह रही जरही नदी जो आगे चलकर सरयू नदी में मिल जाती है। इस नदी के दोनों तरफ करीब पचास हजार की आबादी के लिए एक मात्रा रास्ता नदी का रास्ता ही है। नवाबगंज से इस रास्ते से लोग माझाराठ, दुर्गागंज पश्चिमी, कला गांव जाने का रास्ता है। इस पार के गांव तुलसीपुर माझा व जैतपुर माझा है। लोग जरही नदी को पार कर खेती किसानी व शादी ब्याह का कार्यक्रम करते हैं। इन चार गांवों को मिलाकर करीब पचास हजार की आबादी जरही नदी के दोनों तरफ बसती है।
इसी रास्ते माझाराठ कला गांव के बच्चे पढ़ने के लिए डोंगी नाव का सहारा लेते हैं। ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों से तमाम बार मांग की पर कोई सुनवाई ना होता देख इन गांव के लोगों ने आपस में मिलकर चंदा लगाया। चंदे के पैसे से आठ पीपे खरीदे और नदी की धारा में डाल कर ग्रामीण पुल का निर्माण कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सभी पीपे डाल दिए गए हैं। दस दिन से काम चल रहा है।
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गांव के सभी लोग सहयोग कर रहे हैं। दो दिन और लगेंगे कच्चा पुल बनकर तैयार हो जाएगा। माझाराठ गांव के जगपाल पहलवान ने बताया कि हमारे गांव के लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए नवाबगंज रोज जाना पड़ता है। इस जरही पार कर जाने पर करीब दस किलोमीटर का रास्ता कम पड़ता है। दस किलोमीटर की बचत के चक्कर में लोग इसी रास्ते जाते हैं। समय की बचत के लिए हम लोगों ने चंदा लगाकर पुल बनाने का निर्णय लिया है।
इसी गांव के पूर्व प्रधान घसियारे ने बताया कि इस जगह पर पुल पास था पर अभी तक बना नहीं है। लोगों के आवागमन को सुगम बनाने के लिए हम लोग पुल बना रहे है। कला गांव निवासी गंगाराम दाढ़ी ने बताया कि उनका गांव उपेक्षित है। यह एकमात्र रास्ता हमारे गांव के विकास का रास्ता है। इस पर पक्का पुल बनने तक हम लोग चंदा लगाकर पुल बना रहे हैं। कला गांव के ही किशुनदेव निषाद ने बताया कि पुल बनाना मजबूरी है पुल लोगों की इम जरूरतों को पूरा करने में साधक हैं। पुल बनाने में उदयराज, चूरचंद, गंगाराम, विजयी, रामकुमार सिंह, मुल्हुर यादव, सूर्यकुमार, छट्ठी, रंगीलाल निषाद, घिर्राउ निषाद, बासुदेव यादव, बब्बन यादव, मिल्लू यादव, गणेश गौतम, जगन गौतम, फूलचंद, नान्हू लाल, बच्चु, मिलन यादव, भीम निषाद पिछले दस दिनों से पुल निर्माण मे दिनरात मेहनत कर रहे है। इन लोगों को आशा है कि इस कच्चा पुल के बन जाने से भविष्य मे पक्का पुल जरूर मिलेगा।
ग्रामीणों द्वारा जरही नदी पर पुल का निर्माण किया जा रहा है इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। मंगलवार को टीम भेजकर जानकारी की जाएगी और पुल निर्माण संबंधी कोई अन्य आदेश है तो उसे भी देखवाया जाएगा। -राजेश कुमार, एसडीएम तरबगंज
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क्षेत्र के जैतपुर माझा, तुलसीपुर मझा व माझाराठ की सीमा पर बह रही जरही नदी जो आगे चलकर सरयू नदी में मिल जाती है। इस नदी के दोनों तरफ करीब पचास हजार की आबादी के लिए एक मात्रा रास्ता नदी का रास्ता ही है। नवाबगंज से इस रास्ते से लोग माझाराठ, दुर्गागंज पश्चिमी, कला गांव जाने का रास्ता है। इस पार के गांव तुलसीपुर माझा व जैतपुर माझा है। लोग जरही नदी को पार कर खेती किसानी व शादी ब्याह का कार्यक्रम करते हैं। इन चार गांवों को मिलाकर करीब पचास हजार की आबादी जरही नदी के दोनों तरफ बसती है।
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इसी रास्ते माझाराठ कला गांव के बच्चे पढ़ने के लिए डोंगी नाव का सहारा लेते हैं। ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों से तमाम बार मांग की पर कोई सुनवाई ना होता देख इन गांव के लोगों ने आपस में मिलकर चंदा लगाया। चंदे के पैसे से आठ पीपे खरीदे और नदी की धारा में डाल कर ग्रामीण पुल का निर्माण कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सभी पीपे डाल दिए गए हैं। दस दिन से काम चल रहा है।
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गांव के सभी लोग सहयोग कर रहे हैं। दो दिन और लगेंगे कच्चा पुल बनकर तैयार हो जाएगा। माझाराठ गांव के जगपाल पहलवान ने बताया कि हमारे गांव के लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए नवाबगंज रोज जाना पड़ता है। इस जरही पार कर जाने पर करीब दस किलोमीटर का रास्ता कम पड़ता है। दस किलोमीटर की बचत के चक्कर में लोग इसी रास्ते जाते हैं। समय की बचत के लिए हम लोगों ने चंदा लगाकर पुल बनाने का निर्णय लिया है।
इसी गांव के पूर्व प्रधान घसियारे ने बताया कि इस जगह पर पुल पास था पर अभी तक बना नहीं है। लोगों के आवागमन को सुगम बनाने के लिए हम लोग पुल बना रहे है। कला गांव निवासी गंगाराम दाढ़ी ने बताया कि उनका गांव उपेक्षित है। यह एकमात्र रास्ता हमारे गांव के विकास का रास्ता है। इस पर पक्का पुल बनने तक हम लोग चंदा लगाकर पुल बना रहे हैं। कला गांव के ही किशुनदेव निषाद ने बताया कि पुल बनाना मजबूरी है पुल लोगों की इम जरूरतों को पूरा करने में साधक हैं। पुल बनाने में उदयराज, चूरचंद, गंगाराम, विजयी, रामकुमार सिंह, मुल्हुर यादव, सूर्यकुमार, छट्ठी, रंगीलाल निषाद, घिर्राउ निषाद, बासुदेव यादव, बब्बन यादव, मिल्लू यादव, गणेश गौतम, जगन गौतम, फूलचंद, नान्हू लाल, बच्चु, मिलन यादव, भीम निषाद पिछले दस दिनों से पुल निर्माण मे दिनरात मेहनत कर रहे है। इन लोगों को आशा है कि इस कच्चा पुल के बन जाने से भविष्य मे पक्का पुल जरूर मिलेगा।
ग्रामीणों द्वारा जरही नदी पर पुल का निर्माण किया जा रहा है इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। मंगलवार को टीम भेजकर जानकारी की जाएगी और पुल निर्माण संबंधी कोई अन्य आदेश है तो उसे भी देखवाया जाएगा। -राजेश कुमार, एसडीएम तरबगंज