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तीन तलाक की घटनाएं कम मगर दुष्प्रचार ज्यादा
अमर उजाला/गोंडा
Updated Fri, 28 Apr 2017 11:41 PM IST
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बात करते पसर्नल ला बाोर्ड के सदस्य
- फोटो : अमर उजाला
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जमाते इस्लामी हिंद के सेक्रेटरी व मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के सदस्य इकबाल मुल्ला का कहना है कि मुल्क में तीन तलाक के मामले नाममात्र हैं, लेकिन कुछ लोगों की ओर से साजिशन दुष्प्रचार ज्यादा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग आधी अधूरी जानकारी से मुस्लिम समाज व शरीयत को बदनाम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोगों के भ्रम को दूर करने के लिए मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड 23 अप्रैल से सात मई तक विशेष अभियान चलाएगा।
मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के सदस्य इकबाल मुल्ला बोर्ड की ओर से 23 अप्रैल से शुरू किए जा रहे शरई मामलों के प्रति जागरूकता अभियान की तैयारियों की समीक्षा करने शुक्रवार को गोंडा आए थे।
उन्होंने मीडिया से कहा कि शरीयत के हिसाब से बना कानून हिदायते इलाही की बुनियाद पर है। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को लगता है कि मुस्लिम समाज में बड़ी बुराई है, जबकि महिलाओं के हक व उनकी अन्य समस्याओं पर अब कोई काम करना बाकी नहीं रह गया है।
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उन्होंने कहा कि मुस्लिमों को मुल्क में फंडामेटल राइट्स के तहत शरीयत के हिसाब से जिंदगी जीने का अधिकार है, लेकिन हुकूमत सिविल कोड लागू करने पर उतारू है। मुल्क में 24 साल तक महिलाओं को को मुफ्त तालीम देने की व्यवस्था है, लेकिन कितनी ख्वातीनों को मुफ्त तालीम दी जा रही है। बच्चे मजदूरी कर रहे हैं।
सरकार लोगों को बदलने का काम करने के बजाय कानून बदलने की बात कर रही है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज के अलावा सभी लोगों को शरीयत के कानून व तीन तलाक के मसले पर जागरूक किया जाएगा। तीन तलाक गुनाह है।
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मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के सदस्य इकबाल मुल्ला बोर्ड की ओर से 23 अप्रैल से शुरू किए जा रहे शरई मामलों के प्रति जागरूकता अभियान की तैयारियों की समीक्षा करने शुक्रवार को गोंडा आए थे।
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उन्होंने मीडिया से कहा कि शरीयत के हिसाब से बना कानून हिदायते इलाही की बुनियाद पर है। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को लगता है कि मुस्लिम समाज में बड़ी बुराई है, जबकि महिलाओं के हक व उनकी अन्य समस्याओं पर अब कोई काम करना बाकी नहीं रह गया है।
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उन्होंने कहा कि मुस्लिमों को मुल्क में फंडामेटल राइट्स के तहत शरीयत के हिसाब से जिंदगी जीने का अधिकार है, लेकिन हुकूमत सिविल कोड लागू करने पर उतारू है। मुल्क में 24 साल तक महिलाओं को को मुफ्त तालीम देने की व्यवस्था है, लेकिन कितनी ख्वातीनों को मुफ्त तालीम दी जा रही है। बच्चे मजदूरी कर रहे हैं।
सरकार लोगों को बदलने का काम करने के बजाय कानून बदलने की बात कर रही है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज के अलावा सभी लोगों को शरीयत के कानून व तीन तलाक के मसले पर जागरूक किया जाएगा। तीन तलाक गुनाह है।