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Gonda News: सड़क दुर्घटनाएं रोकने के लिए नहीं है एक्शन प्लान

Mon, 17 Mar 2025 11:33 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा Updated Mon, 17 Mar 2025 11:33 PM IST
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There is no action plan to prevent road accidents
गोंडा। जिले में लगातार सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं। हादसों में लोगों की जान जा रही है। इसके बाद भी जिम्मेदार विभागों के अफसरों के पास दुर्घटनाएं रोकने के लिए कोई एक्शन प्लान नहीं है। यातायात व्यवस्था भगवान भरोसे चल रही है। हर माह सड़क सुरक्षा समिति की बैठक होती है, उसमें मुद्दे भी उठाए जाते हैं, लेकिन धरातल पर कोई पुख्ता इंतजाम नहीं नजर आता है।
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सबसे अधिक हादसे गोंडा-अयोध्या रोड पर हो रहे हैं। यहां भारी ट्रैफिक दबाव के साथ ही जगह-जगह रोड इंजीनियरिंग में खामियों के साथ ही पटरियों पर दोनों तरफ अतिक्रमण के चलते लगातार हादसे हो रहे हैं। रोड पर कई जगह गिट्टी-मौरंग का भंडारण भी हादसे को दावत दे रहा है।
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आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी व फरवरी में जिलेभर में अलग-अलग इलाकों में हुए हादसों में 44 लोगों को जान गंवानी पड़ी है। किसी की मां तो किसी के पिता व भाई और बहन की मौत हो गई। परिवार के जिम्मेदार की हादसे में मौत से बच्चों की पढ़ाई तक छूट गई। उन्हें कच्ची उम्र में ई रिक्शा चलाकर परिवार का भरण-पोषण करना पड़ रहा है। वहीं, कई लोग गंभीर रूप से घायल होकर अस्पताल में जीवन व मृत्यु के बीच संघर्ष कर रहे हैं। इसके बाद भी जिम्मेदार विभागों ने हादसा रोकने के लिए कोई एक्शन प्लान नहीं बनाया गया है। इतना ही नहीं, तेज रफ्तार वाहन चालक हादसे के मौके से भागने में कामयाब हो रहे हैं। उन्हें न नियमों की चिंता है और न ही कार्रवाई का डर है। इस बाबत जिले के यातायात के नोडल मनोज रावत ने कहा कि इसकी जानकारी सड़क सुरक्षा समिति के प्रमुख से लेते तो बेहतर होता। एक्शन प्लान के बारे में उन्होंने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया।
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दो महीने में हुईं 80 दुर्घटनाएं
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, दो महीने में 80 दुर्घटनाएं दर्ज की गई हैं। इसमें जनवरी में 36 और फरवरी में 44 हादसे हुए। जनवरी में हुए हादसों में 21 और फरवरी में 23 लोगों ने जान गंवाई। वहीं, हादसे में घायलों की संख्या भी 52 रही है। इसमें 23 लोग जनवरी में तो 29 लोग फरवरी में घायल हुए हैं। हालांकि, ये सरकारी आंकड़े हैं। वास्तव में इससे ज्यादा दुर्घटनाएं हुई हैं।
बैठकें कर हर महीने हो रही खानापूर्ति
जिले में हर महीने सड़क सुरक्षा समिति की बैठक हो रही है। जिम्मेदार विभाग डीएम की अध्यक्षता में बैठक के बाद निर्देशों के पालन की रिपोर्ट देते हैं। इसमें पीडब्ल्यूडी, परिवहन समेत कुल 13 से अधिक विभाग के अधिकारी बैठक करते हैं, लेकिन जमीन पर इसका कोई असर नहीं दिखाई दे रहा है। ऐसे में दुर्घटनाओं में कमी नहीं आ पा रही है।

होमगार्ड व पीआरडी से चला रहे काम
यातायात पुलिस के पास मानक के हिसाब से पर्याप्त व प्रशिक्षित फोर्स नहीं है। यातायात प्रभारी उपनिरीक्षक जगदंबा गुुप्ता ने बताया कि उनके पास सात टीएसआई, 11 हेड कांस्टेबल, 27 कांस्टेबल, 47-47 पीआरडी व होमगार्ड के जवान के सहारे शहर की किसी तरह से ट्रैफिक व्यवस्था सुचारू की जा रही है। उन्होंने बताया कि वाहनों की तेज रफ्तार के साथ खराब रोड इंजीनियरिंग के चलते हादसे हो रहे हैं। इसको लेकर कई बार मुद्दे उठाए जा चुके हैं, लेकिन कुछ नहीं हो सका है।
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