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समय से हो जांच, मलेरिया से जीवन पर न आए आंच
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फोटो-11 गोंडा में कूलर के पानी में मच्छरों का लार्वा ढूढ़ता स्वास्थ्यकर्मी। - संवाद
- फोटो : GONDA
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गोंडा। चार से आठ घंटे के चक्र में बुखार, सिरदर्द, शरीर दर्द, ठंड लगना, पसीना आना और मिचली व उल्टी जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत आशा कार्यकर्ता या स्वास्थ्य कर्मी से संपर्क करें। उनकी मदद से प्रशिक्षित चिकित्सक को दिखा कर उनकी सलाह पर मलेरिया की जांच कराई जानी चाहिए। मच्छरों से बचाव और लक्षण दिखने पर तुरंत जांच और इलाज मलेरिया से बचाव का बेहतर उपाय है। समय से जांच व इलाज न होने से मलेरिया जानलेवा हो सकता है। मलेरिया की दवा बीच में नहीं छोड़नी है। लक्षण समाप्त होने पर भी मलेरिया का पूरा इलाज करवाना है। ये बातें रविवार को मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. राधेश्याम केसरी ने विश्व मलेरिया दिवस की पूर्व संध्या पर मच्छरजनित रोगों से बचाव का नसीहत देते हुए कही।
सीएमओ ने बताया कि मच्छर जनित रोगों केे उन्मूलन के लिए विभाग की ओर से गठित टीमें 134 गांवों में जाकर डेंगू व मलेरिया के मच्छरों का लार्वा खोज रही है। बताया कि मलेरिया में परजीवी संक्रमण और लाल रक्त कोशिकाओं के नष्ट होने से थकान की वजह से एनीमिया, दौरा या चेतना की हानि की स्थिति बन जाती है। सेरिब्रल मलेरिया में परजीवी रक्त के जरिये मस्तिष्क तक पहुंच जाते हैं और यह शरीर के अन्य अंगों में भी पहुंच कर हानी पहुंचाते हैं। गर्भावस्था में मलेरिया का होना गर्भवती के साथ-साथ भ्रूण और नवजात के लिए भी खतरा है। मलेरिया रोग के बोझ को कम करने व जीवन बचाने के लिए नवाचार का उपयोग करें की थीम पर जनपद में आज विश्व मलेरिया दिवस मनाया जाएगा।
मलेरिया से बचाव के उपाय
जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. मंजुला आनंद ने बताया कि डेंगू और मलेरिया जैसी घातक बीमारियों से बचने के लिए सबसे जरूरी है कि अपने घर या आसपास पानी जमा न होने दें। जमा साफ पानी में मलेरिया व डेंगू के मच्छर पैदा होते हैं। पानी को ढककर रखें, सप्ताह में कम से कम एक बार कूलर, पानी के ड्रम, गमलों, फूलदानों और पक्षियों के बर्तन में रखे पानी को जरूर बदलें। शरीर को पूरी तरह ढंकने वाले कपड़े पहनें, जिससे मच्छरों के काटने से बचा जा सके। बुखार होने पर खून की जांच मलेरिया पैरासाइड के लिए करवाएं।
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सीएमओ ने बताया कि मच्छर जनित रोगों केे उन्मूलन के लिए विभाग की ओर से गठित टीमें 134 गांवों में जाकर डेंगू व मलेरिया के मच्छरों का लार्वा खोज रही है। बताया कि मलेरिया में परजीवी संक्रमण और लाल रक्त कोशिकाओं के नष्ट होने से थकान की वजह से एनीमिया, दौरा या चेतना की हानि की स्थिति बन जाती है। सेरिब्रल मलेरिया में परजीवी रक्त के जरिये मस्तिष्क तक पहुंच जाते हैं और यह शरीर के अन्य अंगों में भी पहुंच कर हानी पहुंचाते हैं। गर्भावस्था में मलेरिया का होना गर्भवती के साथ-साथ भ्रूण और नवजात के लिए भी खतरा है। मलेरिया रोग के बोझ को कम करने व जीवन बचाने के लिए नवाचार का उपयोग करें की थीम पर जनपद में आज विश्व मलेरिया दिवस मनाया जाएगा।
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मलेरिया से बचाव के उपाय
जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. मंजुला आनंद ने बताया कि डेंगू और मलेरिया जैसी घातक बीमारियों से बचने के लिए सबसे जरूरी है कि अपने घर या आसपास पानी जमा न होने दें। जमा साफ पानी में मलेरिया व डेंगू के मच्छर पैदा होते हैं। पानी को ढककर रखें, सप्ताह में कम से कम एक बार कूलर, पानी के ड्रम, गमलों, फूलदानों और पक्षियों के बर्तन में रखे पानी को जरूर बदलें। शरीर को पूरी तरह ढंकने वाले कपड़े पहनें, जिससे मच्छरों के काटने से बचा जा सके। बुखार होने पर खून की जांच मलेरिया पैरासाइड के लिए करवाएं।
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