{"_id":"61646c2f8ebc3e8746051da9","slug":"two-new-dengue-patients-the-number-of-fever-victims-also-increased-gonda-news-lko5996622167","type":"story","status":"publish","title_hn":"डेंगू के दो नए मरीज मिलें, जिला अस्पताल में वायरल बुुखार के मरीजों का लगा तांता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
डेंगू के दो नए मरीज मिलें, जिला अस्पताल में वायरल बुुखार के मरीजों का लगा तांता
विज्ञापन
गोंडा। जिले में डेेंगू व अन्य मच्छरजनित बीमारियों का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसके चलते ही सोमवार को दो नए मरीजों में डेेगू की पुष्टि के साथ डेंगू पीड़ितों की संख्या 44 तक पहुंच गयी। इसे देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने शहरी व ग्रामीण इलाकों में अलर्ट भी जारी किया है। जिला अस्पताल के वार्ड वायरल, डेंगू व मलेरिया मरीजों से लगभग फुल हो गए हैं।
ग्रामीण इलाकों में भी झोला छाप के यहां मरीजों का तांता लगा है। प्राइवेट अस्पतालों व चिकित्सकों के यहां बड़ी संख्या में बुखार पीड़ित मरीजों का इलाज चल रहा है। जिला अस्पताल के चिकित्सक डॉ समीर गुप्ता ने बताया कि डेंगू के शुरुआती लक्षण फ्लू की तरह होते हैं, जिसके कारण अक्सर लोग इसे पहचान नहीं पाते हैं।
आमतौर पर संक्रमित मच्छर के काटने के चार से 10 दिनों के बाद इसके लक्षण दिखने लगते हैं। डेंगू में तेज बुखार होता है, समय के साथ इसके लक्षण धीरे-धीरे बढ़ते जाते हैं।
विज्ञापन
डेंगू में लोगों को सिरदर्द मांसपेशियों, हड्डी या जोड़ों में दर्द, मतली- उल्टी आना, पेट की खराबी, आंखों के पीछे वाले हिस्से में दर्द, त्वचा पर चकत्ते या लाल रंग के दाने निकलना। डेंगू के शिकार ज्यादातर लोग एक या दो सप्ताह के भीतर ठीक हो जाते हैं। कुछ मामलों में गंभीर लक्षणों की स्थिति और समय पर इलाज न मिल पाने के कारण यह जानलेवा भी हो सकती है।
जिले के अधिकांश प्राथमिक स्वास्थ्य केद्रों पर समय से कोई डॉक्टर या मेडिकल स्टाफ नहीं मिलता। जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को छोलाछाप डॉक्टरों के सहारे अपना इलाज कराना पड़ता है। झोलाछाप डाक्टर बिना जांच किए मरीजों को तख्त पर लिटाकर बोतल चढ़ा देते हैं। प्राइवेट अस्पतालों और प्राइवेट डॉक्टरों के यहां भी मरीजों की लंबी-लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं।
विज्ञापन
ग्रामीण इलाकों में भी झोला छाप के यहां मरीजों का तांता लगा है। प्राइवेट अस्पतालों व चिकित्सकों के यहां बड़ी संख्या में बुखार पीड़ित मरीजों का इलाज चल रहा है। जिला अस्पताल के चिकित्सक डॉ समीर गुप्ता ने बताया कि डेंगू के शुरुआती लक्षण फ्लू की तरह होते हैं, जिसके कारण अक्सर लोग इसे पहचान नहीं पाते हैं।
विज्ञापन
आमतौर पर संक्रमित मच्छर के काटने के चार से 10 दिनों के बाद इसके लक्षण दिखने लगते हैं। डेंगू में तेज बुखार होता है, समय के साथ इसके लक्षण धीरे-धीरे बढ़ते जाते हैं।
विज्ञापन
डेंगू में लोगों को सिरदर्द मांसपेशियों, हड्डी या जोड़ों में दर्द, मतली- उल्टी आना, पेट की खराबी, आंखों के पीछे वाले हिस्से में दर्द, त्वचा पर चकत्ते या लाल रंग के दाने निकलना। डेंगू के शिकार ज्यादातर लोग एक या दो सप्ताह के भीतर ठीक हो जाते हैं। कुछ मामलों में गंभीर लक्षणों की स्थिति और समय पर इलाज न मिल पाने के कारण यह जानलेवा भी हो सकती है।
जिले के अधिकांश प्राथमिक स्वास्थ्य केद्रों पर समय से कोई डॉक्टर या मेडिकल स्टाफ नहीं मिलता। जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को छोलाछाप डॉक्टरों के सहारे अपना इलाज कराना पड़ता है। झोलाछाप डाक्टर बिना जांच किए मरीजों को तख्त पर लिटाकर बोतल चढ़ा देते हैं। प्राइवेट अस्पतालों और प्राइवेट डॉक्टरों के यहां भी मरीजों की लंबी-लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं।