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गोरखपुर इंटरसिटी में लावारिस मिले दो बच्चे
गोंडा/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 22 Feb 2016 11:29 PM IST
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लखनऊ से गोरखपुर जा रही इंटरसिटी एक्सप्रेस में रविवार की रात आरपीएफ को दो लावारिस बच्चे मिले। आरपीएफ को यह दोनों बच्चे ट्रेन के गोंडा पहुंचने पर जनरल बोगी में मिले, जिसमें एक बच्चे की उम्र डेढ़ साल तो दूसरे की तीन साल बताई जा रही है। रात भर अपनी निगरानी में रखने के बाद सोमवार सुबह आरपीएफ ने दोनों बच्चों को चाइल्ड लाइन भेज दिया।
रविवार की शाम चार बजे लखनऊ से गोरखपुर के लिए चली इंटरसिटी एक्सप्रेस शाम को आठ बजे जैसे ही गोंडा रेलवे स्टेशन पहुंची, तभी ट्रेन की जनरल बोगी में यात्रियों को दो बच्चे रोते दिखाई दिए।
यात्रियों ने जब उनसे मां-बाप के बारे में पूछा तो बच्चे कोई जवाब नहीं दे सके। इसकी सूचना यात्रियों ने ट्रेन के गार्ड को दी। इस पर उसने यही मैसेज आरपीएफ को फारवर्ड कर दिया। इसके बाद मौके पर पहुंचे आरपीएफ इंस्पेक्टर एमके खां ने ट्रेन की जनरल बोगी और उसके आसपास की दो बोगियों में जवानों के मार्फत बच्चों के मां-बाप का पता लगाने की भी कोशिश की, लेकिन उनका कोई वारिस नहीं मिला।
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इसके बाद आरपीएफ दोनों बच्चों को कोतवाली ले आई। पूछताछ में बड़े बच्चे ने अपना नाम आदर्श व छोटे का नाम रणवीर बताया है। साथ ही पूछताछ में बड़े बच्चे के मुताबिक उसके पिता का नाम रमेश है, जो बस्ती का रहने वाला है। उनका कहना है कि बड़े बच्चे से मिले नाम-पते के आधार पर वह उसका पता लगवा रहे हैं।
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रविवार की शाम चार बजे लखनऊ से गोरखपुर के लिए चली इंटरसिटी एक्सप्रेस शाम को आठ बजे जैसे ही गोंडा रेलवे स्टेशन पहुंची, तभी ट्रेन की जनरल बोगी में यात्रियों को दो बच्चे रोते दिखाई दिए।
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यात्रियों ने जब उनसे मां-बाप के बारे में पूछा तो बच्चे कोई जवाब नहीं दे सके। इसकी सूचना यात्रियों ने ट्रेन के गार्ड को दी। इस पर उसने यही मैसेज आरपीएफ को फारवर्ड कर दिया। इसके बाद मौके पर पहुंचे आरपीएफ इंस्पेक्टर एमके खां ने ट्रेन की जनरल बोगी और उसके आसपास की दो बोगियों में जवानों के मार्फत बच्चों के मां-बाप का पता लगाने की भी कोशिश की, लेकिन उनका कोई वारिस नहीं मिला।
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इसके बाद आरपीएफ दोनों बच्चों को कोतवाली ले आई। पूछताछ में बड़े बच्चे ने अपना नाम आदर्श व छोटे का नाम रणवीर बताया है। साथ ही पूछताछ में बड़े बच्चे के मुताबिक उसके पिता का नाम रमेश है, जो बस्ती का रहने वाला है। उनका कहना है कि बड़े बच्चे से मिले नाम-पते के आधार पर वह उसका पता लगवा रहे हैं।