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इस बार फसल संग खेत भी बर्बाद कर गई बाढ़

Thu, 03 Sep 2020 09:51 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 03 Sep 2020 09:51 PM IST
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This time the fields were also destroyed along with crops due to flood
गोंडा में करनैलगंज के नकहरा गांव में बाढ़ के पानी में डूबा घर व फसल। - फोटो : GONDA
गोंडा। किसान भले ही हमारे अन्नदाता हैं, लेकिन जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के किसान इस समय दाने-दाने को मोहताज हैं। करनैलगंज के नकहरा और तरबगंज के ऐली परसौली गांव में बाढ़ के कहर से किसानों की कमर टूट गई है। एक हजार से अधिक किसानों को बाढ़ से नुकसान हुआ है। फिलहाल प्रशासन की ही मानें तो 2057 हेक्टेयर फसल बाढ़ से बबार्द हो गई है। फिर भी अभी तक किसानों को नुकसान के एवज में मदद नहीं मिल सकी है। यही नहीं अभी भी इन गांवों के किसानों के खेत बाढ़ के दायरे में हैं और आगे की फसल का भी उन्हें नुकसान उठाना पड़ सकता है। बाढ़ से हुए नुकसान की समीक्षा के लिए दोनों तहसीलों के अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी जा रही है, बस मदद नहीं पहुंच पा रही है।
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इस बार बाढ़ के दायरे में ज्यादा गांव तो नहीं आए, लेकिन किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ा है। उनकी धान की फसलें बर्बाद हो गई हैं। जिले में सिर्फ बाढ़ से 2057 हेक्टेेयर फसलें बर्बाद हो गई हैं। जिसमें लगातार बारिश होने से भी फसलों का नुकसान भी शामिल है। इस बार बारिश बड़े पैमाने पर हुई है, सिर्फ 17 जून को 1742 मिली वर्षा होने का रिकॉर्ड शामिल है। फसलों के नुकसान पर अभी एक फूटी कौड़ी भी किसानों को नहीं मिल सकी है, किसानों का दर्द यह है कि जिस तरह खेत बाढ़ के पानी में डूूबे हैं उससे अगली फसल का भी नुकसान उठाना ही है।
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अभी इसी नुकसान पर कुछ नहीं मिल रहा है तो आगे की फसल का क्या होगा। किसानों के नुकसान का सत्यापन कराने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए गया है। इससे आगे कोई काम नहीं बढ़ रहा है। नकहरा के किसान कृष्ण कुमार कहते हैं कि उम्मीद लगाए हैं कि मदद मिल जाए। इसी तरह वहां किसान नेता शिवाकांत कहते हैं कि किसानों को समय से नुकसान पर आर्थिक मदद मिल जाती तो आगे की तैयारी किसान कर सकते थे। अभी जांच होने की बात सुनी जा रही है। इस तरह किसान दोहरी समस्या से जूझ रहे हैं।
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किसानों में छलका दर्द, फसल के साथ ही खेत भी बर्बाद
गोंडा। बाढ़ से तबाह हो चुके किसानों का दर्द छलक रहा है। करनैलगंज के नकहरा गांव के किसान लालजी मिश्र कहते हैं कि उनका सारा खेत नदी में समा गया है। न तो फसल ही बची है और न ही खेत ही। अभी भी खेत में पानी भरा है, आर्थिक मदद नहीं मिली है। इसी तरह नकहरा के ही ननकऊ यादव भी कहते हैं कि खेत पूरा बाढ़ के दायरे में है। मंगल यादव ने कहा कि नुकसान पर आर्थिक मदद मिल जाता तो आगे के लिए कुछ करते। बेचू प्रसाद यादव कहते हैं कि खेती तो अभी हो पाने की कोई संभावना नहीं है। सुनील मिश्र ने कहा कि किसानों को मदद दी जानी चाहिए। रामतेज यादव ने कहा कि पूछतांछ हुई है, लेकिन नुकसान पर कोई मदद नहीं मिली है। इसी तरह तरबगंज के ऐली परसौली गांव के किसान रामदयाल व राम सागर भी कहते हैं कि पूरी फसल बाढ़ में नष्ट हो गई है। किसानों के सामने अभी हुए नुकसान के साथ ही आगे की खेती की भी समस्या है।
रिंग बांध ने ही लील लिया किसानों का 14 बीघे खेत
तरबगंज के ऐली परसौली गांव में विशुनपुर के पास किसानों का 14 बीघा खेत तो रिंग बांध के दायरे में ही आ गया है। अस्थाई रूप से बनाए गए रिंग बांध में आए 14 बीघे खेत में सिर्फ फसल के नुकसान का मुआवजा किसानों को 20-20 हजार रुपये प्रति बीघे की दर से मिला है। वह भी किसानों ने रिंग बांध का विरोध किया तो स्थानीय प्रशासन ने सिंचाई विभाग से किसानों को दिलाया है। वहां के किसानों का कहना है कि उन्हें खेत का कोई मुआवजा नहीं दिया गया है और रिंग बांध बन जाने से अब खेती भी संभव नहीं है। इसके अलावा यहां के करीब 1200 हेक्टेयर जमीन बाढ़ के दायरे में हैं उन किसानों को भी कोई मदद नही मिली है।
डीएम ने अधिकारियों से मांगी किसानों के नुकसान की रिपोर्ट
जिलाधिकारी डॉ. नितिन बसंल ने गुरुवार की शाम को अधिकारियों से किसानों के नुकसान की रिपोर्ट मांगी है। जो फसल का नुकसान हुआ है उसके सत्यापन की पूरी रिपोर्ट मांगी गई है। उनका कहना है कि किसानों की सूची और नुकसान के आकलन की रिपोर्ट मिलने के बाद शासन से बजट की मांग किया जाएगा। उपजिलाधिकारी तरबगंज व करनैलगंज से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में हुए नुकसान की रिपोर्ट मांगी गई है। वहीं अन्य तहसीलों से भी अधिक बारिश से हुए नुकसान के बारे में रिपोर्ट मांगी गई है। इस महीने में किसानों के नुकसान की भरपाई के लिए रिपोर्ट दी जाएगी।
फसल बीमा में जलप्लावन शामिल न करने से नही मिला लाभ
किसानों की कृषि विभाग से उम्मीद टूट गई है। किसानों से कृषि विभाग से जलभराव से हुए नुकसान के भरपाई की मांग किया है लेकिन उन्हें मदद नहीं मिल रही है। उप कृषि निदेशक डॉ. मुकुल तिवारी ने बताया कि फसल बीमा योजना में जलप्लावन को इस बार शामिल नहीं किया गया है जिससे मदद मिलने की उम्मीद कम है। उन्होंने बताया कि केसीसी से जिन किसानों ने फसल में खर्च किया है उनका सर्वे किया जा रहा है। उन्हें ही कुछ मदद मिल सकती है। इस तरह बाढ़ प्रभावित किसानों को कृषि विभाग से कोई उम्मीद ही नही रही। अब प्रशासन से आस लगाए बैठे हैं।

नुकसान का कराया जा रहा आकलन
किसानों के नुकसान का आकलन कराया जा रहा है, तहसील से सत्यापन की रिपोर्ट मांगी गई है। 15 सितंबर तक रिपोर्ट मिलेगी। इसके आधार पर आर्थिक मदद के लिए शासन से बजट मांगा जाएगा। किसानों को नुकसान की भरपाई की जाएगी। -डॉ. नितिन बसंल, जिलाधिकारी
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