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सरयू-राप्ती में नहीं मचेगी उथल-पुथल, चार नंदियों को मिलेगा पुर्नजीवन
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गोंडा। सरयू नहर परियोजना का शुभारंभ हो जाने से अब बरसात के दौरान इस इलाके में सरयू राप्ती व घाघरा का उफान मारता पानी कहन नहीं बरपा पाएगा। इन नहरों के संचालन से नदियों का पानी कैनाल के जरिए पूरे जिले में पहुंचेगा।
इससे न केवल खेतों में साल भर फसल लहलाएगी वरन छोटी नदियों को भी पानी से पुनर्जीवन मिलेगा। परियोजना का फायदा जिले के किसानों को 20 दिसंबर से मिलने लगेगा। इसकी शुरूआत गोंडा की सभी शाखाओं के साथ ही परियोजना की तरबगंज व इटियाथोक शाखाओं में राप्ती का पानी छोड़ने के साथ होगी।
सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता त्रयंबक त्रिपाठी बताते हैं कि सिंचाई विभाग की तरफ से गोंडा की सभी शाखाओं में 20 दिसंबर को पानी छोड़ने की तैयारी पूरी हो गयी है। इससे जहां किसान गेहूं व अन्य फसलों की सिंचाई का फायदा उठा सकेंगे वही तरबगंज की टेल से टेढ़ी नदी में भी परियोजना का पानी गिराने के साथ अन्य छोटी नदियों को भी रिचार्ज कर उनका पुराना स्वरूप वापस लौटाने का प्रयास होगा।
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यह परियोजना सिर्फ सिंचाई के लिहाज से ही नहीं अपितु क्षेत्र की अन्य छोटी जीवनदायी नदियों को भी पुर्नजीवन देने में कारगर साबित होगी। इन छोटी नदियों में साल भर पानी रहने से जिले के पांच लाख किसानों को इसका सीधा फायदा भी मिलेगा।
देवीपाटन मंडल के चारों जिलों के दोनों छोर पर दो बड़ी नदियां बहती हैं। बहराइच व गोंडा के दक्षिणी छोर से होते हुए घाघरा-सरयू निकलती है तो श्रावस्ती व बलरामपुर के उत्तरी छोर से राप्ती बहती है। दोनों के मध्य चार जिलों में करीब 15 से 18 लाख किसान खेती करते हैं।
परियोजना के तहत सरयू योजक नहर घाघरा-सरयू-राप्ती को जोड़ती है। इस सरयू योजक नहर से सरयू की मुख्य नहर निकाली गई है। इस मुख्य नहर की एक गोंडा शाखा तो दूसरी बस्ती शाखा है। गोंडा शाखा से तरबगंज, इटियाथोक, मनकापुर व टिकरी की शाखा निकली है।
तरबगंज नहर शाखा के माइनर से निकलने वाली सभी टेल को टेढ़ी नदी से मिलाया गया है। तरबगंज नहर शाखा बिसुही नदी व टेढ़ी नदी के बीच से निकली है और इसके टेल को टेढ़ी नदी तक पहुंचाया गया है। इससे मुख्य शाखा, माइनर व टेल से जहां किसानों को सिंचाई का फायदा मिलेगा वहीं गरमी के दिनों में सूख रही टेढ़ी को भी जल मिलेगा जिससे बहराइच के चित्तौड़ा से निकलने वाली टेढ़ी साल भर हरी भरी रहेगी।
इसके साथ ही गोंडा मुख्य शाखा से इटियाथोक शाखा को निकाला गया है। यह कुआनों व बिसुही नदी के साथ मनोरमा नदी को जोड़ेगी। कुआनों नदी बलरामपुर से गोंडा होते हुए बस्ती के पास सरयू में मिलती है। ऐसे में बिसुही भी आगे चलकर सरयू में मिली है।
सिंचाई विभाग ने नहरों के कैनाल को इस तरह से जोड़ा है कि नहरों में अधिक पानी होने पर टेल के माध्यम से पानी इन छोटी नदियों या नालों में गिराया जाएगा जो आगे घाघरा व सरयू में समाहित होंगी लेकिन इसका फायदा छोटी नदियों को होगा जो पुर्नजीवित होंगी और साल भर पानी से भरी रहेगी।
नदियों के साथ नहरों के बराबर संचालन से ग्राउंड वाटर भी रिचार्ज होगा। इससे आए दिन गर्मियों में नलों के सूखने, पानी न मिलने की परेशानी भी दूर होगी। पूरे जिले में बिछे सरयू नहर के जाल से जहां जिले के ढाई लाख किसानों को सिंचाई का लाभ मिलेगा वहीं नदियों में बराबर पानी रहने के कारण नदियों से भी सिंचाई की जा सकेगी।
खास कर बरसात के दिनों में घाघरा, सरयू व राप्ती में बाढ़ आती है। इससे किसानों की फसलें तबाह हो जाती हैं। इन नहरों के संचालन से नदियों का पानी कैनाल के जरिए पूरे जिले में पहुंचेगा और बड़ी नदियों के उफान का संकट कम हो जाएगा।
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इससे न केवल खेतों में साल भर फसल लहलाएगी वरन छोटी नदियों को भी पानी से पुनर्जीवन मिलेगा। परियोजना का फायदा जिले के किसानों को 20 दिसंबर से मिलने लगेगा। इसकी शुरूआत गोंडा की सभी शाखाओं के साथ ही परियोजना की तरबगंज व इटियाथोक शाखाओं में राप्ती का पानी छोड़ने के साथ होगी।
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सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता त्रयंबक त्रिपाठी बताते हैं कि सिंचाई विभाग की तरफ से गोंडा की सभी शाखाओं में 20 दिसंबर को पानी छोड़ने की तैयारी पूरी हो गयी है। इससे जहां किसान गेहूं व अन्य फसलों की सिंचाई का फायदा उठा सकेंगे वही तरबगंज की टेल से टेढ़ी नदी में भी परियोजना का पानी गिराने के साथ अन्य छोटी नदियों को भी रिचार्ज कर उनका पुराना स्वरूप वापस लौटाने का प्रयास होगा।
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यह परियोजना सिर्फ सिंचाई के लिहाज से ही नहीं अपितु क्षेत्र की अन्य छोटी जीवनदायी नदियों को भी पुर्नजीवन देने में कारगर साबित होगी। इन छोटी नदियों में साल भर पानी रहने से जिले के पांच लाख किसानों को इसका सीधा फायदा भी मिलेगा।
देवीपाटन मंडल के चारों जिलों के दोनों छोर पर दो बड़ी नदियां बहती हैं। बहराइच व गोंडा के दक्षिणी छोर से होते हुए घाघरा-सरयू निकलती है तो श्रावस्ती व बलरामपुर के उत्तरी छोर से राप्ती बहती है। दोनों के मध्य चार जिलों में करीब 15 से 18 लाख किसान खेती करते हैं।
परियोजना के तहत सरयू योजक नहर घाघरा-सरयू-राप्ती को जोड़ती है। इस सरयू योजक नहर से सरयू की मुख्य नहर निकाली गई है। इस मुख्य नहर की एक गोंडा शाखा तो दूसरी बस्ती शाखा है। गोंडा शाखा से तरबगंज, इटियाथोक, मनकापुर व टिकरी की शाखा निकली है।
तरबगंज नहर शाखा के माइनर से निकलने वाली सभी टेल को टेढ़ी नदी से मिलाया गया है। तरबगंज नहर शाखा बिसुही नदी व टेढ़ी नदी के बीच से निकली है और इसके टेल को टेढ़ी नदी तक पहुंचाया गया है। इससे मुख्य शाखा, माइनर व टेल से जहां किसानों को सिंचाई का फायदा मिलेगा वहीं गरमी के दिनों में सूख रही टेढ़ी को भी जल मिलेगा जिससे बहराइच के चित्तौड़ा से निकलने वाली टेढ़ी साल भर हरी भरी रहेगी।
इसके साथ ही गोंडा मुख्य शाखा से इटियाथोक शाखा को निकाला गया है। यह कुआनों व बिसुही नदी के साथ मनोरमा नदी को जोड़ेगी। कुआनों नदी बलरामपुर से गोंडा होते हुए बस्ती के पास सरयू में मिलती है। ऐसे में बिसुही भी आगे चलकर सरयू में मिली है।
सिंचाई विभाग ने नहरों के कैनाल को इस तरह से जोड़ा है कि नहरों में अधिक पानी होने पर टेल के माध्यम से पानी इन छोटी नदियों या नालों में गिराया जाएगा जो आगे घाघरा व सरयू में समाहित होंगी लेकिन इसका फायदा छोटी नदियों को होगा जो पुर्नजीवित होंगी और साल भर पानी से भरी रहेगी।
नदियों के साथ नहरों के बराबर संचालन से ग्राउंड वाटर भी रिचार्ज होगा। इससे आए दिन गर्मियों में नलों के सूखने, पानी न मिलने की परेशानी भी दूर होगी। पूरे जिले में बिछे सरयू नहर के जाल से जहां जिले के ढाई लाख किसानों को सिंचाई का लाभ मिलेगा वहीं नदियों में बराबर पानी रहने के कारण नदियों से भी सिंचाई की जा सकेगी।
खास कर बरसात के दिनों में घाघरा, सरयू व राप्ती में बाढ़ आती है। इससे किसानों की फसलें तबाह हो जाती हैं। इन नहरों के संचालन से नदियों का पानी कैनाल के जरिए पूरे जिले में पहुंचेगा और बड़ी नदियों के उफान का संकट कम हो जाएगा।