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Gonda News: इंजीनियरिंग विभाग के अफसरों को सता रहा सीबीआई का डर

Fri, 15 Nov 2024 11:07 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा Updated Fri, 15 Nov 2024 11:07 PM IST
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The fear of CBI continues to haunt the officers of the engineering department
गोंडा। रेलवे के इंजीनियरिंग विभाग में भ्रष्टाचार की अहम जानकारियां सीबीआई के हाथ लगने की खबर से विभाग के अधिकारियों की धड़कन बढ़ गई है। पूर्वोत्तर रेलवे के इकलौते डिपो पर गोरखपुर और लखनऊ मुख्यालय की निगरानी होने के बाद भी रिश्वतखोरी का खेल चलता रहा। ठेकेदार की शिकायत पर सीनियर सेक्शन इंजीनियर को घूस लेते पकड़े जाने से बड़े-बड़ों की धड़कन बढ़ी हुई है।
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गोंडा रेलवे स्टेशन के पास बना ट्रैक डिपो पूर्वोत्तर रेलवे का एकमात्र डिपो है। जिसका नियंत्रण गोरखपुर मुख्यालय में तैनात प्रिंसिपल चीफ इंजीनियर एवं लखनऊ मंडल स्थित वरिष्ठ मंडल अभियंता के हाथों में है। यहां से पूर्वोत्तर रेलवे के साथ ही लखनऊ, वाराणसी एवं इज्जतनगर मंडल में रेलवे के सामानों को भेजा व मंगाया जाता है। यहां से सामानों की लोडिंग व अनलोडिंग में बड़े पैमाने पर खेल लंबे समय से चल रहा था। जिसकी शिकायत पर कार्रवाई न होने पर ठेकेदार लोकनाथ उर्फ राहुल तिवारी ने सीबीआई की एंटी करप्शन विंग से गुहार लगाई थी। तब सीबीआई ने सीनियर सेक्शन इंजीनियर को 50 हजार रुपये घूस लेते रंगे हाथ दबोचा था। अब विभाग के अधिकारियों को डर सता रहा है कि सीबीआई से पूछताछ में कहीं उनका नाम तो नहीं सामने आ गया।
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दरअसल सीनियर सेक्शन इंजीनियर अरुण कुमार मिश्र का रेलवे में सिक्का चलता था। अक्तूबर 2023 में अरुण कुमार मिश्र एवं डिपो के ही जूनियर इंजीनियर दीपक वर्मा का तबादला हुआ था, लेकिन दोनों कार्यमुक्त ही नहीं हुए। अरुण खुद तो अपनी कुर्सी पर जमा रहा, साथ ही उसने जूनियर इंजीनियर दीपक वर्मा को भी कार्यमुक्त नहीं होने दिया। रसूख ऐसा था कि लखनऊ से उसके स्थान पर आए इंजीनियर अशोक चौरसिया कुछ दिन बाद ही लखनऊ लौट गए। अशोक चौरसिया का नाम डिपो के रजिस्टर में ही दर्ज रहा, लेकिन उन्हें यहां प्रभार नहीं मिला। यही कारण रहा कि अरुण मिश्र की गिरफ्तारी के बाद उसके करीबी जूनियर इंजीनियर दीपक वर्मा को ही उसके पद का प्रभार मिल गया। इससे भी कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं।
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