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Gonda News: जीवन की व्यथा को मिटा देती है कथा
Tue, 05 May 2026 11:32 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Tue, 05 May 2026 11:32 PM IST
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प्रवाचक राजन जी महाराज व कथा सुनते श्रद्धालु। संवाद
कटरा बाजार/दुबहा बाजार। कौड़िया के पैड़ीबरा स्थित सम्मय माता मंदिर परिसर में आयोजित कथा में सोमवार को प्रवाचक राजन जी महाराज ने शिव-पार्वती विवाह के प्रसंग का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि माता सती के त्याग के बाद शिवजी 87 हजार साल तक तपस्या में लीन रहे। कामदेव के भस्म होने के बाद देवताओं की प्रार्थना पर महादेव देवी पार्वती से विवाह को तैयार हुए।
जब शिव की बरात हिमालय के द्वार पहुंची तो गणों के विचित्र स्वरूप को देखकर महारानी मैना डर गईं। तब नारद ने प्रकट होकर उन्हें शिव-पार्वती के पूर्व जन्म की कथा सुनाई, जिससे उनका संताप दूर हुआ और धूमधाम से विवाह संपन्न हुआ। राजन जी महाराज ने कहा कि भोजन बनाते समय यदि मन में यह भाव हो कि हम अपने ठाकुर जी के लिए भोग तैयार कर रहे हैं, तो रसोई बनाना ही जीवन का भजन बन जाता है।
राजन जी महाराज ने सेवा भाव पर जोर देते हुए कहा कि अलग से कुछ करना ही भागवत सेवा नहीं है। यदि आप व्यापार, नौकरी या खेती करते समय यह भाव रखते हैं कि इससे होने वाली आय का कुछ हिस्सा सत्कर्म में लगाएंगे, तो आपका कार्य ही भजन बन जाता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि समाज में उच्च शिक्षित लोग भी अपराध में पकड़े जा रहे हैं, क्योंकि जानकारी होने के बाद भी उनका विवेक जागृत नहीं हो पाया। उन्होंने कहा कि कथा जीवन की व्यथा को मिटा देती है। इस मौके पर विधायक सुभाष त्रिपाठी, डॉ. केके मिश्र, सरिता मिश्रा, डॉ. मृणाल पांडेय, सुमन पांडेय, पूर्व विधायक बैजनाथ दुबे, जिला पंचायत अध्यक्ष श्याम मनोहर तिवारी, भवानी भीख शुक्ल, जगरानी शुक्ला, सोनी शुक्ला आदि मौजूद रहीं।
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जब शिव की बरात हिमालय के द्वार पहुंची तो गणों के विचित्र स्वरूप को देखकर महारानी मैना डर गईं। तब नारद ने प्रकट होकर उन्हें शिव-पार्वती के पूर्व जन्म की कथा सुनाई, जिससे उनका संताप दूर हुआ और धूमधाम से विवाह संपन्न हुआ। राजन जी महाराज ने कहा कि भोजन बनाते समय यदि मन में यह भाव हो कि हम अपने ठाकुर जी के लिए भोग तैयार कर रहे हैं, तो रसोई बनाना ही जीवन का भजन बन जाता है।
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राजन जी महाराज ने सेवा भाव पर जोर देते हुए कहा कि अलग से कुछ करना ही भागवत सेवा नहीं है। यदि आप व्यापार, नौकरी या खेती करते समय यह भाव रखते हैं कि इससे होने वाली आय का कुछ हिस्सा सत्कर्म में लगाएंगे, तो आपका कार्य ही भजन बन जाता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि समाज में उच्च शिक्षित लोग भी अपराध में पकड़े जा रहे हैं, क्योंकि जानकारी होने के बाद भी उनका विवेक जागृत नहीं हो पाया। उन्होंने कहा कि कथा जीवन की व्यथा को मिटा देती है। इस मौके पर विधायक सुभाष त्रिपाठी, डॉ. केके मिश्र, सरिता मिश्रा, डॉ. मृणाल पांडेय, सुमन पांडेय, पूर्व विधायक बैजनाथ दुबे, जिला पंचायत अध्यक्ष श्याम मनोहर तिवारी, भवानी भीख शुक्ल, जगरानी शुक्ला, सोनी शुक्ला आदि मौजूद रहीं।

प्रवाचक राजन जी महाराज व कथा सुनते श्रद्धालु। संवाद
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