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कहीं हुई धक्का-मुक्की तो कहीं देर से खुले बैंक
अमर उजाला/गोंडा
Updated Sun, 13 Nov 2016 11:00 PM IST
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बैंंक में जुटी भीड़
- फोटो : अमर उजाला
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पुरानी करेंसी बदलकर नए नोट लेने के लिए रविवार को भी दिनभर विभिन्न बैंकों व एटीएम के बाहर लोगों की भीड़ लगी रही। जहां रुपये लेने के लिए लाइन में लगे लोगों की एक-दूसरे से धक्का-मुक्की तक हुई। उधर, रविवार का दिन होने के नाते कुछ बैक देर से भी खुले, जिसे लेकर लोगों में नाराजगी दिखाई पड़ी। अभी तक अधिकतर बैंकों के एटीएम चालू नहीं हो सके हैं। वहीं, मंगुराबाजार में स्टेट बैंक के बाहर लगी भीड़ में चार बुजुर्ग गश खाकर गिर पड़े।
500 व एक हजार के पुराने नोट बंद करने का असर बीते चार दिनों से बैंकों के बाहर दिखाई दे रहा है, जहां भीड़ सुबह आठ से रात के आठ बजे तक लगी रहती है। प्रधानमंत्री की बैंक प्रबंधन को सख्त हिदायत दिए जाने के बावजूद जिले में तमाम बैंक अभी भी ऐसे हैं, जो अपनी एटीएम सेवा को अब तक चालू नहीं कर पाए हैं।
इससे लोगों को हजार-दो हजार रुपये निकालने के लिए बैंकों में लाइन लगाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। एसबीआई हो या पंजाब नेशनल बैंक, एक्सिस हो या फिर एचडीएफसी, कोई भी बैंक ऐसा नहीं है, जहां चार दिनों से बैंक ग्राहकों का मजमा न लगा हो।
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वहीं ग्रामीण इलाकों में तो बैंक ग्राहकों की जैसे शामत ही आ गई है। जहां पैसा निकालने और जमा करने के लिए सुबह होते ही लोगों की भीड़ बैंकों के बाहर जमा हो जाती है, लेकिन इसके बाद भी लोगों को पैसा नहीं मिल पाता है।
रविवार को मंगुराबाजार में जमा व निकासी के लिए सुबह से लाइन लगाए लोगों में पैसा न मिलने से आक्रोश दिखाई पड़ा। यहां एकत्र लोग काफी देर बाद भी पैसा न मिलने से भड़क गए और हंगामा करना शुरू कर दिया, जिन्हें जैसे-तैसे चौकी प्रभारी ने समझा कर शांत कराया।
वहीं, भारतीय स्टेट बैक में तो सुबह चार बजे से ही उपभोक्ताओं की भीड़ जुटनी शुरू हो गई और सुबह होते-होते वही भीड़ सड़क पर आ गई। जिससे सड़क पर जाम की नौबत पैदा हो गई। इसी भीड़ में लाइन लगाए खड़े चार बुजुर्ग गश खाकर भी गिर पड़े।
शाखा प्रबंधक आरके ओझा ने बताया कि स्टाफ की कमी से बैंक ग्राहकों की समस्याओं का समाधान करने मे दिक्कतें हो रही हैं। वहीं शहर की लगभग सभी बैकों और उनके एटीएम के बाहर दिन-भर लोगों का हुजूम उमड़ा रहा। जहां से बड़ी मशक्कत के बाद लोगों को पैसा मिल पाया।
घर में बेटी की शादी के लिए बैंक से पैसा निकालने गई एक महिला को सुबह से शाम तक जब पैसा नहीं मिला तो वह वहीं बैंक के बाहर फूट-फूटकर रो पड़ी। महिला ने बताया कि वह सुबह से शाम तक लाइन में खड़ी पैसा मिलने का इंतजार करती रही, लेकिन बैंक से केवल कुछ ही लोगों को पैसा दिया गया।
कुछ ऐसा ही हाल लगभग सभी बैंकों का है। जिसकी शिकायत पूर्व जिला पंचायत सदस्य जितेंद्र कुमार उर्फ नान बच्चा पांडेय ने अधिकारियों से की है। रविवार को इलाहाबाद बैंकमें लड़की की शादी के लिये पैसा निकालने आई परबीन बेगम पत्नी ईदू निवासी पनईपुरवा सुबह से ही पांच हजार का विड्रॉल फार्म भरकर लाइन में खड़ी हो गई, लेकिन बैंक से उसे शाम तक पैसा नहीं मिला। इस पर वह लाइन में लगे-लगे ही फूटकर रो पड़ी। उसने बेटी की शादी की बात कहते हुए कार्ड भी दिखाया।
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500 व एक हजार के पुराने नोट बंद करने का असर बीते चार दिनों से बैंकों के बाहर दिखाई दे रहा है, जहां भीड़ सुबह आठ से रात के आठ बजे तक लगी रहती है। प्रधानमंत्री की बैंक प्रबंधन को सख्त हिदायत दिए जाने के बावजूद जिले में तमाम बैंक अभी भी ऐसे हैं, जो अपनी एटीएम सेवा को अब तक चालू नहीं कर पाए हैं।
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इससे लोगों को हजार-दो हजार रुपये निकालने के लिए बैंकों में लाइन लगाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। एसबीआई हो या पंजाब नेशनल बैंक, एक्सिस हो या फिर एचडीएफसी, कोई भी बैंक ऐसा नहीं है, जहां चार दिनों से बैंक ग्राहकों का मजमा न लगा हो।
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वहीं ग्रामीण इलाकों में तो बैंक ग्राहकों की जैसे शामत ही आ गई है। जहां पैसा निकालने और जमा करने के लिए सुबह होते ही लोगों की भीड़ बैंकों के बाहर जमा हो जाती है, लेकिन इसके बाद भी लोगों को पैसा नहीं मिल पाता है।
रविवार को मंगुराबाजार में जमा व निकासी के लिए सुबह से लाइन लगाए लोगों में पैसा न मिलने से आक्रोश दिखाई पड़ा। यहां एकत्र लोग काफी देर बाद भी पैसा न मिलने से भड़क गए और हंगामा करना शुरू कर दिया, जिन्हें जैसे-तैसे चौकी प्रभारी ने समझा कर शांत कराया।
वहीं, भारतीय स्टेट बैक में तो सुबह चार बजे से ही उपभोक्ताओं की भीड़ जुटनी शुरू हो गई और सुबह होते-होते वही भीड़ सड़क पर आ गई। जिससे सड़क पर जाम की नौबत पैदा हो गई। इसी भीड़ में लाइन लगाए खड़े चार बुजुर्ग गश खाकर भी गिर पड़े।
शाखा प्रबंधक आरके ओझा ने बताया कि स्टाफ की कमी से बैंक ग्राहकों की समस्याओं का समाधान करने मे दिक्कतें हो रही हैं। वहीं शहर की लगभग सभी बैकों और उनके एटीएम के बाहर दिन-भर लोगों का हुजूम उमड़ा रहा। जहां से बड़ी मशक्कत के बाद लोगों को पैसा मिल पाया।
घर में बेटी की शादी के लिए बैंक से पैसा निकालने गई एक महिला को सुबह से शाम तक जब पैसा नहीं मिला तो वह वहीं बैंक के बाहर फूट-फूटकर रो पड़ी। महिला ने बताया कि वह सुबह से शाम तक लाइन में खड़ी पैसा मिलने का इंतजार करती रही, लेकिन बैंक से केवल कुछ ही लोगों को पैसा दिया गया।
कुछ ऐसा ही हाल लगभग सभी बैंकों का है। जिसकी शिकायत पूर्व जिला पंचायत सदस्य जितेंद्र कुमार उर्फ नान बच्चा पांडेय ने अधिकारियों से की है। रविवार को इलाहाबाद बैंकमें लड़की की शादी के लिये पैसा निकालने आई परबीन बेगम पत्नी ईदू निवासी पनईपुरवा सुबह से ही पांच हजार का विड्रॉल फार्म भरकर लाइन में खड़ी हो गई, लेकिन बैंक से उसे शाम तक पैसा नहीं मिला। इस पर वह लाइन में लगे-लगे ही फूटकर रो पड़ी। उसने बेटी की शादी की बात कहते हुए कार्ड भी दिखाया।