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शादी के लिए रकम बढ़ाई जाए
अमर उजाला/गोंडा
Updated Thu, 17 Nov 2016 11:56 PM IST
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घर में खड़े परिवारीजन
- फोटो : अमर उजाला
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सहालग के सीजन में केंद्र सरकार की ओर से शादियों के लिए ढाई लाख की रकम निकासी की छूट मिलने से लोगों को कुछ राहत तो जरूर मिली है मगर लोग इसे और बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। नवंबर व दिसंबर माह में तमाम लोगों के घरों में शादियां हैं।
ऐसे में मोटी रकम न मिलने से उनकी खुशियों में खलल पैदा हो रहा है। शादी विवाह वाले घरों में लोगों ने बेटी की शादी में गाड़ी से लेकर गहनों व अन्य सामान देने के सपने पाल रखे हैं लेकिन सरकार की ओर से केवल ढाई लाख रुपये तक की ही रकम निकासी से वे थोड़ा मायूस जरूर दिख रहे हैं। मगर इसके बावजूद कई परिवार कालाबाजारी पर नोटबंदी की चोट को जायज ठहरा रहे हैं।
बहलोलपुर निवासी विजय शंकर दूबे के भाई अजय शंकर के बड़ी बेटी की तिलक 24 नवंबर को है, लेकिन उनके खाते में जमा रुपये ही निकल पा रहे हैं। विजय का कहना है कि बडे़ भाई अजय रुपये के इंतजाम को लेकर परेशान है।
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वह रुपये न निकलने की समस्या को लेकर बैंक मैनेजर से मिले थे, लेकिन वहां से जवाब मिला जब शादी के लिए कोई नया आदेश उन्हें मिलेगा तभी वह कुछ मदद कर पाएंगे। विजय बताते हैं कि यदि नया आदेश लागू भी हो गया तो ढाई लाख रुपये में शादी कैसे निपट पाएगी, यह चिंता उनके परिवार को खाए जा रही है। फिलहाल शादी तो निपटानी है। विजय कहते हैं ढाई लाख रुपये निकलने से कुछ राहत तो जरूर मिलेगी। हां सरकार को चाहिए की शादी वाले परिवार के लोगों को थोड़ी और छूट मिलनी चाहिए।
नवाबगंज के महंगूपुर गांव में अवधेश पांडेय के बेटी का चार दिसंबर को तिलक है। हर जगह रुपये का खर्च है। वह झल्ला कर कहते हैं कि किसी कपड़ा वाले को चेक दें जब कोई लेने को तैयार नहीं। छोटी मोटी चीजों को खरीदने के लिए नोटों की किल्लत से जूझना पड़ रहा है।
अवधेश के भाई विनोद कहते हैं नोटबंदी का फैसले को लड़का व लड़की दोनों पक्ष जानते है।ं ऐसे में हम मिल-जुल कर और उधार सामान लेकर काम चला लेंगे लेकिन नोट बंद करके केंद्र सरकार ने बड़ा व सराहनीय कदम उठाया है। इसी तरह शहर के पंतनगर निवासी जगदीश ओझा भी शादी को लेकर फिक्रमंद दिखे। वह कहते हैं कि कितने दिनों से अरमान पाले थे कि बेटी की शादी में दिल खोल के खर्च करूंगा लेकिन सरकार ने ही हाथ बांध दिए। बोले कोई बात नहीं सब कुछ ठीक हो जाएगा।
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ऐसे में मोटी रकम न मिलने से उनकी खुशियों में खलल पैदा हो रहा है। शादी विवाह वाले घरों में लोगों ने बेटी की शादी में गाड़ी से लेकर गहनों व अन्य सामान देने के सपने पाल रखे हैं लेकिन सरकार की ओर से केवल ढाई लाख रुपये तक की ही रकम निकासी से वे थोड़ा मायूस जरूर दिख रहे हैं। मगर इसके बावजूद कई परिवार कालाबाजारी पर नोटबंदी की चोट को जायज ठहरा रहे हैं।
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बहलोलपुर निवासी विजय शंकर दूबे के भाई अजय शंकर के बड़ी बेटी की तिलक 24 नवंबर को है, लेकिन उनके खाते में जमा रुपये ही निकल पा रहे हैं। विजय का कहना है कि बडे़ भाई अजय रुपये के इंतजाम को लेकर परेशान है।
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वह रुपये न निकलने की समस्या को लेकर बैंक मैनेजर से मिले थे, लेकिन वहां से जवाब मिला जब शादी के लिए कोई नया आदेश उन्हें मिलेगा तभी वह कुछ मदद कर पाएंगे। विजय बताते हैं कि यदि नया आदेश लागू भी हो गया तो ढाई लाख रुपये में शादी कैसे निपट पाएगी, यह चिंता उनके परिवार को खाए जा रही है। फिलहाल शादी तो निपटानी है। विजय कहते हैं ढाई लाख रुपये निकलने से कुछ राहत तो जरूर मिलेगी। हां सरकार को चाहिए की शादी वाले परिवार के लोगों को थोड़ी और छूट मिलनी चाहिए।
नवाबगंज के महंगूपुर गांव में अवधेश पांडेय के बेटी का चार दिसंबर को तिलक है। हर जगह रुपये का खर्च है। वह झल्ला कर कहते हैं कि किसी कपड़ा वाले को चेक दें जब कोई लेने को तैयार नहीं। छोटी मोटी चीजों को खरीदने के लिए नोटों की किल्लत से जूझना पड़ रहा है।
अवधेश के भाई विनोद कहते हैं नोटबंदी का फैसले को लड़का व लड़की दोनों पक्ष जानते है।ं ऐसे में हम मिल-जुल कर और उधार सामान लेकर काम चला लेंगे लेकिन नोट बंद करके केंद्र सरकार ने बड़ा व सराहनीय कदम उठाया है। इसी तरह शहर के पंतनगर निवासी जगदीश ओझा भी शादी को लेकर फिक्रमंद दिखे। वह कहते हैं कि कितने दिनों से अरमान पाले थे कि बेटी की शादी में दिल खोल के खर्च करूंगा लेकिन सरकार ने ही हाथ बांध दिए। बोले कोई बात नहीं सब कुछ ठीक हो जाएगा।