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ढिबरी की रोशनी में कर रहे पढ़ाई
गोंडा/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 14 Feb 2016 11:21 PM IST
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18 फरवरी से शुरू हो रहीं बोर्ड परीक्षाओं को लेकर न तो पावर कॉर्पोरेशन ने ग्रामीण क्षेत्रों में होने वाली विद्युत आपूर्ति का समय बढ़ाया है और न ही टाइमिंग चेंज की है। यही वजह है कि 220 केवी कंट्रोल रूम से ग्रामीण क्षेत्रों के लिए निकलने वाले कई फीडरों से होने वाली बिजली आपूर्ति की टाइमिंग ठीक न होने से छात्र-छात्राओं को परीक्षा की तैयारी ढिबरी, लालटेन व मोमबत्ती की रोशनी में करनी पड़ रही है। जबकि आरजीजीवाई की दो योजनाओं में चयनित करीब 72 सौ मजरों का विद्युतीकरण न होने से यहां रहकर पढ़ने वाले छात्रों के पास एकमात्र लालटेन और मोमबत्ती की रोशनी में पढ़ाई करने के सिवाय दूसरा कोई विकल्प नहीं है।
पारेषण खंड विभाग के अवर अभियंता (ऑपरेशन) घनश्याम के मुताबिक अभी तक सिस्टम कंट्रोल से जिले के ग्रामीण क्षेत्र के फीडरों की टाइमिंग में फेरबदल और आपूर्ति बढ़ाने संबंधी कोई मैसेज उन्हें नहीं मिला है। इस कारण जो शेड्यूल पहले से चल रहा है, उसी के मुताबिक बिजली की आपूर्ति जनपदवासियों को हो रही है।
220 केवी कंट्रोल रूम से जिले के ग्रामीण इलाकों को होने वाली आपूर्ति में कुछ फीडरों की टाइमिंग इतनी खराब है कि संबंधित क्षेत्र में पढ़ने वाले बच्चों को न तो सुबह के वक्त बिजली मिल पाती है और न ही रात के समय। जिससे गांव में बिजली होते हुए भी उन्हें मोमबत्ती और लालटेन की रोशनी में पढ़ना पड़ता है।
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इसमें धानेपुर और नवाबगंज 33 केवी फीडर से जुड़े बिजलीघर प्रमुख हैं, जहां न तो पढ़ने के लिए बच्चों को सुबह बिजली मिल पाती है और न ही रात में।
विद्युत रोस्टर के साथ ही टाइमिंग न बढ़ाए जाने से छात्रों को पढ़ने के समय बिजली नहीं मिल पाती है। ऊपर से लोकल फाल्ट के चलते भी उनकी पढ़ाई बाधित होती रहती है।
छात्रा कौसरजहां का कहना है कि पावर कॉर्पोरेशन बोर्ड परीक्षा के समय भले ही दिन में बिजली न दे, लेकिन रात में उसे बिजली जरूर देनी चाहिए, ताकि पढ़ाई प्रभावित न हो।
वहीं, खुशबू की मानें तो दो साल पहले तक प्रदेश सरकार बोर्ड परीक्षा आते ही बिजली की टाइमिंग बढ़ा दिया करती थी, लेकिन इस बार ऐसा नहीं किया गया।
रुखसाना और शिखा का कहना है कि पावर कॉर्पोरेशन को खास तौर पर परीक्षा का ध्यान रखते हुए बिजली की टाइमिंग जरूर बढ़ानी चाहिए थी, लेकिन उसने अभी तक ऐसा नहीं किया।
अधिशाषी अभियंता गोंडा राधेश्याम भाष्कर का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों को सिस्टम कंट्रोल से लागू शेड्यूल के मुताबिक ही बिजली दी जा रही है। प्रयास यही है कि हर फीडर को ज्यादा से ज्यादा बिजली की आपूर्ति की जाए।
अभी तक बोर्ड परीक्षा को लेकर कोई नया शेड्यूल कॉर्पोरेशन के सिस्टम कंट्रोल की ओर से लागू नहीं किया गया है। जैसे ही नया शेड्यूल आता है, उसे लागू कर दिया जाएगा। कोशिश यही है कि लोकल फाल्ट बिल्कुल भी न हो और लोगों को समय से बिजली मिलती रहे।
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पारेषण खंड विभाग के अवर अभियंता (ऑपरेशन) घनश्याम के मुताबिक अभी तक सिस्टम कंट्रोल से जिले के ग्रामीण क्षेत्र के फीडरों की टाइमिंग में फेरबदल और आपूर्ति बढ़ाने संबंधी कोई मैसेज उन्हें नहीं मिला है। इस कारण जो शेड्यूल पहले से चल रहा है, उसी के मुताबिक बिजली की आपूर्ति जनपदवासियों को हो रही है।
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220 केवी कंट्रोल रूम से जिले के ग्रामीण इलाकों को होने वाली आपूर्ति में कुछ फीडरों की टाइमिंग इतनी खराब है कि संबंधित क्षेत्र में पढ़ने वाले बच्चों को न तो सुबह के वक्त बिजली मिल पाती है और न ही रात के समय। जिससे गांव में बिजली होते हुए भी उन्हें मोमबत्ती और लालटेन की रोशनी में पढ़ना पड़ता है।
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इसमें धानेपुर और नवाबगंज 33 केवी फीडर से जुड़े बिजलीघर प्रमुख हैं, जहां न तो पढ़ने के लिए बच्चों को सुबह बिजली मिल पाती है और न ही रात में।
विद्युत रोस्टर के साथ ही टाइमिंग न बढ़ाए जाने से छात्रों को पढ़ने के समय बिजली नहीं मिल पाती है। ऊपर से लोकल फाल्ट के चलते भी उनकी पढ़ाई बाधित होती रहती है।
छात्रा कौसरजहां का कहना है कि पावर कॉर्पोरेशन बोर्ड परीक्षा के समय भले ही दिन में बिजली न दे, लेकिन रात में उसे बिजली जरूर देनी चाहिए, ताकि पढ़ाई प्रभावित न हो।
वहीं, खुशबू की मानें तो दो साल पहले तक प्रदेश सरकार बोर्ड परीक्षा आते ही बिजली की टाइमिंग बढ़ा दिया करती थी, लेकिन इस बार ऐसा नहीं किया गया।
रुखसाना और शिखा का कहना है कि पावर कॉर्पोरेशन को खास तौर पर परीक्षा का ध्यान रखते हुए बिजली की टाइमिंग जरूर बढ़ानी चाहिए थी, लेकिन उसने अभी तक ऐसा नहीं किया।
अधिशाषी अभियंता गोंडा राधेश्याम भाष्कर का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों को सिस्टम कंट्रोल से लागू शेड्यूल के मुताबिक ही बिजली दी जा रही है। प्रयास यही है कि हर फीडर को ज्यादा से ज्यादा बिजली की आपूर्ति की जाए।
अभी तक बोर्ड परीक्षा को लेकर कोई नया शेड्यूल कॉर्पोरेशन के सिस्टम कंट्रोल की ओर से लागू नहीं किया गया है। जैसे ही नया शेड्यूल आता है, उसे लागू कर दिया जाएगा। कोशिश यही है कि लोकल फाल्ट बिल्कुल भी न हो और लोगों को समय से बिजली मिलती रहे।