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Gonda News: आत्मनिर्भरता का भरोसा, सूने मेले ने तोड़ी उम्मीदें
Sat, 24 Oct 2026 11:41 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Sat, 24 Oct 2026 11:41 PM IST
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रामलीला मैदान में सरस मेले में पसरा सन्नाटा। - संवाद
गोंडा। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को उम्मीद थी कि सरस मेले में उत्पादों की बिक्री होगी लेकिन प्रचार-प्रसार के अभाव में शनिवार को समापन के दिन भी मेला सूना रहा। महिलाओं के मुताबिक, ग्राहकों की कमी से बिक्री प्रभावित हुई और किराया-भाड़ा निकालना भी मुश्किल हो गया।
वजीरगंज की नीरा तिवारी अचार बनाकर हर महीने 30 से 40 हजार रुपये कमाती हैं। उन्हें मेले से नए ग्राहक मिलने की उम्मीद थी लेकिन लोगों तक आयोजन की जानकारी ही नहीं पहुंची। मनकापुर के झिलाही की राधा देवी ने बताया कि उनके पति विष्णु प्रजापति जड़ी-बूटियों के उत्पाद बनाते हैं। समूह से जुड़ने के बाद उत्पादों को ब्रांड मिला और दुकानों पर मांग बढ़ी। इससे परिवार को हर महीने 30 से 35 हजार रुपये की आय हो रही है।
परेड सरकार की सुनीता निषाद गरम मसाले और गोबर के दीये बनाकर महीने में 10 से 12 हजार रुपये कमाती हैं। छितौनी डेहरास की शालिनी सरसों का तेल बेचकर 10 से 15 हजार रुपये तक कमाती हैं। दोनों को मेले में बिक्री बढ़ने की उम्मीद थी लेकिन ग्राहक ही नहीं पहुंचे।
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स्वरोजगार उपायुक्त जेएन राव ने बताया कि मेले में उत्पादों की बिक्री हुई है। भीड़ बढ़ाने के लिए जरूरी प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने महिलाओं के आरोपों को खारिज किया।
4500 रुपये से शुरू किया झाड़ू बनाने का काम
केशवपुर पहड़हवा की बंदे कश्यप ने 4500 रुपये लगाकर एक महीने पहले झाड़ू बनाने का काम शुरू किया है। अभी उनके उत्पाद दुकानों तक नहीं पहुंचे हैं। उन्हें दीपावली पर अच्छी बिक्री की उम्मीद है, ताकि तीन बेटियों और बेटे की पढ़ाई व परवरिश का खर्च उठा सकें। महिलाओं का कहना है कि सरस मेले का व्यापक प्रचार होता तो अधिक ग्राहक पहुंचते और बिक्री बढ़ती।
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वजीरगंज की नीरा तिवारी अचार बनाकर हर महीने 30 से 40 हजार रुपये कमाती हैं। उन्हें मेले से नए ग्राहक मिलने की उम्मीद थी लेकिन लोगों तक आयोजन की जानकारी ही नहीं पहुंची। मनकापुर के झिलाही की राधा देवी ने बताया कि उनके पति विष्णु प्रजापति जड़ी-बूटियों के उत्पाद बनाते हैं। समूह से जुड़ने के बाद उत्पादों को ब्रांड मिला और दुकानों पर मांग बढ़ी। इससे परिवार को हर महीने 30 से 35 हजार रुपये की आय हो रही है।
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परेड सरकार की सुनीता निषाद गरम मसाले और गोबर के दीये बनाकर महीने में 10 से 12 हजार रुपये कमाती हैं। छितौनी डेहरास की शालिनी सरसों का तेल बेचकर 10 से 15 हजार रुपये तक कमाती हैं। दोनों को मेले में बिक्री बढ़ने की उम्मीद थी लेकिन ग्राहक ही नहीं पहुंचे।
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स्वरोजगार उपायुक्त जेएन राव ने बताया कि मेले में उत्पादों की बिक्री हुई है। भीड़ बढ़ाने के लिए जरूरी प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने महिलाओं के आरोपों को खारिज किया।
4500 रुपये से शुरू किया झाड़ू बनाने का काम
केशवपुर पहड़हवा की बंदे कश्यप ने 4500 रुपये लगाकर एक महीने पहले झाड़ू बनाने का काम शुरू किया है। अभी उनके उत्पाद दुकानों तक नहीं पहुंचे हैं। उन्हें दीपावली पर अच्छी बिक्री की उम्मीद है, ताकि तीन बेटियों और बेटे की पढ़ाई व परवरिश का खर्च उठा सकें। महिलाओं का कहना है कि सरस मेले का व्यापक प्रचार होता तो अधिक ग्राहक पहुंचते और बिक्री बढ़ती।