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Gonda News: इलेक्ट्राॅनिक युग में भी नहीं घटी पत्र-पत्रिकाओं की लोकप्रियता
Sun, 30 Jul 2023 10:46 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Sun, 30 Jul 2023 10:46 PM IST
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एलबीएस महाविद्यालय में एनसीसी की छात्रा को प्रशस्ति-पत्र देती प्रबंध समिति की उपाध्यक्ष वर्षा
गोंडा। एलबीएस महाविद्यालय के शोध केंद्र पर रविवार को संपादकीय स्वतंत्रता विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें कई जनपदों के लेखक, कवि, संपादक व पत्रकार जुटे।
संगोष्ठी में वरिष्ठ लेखिका व कवि पारुल शुक्ला ने कहा कि इलेक्ट्राॅनिक युग में भी पत्र-पत्रिकाओं की लोकप्रियता कम नहीं हुई। पत्रिकाओं की अपनी अहमियत उसके संपादकीय गुणों के कारण है। संपादकीय पाठक को जोड़ने में सहायक होता है और पाठक की जिज्ञासा और प्रश्नाकुलता को शांत करता है। लखनऊ पब्लिक स्कूल के मीडिया प्रमुख विजय मिश्र ने कहा कि संपादकीय पत्रकारिता के क्षेत्र में नीति-निर्धारक, नीति नियामक और नीति का निदर्शन करती है। संपादकीय को स्वतंत्र गद्य रूप की तरह प्रतिष्ठित होना अत्यंत आवश्यक है।
वरिष्ठ कलमकार आशीष मिश्र ने कहा कि व्यवसायिकता के इस दौर में एक संपादक के सम्मुख संपादकीय बड़ी चुनौती की तरह है। साकेत महाविद्यालय, अयोध्या के अंग्रेजी विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. जनमेजय तिवारी ने कहा कि संपादन कार्य तलवार की धार पर चलने के समान है। इस दौरान एनसीसी की सीनियर अंडर ऑफिसर निधि सोनी को चेक प्रदान कर सम्मानित भी किया गया।
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संगोष्ठी में प्रो. ऋषिकेश सिंह, जुगल किशोर शुक्ल, प्रो. शैलेंद्रनाथ मिश्र, प्रो. दीनानाथ तिवारी, वर्षा सिंह, उमेश शाह, महेंद्र सिंह छाबड़ा, शुभम पाठक, प्रो. वीसीएचएनके श्रीनिवास राव, प्रो. मंशाराम वर्मा, रविचंद्र त्रिपाठी, डॉ. ओंकार पाठक, प्रो. जितेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे।
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संगोष्ठी में वरिष्ठ लेखिका व कवि पारुल शुक्ला ने कहा कि इलेक्ट्राॅनिक युग में भी पत्र-पत्रिकाओं की लोकप्रियता कम नहीं हुई। पत्रिकाओं की अपनी अहमियत उसके संपादकीय गुणों के कारण है। संपादकीय पाठक को जोड़ने में सहायक होता है और पाठक की जिज्ञासा और प्रश्नाकुलता को शांत करता है। लखनऊ पब्लिक स्कूल के मीडिया प्रमुख विजय मिश्र ने कहा कि संपादकीय पत्रकारिता के क्षेत्र में नीति-निर्धारक, नीति नियामक और नीति का निदर्शन करती है। संपादकीय को स्वतंत्र गद्य रूप की तरह प्रतिष्ठित होना अत्यंत आवश्यक है।
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वरिष्ठ कलमकार आशीष मिश्र ने कहा कि व्यवसायिकता के इस दौर में एक संपादक के सम्मुख संपादकीय बड़ी चुनौती की तरह है। साकेत महाविद्यालय, अयोध्या के अंग्रेजी विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. जनमेजय तिवारी ने कहा कि संपादन कार्य तलवार की धार पर चलने के समान है। इस दौरान एनसीसी की सीनियर अंडर ऑफिसर निधि सोनी को चेक प्रदान कर सम्मानित भी किया गया।
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संगोष्ठी में प्रो. ऋषिकेश सिंह, जुगल किशोर शुक्ल, प्रो. शैलेंद्रनाथ मिश्र, प्रो. दीनानाथ तिवारी, वर्षा सिंह, उमेश शाह, महेंद्र सिंह छाबड़ा, शुभम पाठक, प्रो. वीसीएचएनके श्रीनिवास राव, प्रो. मंशाराम वर्मा, रविचंद्र त्रिपाठी, डॉ. ओंकार पाठक, प्रो. जितेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे।